
महादेवबुक सट्टा पार्ट-2 (photo source- Patrika)
Mahadev Book Satta Part 2: राजधानी सहित प्रदेश भर में महादेवबुक सट्टा ऐप अभी जोरों से चल रहा है। 20-20 क्रिकेट वल्र्डकप शुरू होने के बाद से और तेजी से चल रहा है। राजेंद्र नगर इलाके से पकड़े गए प्रतीक वीधवानी और शैंकी देवड़ा दुबई से पैनल खरीदकर रायपुर और गोवा में ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा चलवा रहे थे। दोनों की निशानदेही पर पुलिस ने गोवा के एक होटल में छापा मारा। मौके से धनंजय वैष्णव, साकेत जगवानी, प्रमोद कुमार, प्रकाश चंद्र मिरी और शंकर कुमार को गिरफ्तार किया है।
आरोपियों के पास से नकद 24 हजार 600 रुपए, 5 लैपटॉप, 1 टैब, 58 मोबाइल फोन/आईफोन, विभिन्न बैंकों के 12 एटीएम कार्ड, 3 राउटर, 4 पासबुक तथा बलेनो कार सीजी 12 बीएम 9660 बरामद हुआ है। मामले का खुलासा करते हुए पुलिस ने बताया कि प्रतीक और शैंकी का दुबई आना-जाना था। दोनों ने महादेवबुक सट्टा के प्रमोटर सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल के एजेटों से 35 लाख रुपए में पैनल खरीदा। इसके बाद रायपुर और गोवा में चलाते थे। करीब 2 साल से गोवा में अलग-अलग कॉलोनी व फ्लैट में सट्टा चलवाते थे।
ऑनलाइन सट्टे के पैनल के अलावा आरोपी पेमेंट गेटवे पैनल भी चलाते थे। इसमें सट्टे की कमाई को विदेशी करेंसी में बदलने के अलावा क्रिप्टो करेंसी में भी लगाते थे। रायपुर सहित कई शहरों में पेमेंट गेटवे पैनल चलाते थे। इसके जरिए भारत के अलावा अन्य देशों में भी ऑनलाइन क्रिकेट ऑपरेट करते थे। आरोपियों ने 46 लाख 500 क्रिप्टो करेंसी/यूएसडीटी को क्रिप्टो वॉयलेट में पहुंचाया है। आरोपी प्रतीक कुमार पहले भी क्रिकेट सट्टा संचालन के आरोप में जेल जा चुका है।
आरोपियों ने सट्टे की काली कमाई खपाने के लिए 431 म्यूल बैंक खातों का इस्तेमाल किया है। इनमें करीब 10 करोड़ से अधिक के ट्रांजेक्शन मिले हैं, जिसकी जांच की जा रही है। इन खातों के जरिए सट्टे के पैसों को इधर से उधर किया जाता था।
ऑनलाइन क्रिकेट सट्टे का कारोबार कई राज्यों में फैला है। प्रीतक और शैंकी ऑनलाइन बैटिंग साइट का मास्टर आईडी-पैनल 40-60 फीसदी कमीशन पर बेचते थे। इन पैनलों का पैसा लेने के लिए पमेंट गेटवे जयदेव ग्रुप और जेएमके ग्रुप के नाम से वॉट्सऐप ग्रुपों का संचालन कर रहे थे।
ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा महादेवबुक ऐप के सेटअप पर ही चल रहा है। रायपुर के पुराने एजेंट और पैनल ऑपरेटर ही इसका संचालन कर रहे हैं। होटल, फ्लैट, किराए का मकान, फार्महाउस में पैनल का संचालन कर रहे हैं। स्थानीय युवाओं को 15-20 हजार रुपए महीना देकर उनसे ऑनलाइन कटिंग का काम ले रहे हैं। रायपुर के बड़े सटोरिए अब तक नहीं पकड़े नहीं गए हैं।
अमलीडीह साईं ट्विंस अपार्टमेंट में क्राइम ब्रांच की टीम ने 24 फरवरी दोपहर को छापा मारा। इस दौरान सोसाइटी में लगे सीसीटीवी कैमरों के डीवीआर को निकालकर अपने साथ ले गई। इससे सोसाइटी वाले खासे परेशान हैं। शनिवार शाम तक क्राइम ब्रांच कॉलोनी वालों को डीवीआर नहीं दी थी। इससे कॉलोनीवासियों को काफी दिक्कत हो रही है। कॉलोनी की सुरक्षा व्यवस्था ही बिगड़ गई है।
Published on:
01 Mar 2026 08:32 am
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