
एनआरआई बिना मेरिट के एमबीबीएस में प्रवेश नहीं (photo source- Patrika)
पीलूराम साहू/NEET Admission Fraud: सरकारी व निजी मेडिकल कॉलेजों में स्टेट, मैनेजमेंट कोटा हो या एनआरआई, नीट यूजी में अच्छे स्कोर व मेरिट सूची में आए बिना एडमिशन संभव नहीं है। इसमें दलालों की कोई भूमिका नहीं होती। नीट का रिजल्ट आने के बाद कुछ प्राइवेट एजेंसियां बड़े-बड़े विज्ञापनों के माध्यम से छात्रों व पैरेंट्स को दोनों ही कोटे की सीटों में एडमिशन का झांसा दे रहे हैं। यही नहीं कई दलाल सक्रिय भी हो गए हैं। वे छात्रों व पालकों को सीधे एडमिशन का झांसा दे रहे हैं।
चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि छात्र या पालक दलालों या एजेंसियों के झांसे में न आएं। अगर झांसे में आए तो उनकी गाढ़ी कमाई डूबनी तय है। प्रदेश में एमबीबीएस की 2925 सीटें हैं। इस साल एकमुश्त 595 सीटें बढ़ी हैं। सीटें बढ़ने के बावजूद कट ऑफ कम नहीं होगा। दरअसल इस साल नीट का रिजल्ट हाई स्कोरिंग रहा है। एमबीबीएस कोर्स में प्रवेश के लिए नीट यूजी में न केवल क्वालिफाइड होना अनिवार्य है, बल्कि मेरिट में आना भी जरूरी है। अच्छे स्कोर रहने पर ही सरकारी व निजी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश संभव है। रिजल्ट आने के बाद कई दलाल पैसे लेकर प्रवेश का दावा कर रहा है।
पत्रिका को मिली शिकायत में कुछ पालकों ने बताया कि उन्हें निजी काॅलेजों के मैनेजमेंट व एनआरआई कोटे में पैसे लेकर प्रवेश की गारंटी दी जा रही है। पत्रिका ने उन्हें बताया कि प्रवेश में दलालों की कोई भूमिका नहीं होती। उन्हें यह भी बताया कि अगर कोई ये दावा करता है कि बिना क्वालिफाइड व मेरिट में आए बिना एडमिशन दिला सकता है तो वह कोरी बकवास के अलावा कुछ नहीं है।
मेडिकल एक्सपर्ट का कहना है कि ये एजेंसी एक तरह से छात्रों व पालकों को ठगते हैं और झांसे में लेकर उनका पैसा हड़प कर जाते हैं। पत्रिका ने विशेषज्ञों व चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों से बात की तो पता चला कि इन दिनों कई भ्रामक विज्ञापन आ रहे हैं। पालकों व छात्रों को इस तरह के विज्ञापन पर विश्वास नहीं करना चाहिए।
प्रदेश में इस साल एमबीबीएस की एकमुश्त 595 सीटें बढ़ी हैं। इसके बावजूद कट ऑफ गिरने के बजाय बढ़ जाएगा। दरअसल इस बार नीट का रिजल्ट हाई स्कोरिंग रहा है। प्रदेश के दो टॉपरों को संयुक्त रूप से 690-690 अंक मिले हैं। जबकि पिछले साल ऑल् इंडिया टॉपर को 684 अंक मिला था। तब नीट यूजी का परचा काफी कठिन था और कट ऑफ काफी गिर गया था। पिछले साल 474 अंक वाले को सरकारी मेडिकल कॉलेज मिल गया था। इस बार नहीं मिल पाएगा। अगस्त अंत तक काउंसिलिंग शुरू होने की संभावना है।
प्रदेश में इस सत्र के लिए 5 सरकारी व एक निजी मेडिकल कॉलेज को मान्यता मिली हैं। इनमें 350 सीटें मिली हैं। सरकारी मेडिकल कॉलेजों में कवर्धा, जांजगीर-चांपा, मनेंद्रगढ़, गीदम व कुनकुरी व निजी में मां पद्मावती कॉलेज में एमबीबीएस की पढ़ाई होगी। निजी कॉलेज को 100 सीटों की मान्यता मिली है। सरकारी कॉलेजों में 50-50 के हिसाब से 250 सीटें बढ़ी हैं। जबकि नेहरू मेडिकल कॉलेज में 20, जगदलपुर में 25, रिम्स में 100, अभिषेक व रावतपुरा कॉलेज में 50-50 सीटें बढ़ी हैं। यानी नए कॉलेजों को 350 सीटें मिली हैं और पुराने कॉलेजों में 245 सीटें बढ़ी हैं।
वर्जन
एमबीबीएस कोर्स में एडमिशन काउंसिलिंग के माध्यम से होता है। इसके लिए नीट यूजी में अच्छा स्कोर जरूरी है। कोई प्राइवेट एजेंसी एडमिशन नहीं दिलवा सकता। छात्र व पालक किसी भी दलाल या एजेंसी के झांसे में न आएं। ऐसा कर वे अपने पैसे गंवा देंगे। काउंसिलिंग में पूरी पारदर्शिता बरती जाती है— डॉ. यूएस पैकरा, डीएमई
टॉपिक एक्सपर्ट
जो भी निजी मेडिकल कॉलेज एनएमसी से मान्यता प्राप्त है, उसमें किसी में भी बिना नीट क्वालिफाइड एडमिशन नहीं दिया जाता। प्रवेश मेरिट सूची से हाेता है। इसमें कॉलेजों की कोई भूमिका नहीं रहती। काउंसिलिंग डीएमई करवाता है। ऐसे में किसी के झांसे में न आएं तो बेहतर है— डॉ. विष्णु दत्त, रिटायर्ड डीएमई
Updated on:
24 Jul 2026 07:21 am
Published on:
24 Jul 2026 07:21 am
