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चढ़ते-उतरते पारे का नहीं पड़ रहा असर , 45 डिग्री तापमान में भी जिंदा है कोरोना वायरस

स्थिति यह है कि मार्च-अप्रैल में जब तापमान 30 से 35 डिग्री के बीच था तो मरीज कम मिल रहे थे, अब मरीजों की संख्या कई गुना बढ़ गई है। प्रदेश में २६ मई तक संक्रमित मरीजों का आंकड़ा 361 था, जो 13 मई की स्थिति में महज 59 था।

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रायपुर. मध्य भारत के साथ-साथ, उत्तर-पश्चिम और दक्षिण भारत के कुछ राज्यों में सूरज आग बरसा रहा है। राजस्थान में अधिकतम तापमान 50 डिग्री जा पहुंचा है तो छत्तीसगढ़ में 45-46 डिग्री के बीच बना हुआ है। बावजूद इसके विश्व की सबसे बड़ी महामारी को जन्म देने वाला कोरोना वायरस, इतने अधिक तापमान में भी जिंदा है। स्थिति यह है कि मार्च-अप्रैल में जब तापमान 30 से 35 डिग्री के बीच था तो मरीज कम मिल रहे थे, अब मरीजों की संख्या कई गुना बढ़ गई है। प्रदेश में २६ मई तक संक्रमित मरीजों का आंकड़ा 361 था, जो 13 मई की स्थिति में महज 59 था।

कुछ वैज्ञानिकों ने, डॉक्टरों ने यह दावा किया था कि स्वाइन फ्लू की तरह से वायरस भी पारा चढऩे पर खत्म हो जाएगा। मगर, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने स्पष्ट किया था कि ऐसा कोई अध्ययन सामने नहीं आया है। इसलिए इस तरह के भ्रम से बचें। हो भी वही रहा है। राजधानी रायपुर में तापमान 43-45 डिग्री में भी बीते हफ्तेभर में मरीजों की संख्या तेज गति से बढ़ रही है। पांच दिनों में एक भी ऐसा दिन नहीं गया जब ३५ से कम मरीज मिले हों, मंगलवार को तो यह आंकड़ा 68 तक जा पहुंचा।

जून-जुलाई में क्या होगा?-

जून-जुलाई में नमी आएगी, बरसात होगी। तापमान तेजी से नीचे गिरेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मी के बाद बरसात और फिर ठंड का मौसम भी आएगा, तो वायरस अपनी प्रकृति बदलेगा या फिर यही ऐसा ही रहेगा, नहीं कहा जा सकता। गौरतलब है कि तापमान में वायरस में होने वाले बदलाव को लेकर अब तक भारत में कोई ठोस अध्ययन नहीं हुआ है। यह पूरी सदी में दुनिया के लिए वैश्विक महामारी का पहला ही अनुभव है।

सभी वायरसों से अलग है, कोरोना-

स्वाइन फ्लू का वायरस ठंड के दिनों में सक्रिय होता है और रायपुर में एक प्रकरण को छोड़कर यह ३०-३५ डिग्री के बीच ही जिंदा रहा था। अब तक इतने तापमान के बीच ही मरीज मिले हैं। इस साल मार्च में दो मरीज मिले, जब तापमान ३२ डिग्री के करीब था। जानकारों का मानना है कि स्वाइन फ्लू के बाद सार्स और मॉर्स वायरस भी कम तापमान में ज्यादा सक्रिय पाए गए। कोरोना, सार्स और मार्स की प्रजाति का वायरस माना जाता है। मगर, यह इन सबसे कई गुना ज्यादा खतरनाक और तेजी से फैलने वाला वायरस है।जिसकी चपेट में आज पूरी दुनिया आ ही चुकी है।

तापमान का इस वायरस पर कोई असर नहीं पड़ता दिख रहा। इसलिए इस भ्रम से बचना चाहिए कि ये अधिक तापमान में खत्म हो जाएगा। सावधानी बरतने की आवश्यकता है।

-डॉ. आरके पंडा, विभागाध्यक्ष टीबी एंड चेस्ट, डॉ. भीमराव आंबेडकर अस्पताल एवं सदस्य कोरोना कोर कमेटी