
छत्तीसगढ़ भाड़ा नियंत्रण संशोधन विधेयक पारित (photo source- Patrika)
Chhattisgarh Rent Law: विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान बुधवार को मंत्री ओपी चौधरी द्वारा प्रस्तुत 'छत्तीसगढ़ भाड़ा नियंत्रण संशोधन विधेयक' ध्वनिमत से पारित कर दिया गया है। यह संशोधन न केवल मकान मालिक और किराएदार के अधिकारों को परिभाषित करता है, बल्कि विवादों के त्वरित निपटारे के लिए एक मजबूत कानूनी ढांचा भी प्रदान करता है।
यह नया विधेयक छत्तीसगढ़ भाड़ा नियंत्रण अधिनियम, 2011 का अद्यतन रूप है, जिसे केंद्र सरकार के 'आदर्श किराएदारी अधिनियम, 2021' के अनुरूप तैयार किया गया है। इसका प्राथमिक उद्देश्य मकान मालिकों को अपनी खाली पड़ी संपत्तियों को किराए पर देने के लिए प्रोत्साहित करना और दोनों पक्षों के बीच भरोसे का माहौल बनाना है।
छत्तीसगढ़ का यह कदम राज्यों के बीच एक उदाहरण पेश कर रहा है। उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में पहले से ही ऐसे कानून लागू हैं, जबकि मध्य प्रदेश और बिहार जैसे राज्य भी इस मॉडल को अपनाने की तैयारी में हैं। यह स्पष्ट है कि इस विधेयक का उद्देश्य केवल दंडित करना नहीं, बल्कि प्रदेश में एक स्वस्थ 'रेंटल इकोसिस्टम' बनाना है।
स्पष्ट नियमों के अभाव में अक्सर दोनों पक्षों के बीच विवाद की स्थिति उत्पन्न होती थी। अब, भाड़ा नियंत्रक या भाड़ा नियंत्रण अधिकरण के पास विवादों के निपटारे के लिए व्यापक अधिकार होंगे, जिससे अदालती मामलों के बोझ में भी कमी आने की संभावना है। यह कानून मकान मालिकों के लिए निवेश की सुरक्षा और किराएदारों के लिए गरिमापूर्ण आवास का अधिकार सुनिश्चित करता है।
Updated on:
16 Jul 2026 07:16 am
Published on:
16 Jul 2026 07:16 am
