16 जुलाई 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

छत्तीसगढ़ में अब मकान मालिक की नहीं चलेगी मनमानी! 10% से ज्यादा किराया बढ़ाया तो होगी कार्रवाई, सरकार का नया नियम लागू

Chhattisgarh Rent Control Amendment Bill: छत्तीसगढ़ भाड़ा नियंत्रण संशोधन विधेयक के तहत अब मकान मालिक मनमर्जी से किराया नहीं बढ़ा सकेंगे।
2 min read
Google source verification
Chhattisgarh Rent Law

छत्तीसगढ़ भाड़ा नियंत्रण संशोधन विधेयक पारित (photo source- Patrika)

Chhattisgarh Rent Law: विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान बुधवार को मंत्री ओपी चौधरी द्वारा प्रस्तुत 'छत्तीसगढ़ भाड़ा नियंत्रण संशोधन विधेयक' ध्वनिमत से पारित कर दिया गया है। यह संशोधन न केवल मकान मालिक और किराएदार के अधिकारों को परिभाषित करता है, बल्कि विवादों के त्वरित निपटारे के लिए एक मजबूत कानूनी ढांचा भी प्रदान करता है।

यह नया विधेयक छत्तीसगढ़ भाड़ा नियंत्रण अधिनियम, 2011 का अद्यतन रूप है, जिसे केंद्र सरकार के 'आदर्श किराएदारी अधिनियम, 2021' के अनुरूप तैयार किया गया है। इसका प्राथमिक उद्देश्य मकान मालिकों को अपनी खाली पड़ी संपत्तियों को किराए पर देने के लिए प्रोत्साहित करना और दोनों पक्षों के बीच भरोसे का माहौल बनाना है।

CG Rent Control Act: नए नियमों के मुख्य बिंदु

  • किराए में वृद्धि पर नियंत्रण: यदि मकान या दुकान का किराया 2000 रुपए प्रति माह से कम है, तो वार्षिक वृद्धि अधिकतम 5% होगी। इससे अधिक होने पर अधिकतम 10% वार्षिक वृद्धि की जा सकेगी।
  • बिजली-पानी पर सख्ती: मकान मालिक अब किसी भी स्थिति में किराएदार की बिजली या पानी की आपूर्ति नहीं रोक सकेगा। ऐसा करना कानूनी अपराध की श्रेणी में आएगा।
  • दंड का प्रावधान: नियमों का उल्लंघन करने पर दोषी पाए जाने वाले पक्ष को 5000 रुपए से अधिक का जुर्माना और तीन माह तक का कारावास, या दोनों का सामना करना पड़ सकता है।

किराएदार के प्रमुख अधिकार

  • लिखित करार: किराएदार को रेंट एग्रीमेंट (करारनामा) की एक प्रति प्राप्त करने का पूर्ण अधिकार है।
  • पावती का हक: सुरक्षा निधि (सिक्योरिटी डिपॉजिट), मासिक भाड़ा या अन्य किसी भी भुगतान के लिए रसीद मांगना किराएदार का अधिकार है।
  • सुविधापूर्ण आवास: मकान में प्रवेश करने से पहले उसे रहने योग्य और अच्छी सुविधाओं के साथ प्राप्त करना किराएदार का अधिकार है।
  • अनुरक्षण की सुविधा: मकान मालिक को वार्षिक रखरखाव कराना होगा। यदि किराएदार स्वयं मरम्मत कराता है, तो वह इसकी प्रतिपूर्ति (रिइम्बर्समेंट) प्राप्त कर सकता है, जो एक माह के किराए से अधिक नहीं होगी।

Rent Increase Rules: मकान मालिक के प्रमुख अधिकार

  • सुरक्षा निधि: मकान मालिक अधिकतम तीन माह के किराए के बराबर ही सिक्योरिटी डिपॉजिट मांग सकता है।
  • समय पर भुगतान: करारनामे की शर्तों के अनुसार, देय तिथि पर किराया प्राप्त करना उनका कानूनी अधिकार है।
  • निरीक्षण का हक: मकान मालिक दिन के समय किसी वयस्क पुरुष सदस्य की उपस्थिति में मकान का निरीक्षण कर सकता है।
  • मूल्यवृद्धि: बिजली, पानी या अन्य सेवाओं में किसी भी प्रकार की मूल्यवृद्धि होने पर, मकान मालिक किराएदार से उस बढ़ी हुई राशि की वसूली कर सकता है।

उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में पहले से ही लागू

छत्तीसगढ़ का यह कदम राज्यों के बीच एक उदाहरण पेश कर रहा है। उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में पहले से ही ऐसे कानून लागू हैं, जबकि मध्य प्रदेश और बिहार जैसे राज्य भी इस मॉडल को अपनाने की तैयारी में हैं। यह स्पष्ट है कि इस विधेयक का उद्देश्य केवल दंडित करना नहीं, बल्कि प्रदेश में एक स्वस्थ 'रेंटल इकोसिस्टम' बनाना है।

स्पष्ट नियमों के अभाव में अक्सर दोनों पक्षों के बीच विवाद की स्थिति उत्पन्न होती थी। अब, भाड़ा नियंत्रक या भाड़ा नियंत्रण अधिकरण के पास विवादों के निपटारे के लिए व्यापक अधिकार होंगे, जिससे अदालती मामलों के बोझ में भी कमी आने की संभावना है। यह कानून मकान मालिकों के लिए निवेश की सुरक्षा और किराएदारों के लिए गरिमापूर्ण आवास का अधिकार सुनिश्चित करता है।

बड़ी खबरें

View All

रायपुर

छत्तीसगढ़

ट्रेंडिंग