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जर्मनी से लाई गई 88 लाख रुपये की एक्स-रे मशीन, अब मरीजो को भी मिलेगी आधुनिक सुविधा

छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग के सबसे बड़े अम्बिकापुर मेडिकल कॉलेज के मरीजो को अब आधुनिक सुविधा मिलेगी. अस्पताल में जर्मनी से लाई गई 88 लाख रुपये की एक्स-रे मशीन लगाई गई है.

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अंबिकापुर. छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंह देव (TS Singh Deo) की पहल पर सरगुजा संभाग के सबसे बड़े मेडिकल कॉलेज अस्पताल में गंभीर मरीजों को आइसीयू के अत्याधुनिक डिजिटल एक्स-रे मशीन का लाभ मिलेगा. जिससे दुर्घटना के गंभीर आहतों का चिकित्सक आईसीयू में भर्ती करने के बाद तत्काल एक्स-रे जांच कर सकेंगे और पांच सेकंड के भीतर फिल्म और रिपोर्ट प्राप्त करेंगे. हड्डी टूटने या क्रेक होने की स्थिति में मरीजों को जांच के लिए एक्स-रे सेंटरों का चक्कर काटने से भी मुक्ति मिलेगी.

88 लाख रुपये की आई है लागत
सीजीएमएससी के माध्यम से 88 लाख रुपये की लागत से यह अत्याधुनिक डिजिटल एक्स-रे मशीन उपलब्ध कराया गया है. शुक्रवार को मुंबई से आए इंजीनियर शांतुनु सेठ और कन्हैया कुमार रायपुर के द्वारा मेडिकल कॉलेज अस्पताल के आईसीयू में यह मशीन इंस्टॉल किया गया. इंजीनियर कन्हैया कुमार ने बताया कि आज 16 सितंबर को मशीन पूरी तरह से स्थापित कर प्रबंधन को हैंडओवर कर दिया जाएगा.

एक घंटे में होगा 40 से 45 एक्स-रे
रायपुर से आए इंजीनियर कन्हैया कुमार ने बताया कि डायरेक्ट रेडियोग्राफी सिस्टम के साथ यह तीसरी पीढ़ी की अत्याधुनिक एक्स-रे मशीन है. सीजीएमएससी के माध्यम से अल्फा हेल्थ केयर जर्मनी से एक्स-रे मशीन की खरीदी की गई है. उन्होंने बताया कि सामान्य एक्स-रे मशीन से 1 घंटे में अधिकतम 15 से 16 एक्स-रे जांच किया जा सकता है, जबकि हाई फ्रीक्वेंसी एक्स-रे मशीन से एक घंटे में इससे तीन गुना अधिक 40 से 45 एक्स-रे जांच हो सकता है. यह मशीन 40 किलोवाट और 50 मिली एंपियर की है. जो इसकी गुणवत्ता को और अधिक बढ़ाता है.

मिलेगा तत्काल इलाज
मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ रमणेश मूर्ति और अधीक्षक डॉ लखन सिंह ने बताया कि प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव के द्वारा चिकित्सालय में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए लगातार प्रयास किया जा रहा है. उनकी पहल पर डिजिटल एक्स-रे मशीन की खरीदी सीजीएमएससी के द्वारा 88 लाख रुपये की लागत से जर्मनी से की गई है. उन्होंने बताया कि मशीन की स्थापना आईसीयू की जा रही है. इसकी उपलब्धता सरगुजा जैसे आदिवासी बाहुल्य और पिछड़े इलाके के लिए बड़ी उपलब्धि है. इससे गंभीर मरीजों को जांच के लिए भटकना नहीं पड़ेगा और वार्ड में ही एक्स-रे होने पर रिपोर्ट के आधार पर तत्काल इलाज मिल सकेगा.

क्या कहा जर्मनी के इंजीनियर ने
अल्फा हेल्थ केयर जर्मनी के इंजीनियर शांतुनु सेठ ने बताया कि आधुनिक एक्स-रे मशीन बैटरी से भी चलती है. बिजली गुल होने के बाद भी यह मशीन बंद नहीं होगी और आटोकट के साथ बैटरी से मशीन चलने लगेगी. बिजली बाधा की स्थिति में भी कम से कम 100 एक्स-रे जांच किया जा सकता है.