
CG Conversion: बीमार युवती को उपचार से ठीक करने का झांसा और धर्मातरण का प्रयास करने वाली दोषी महिला को आजीवन कैद से दंडित किया गया है। प्रकरण की सुनवाई के दौरान 21 गवाहों के बयान करवाए गए। प्रकरण की गंभीरता और पुलिस की केस डायरी के आधार पर विशेष न्यायाधीश पंकज कुमार सिन्हा ने इसका फैसला सुनाया। विशेष लोक अभियोजक उमाशंकर वर्मा ने बताया कि पंडरी रायपुर निवासी महिला की 18 वर्षीय पुत्री की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी। अस्पताल से लेकर बैगा-गुनिया और झाड़-फूंक कराने के बाद भी अक्सर बीमार रहती थी।
इसी दौरान उसे पता चला कि राजिम के ग्राम सुरसाबांधा में रहने वाली ईश्वरी साहू (41) उपचार करती है। उससे संपर्क करने पर उपचार करने के बहाने प्रार्थना कराती थी। इस दौरान धर्मातरण करने के लिए दबाव देती थी। उसके उपचार के कारण पीडि़ता की तबीयत और खराब होने लगी।
लेकिन, वह भरोसा दिलाती रही कि सब कुछ ठीक हो जाएगा। लेकिन, 22 मई 2025 को बीमार युवती की मौत हो गई। घटना के बाद युवती की मां ने 23 मई 2025 को राजिम थाने में इसकी शिकायत की। जहां एफआईआर दर्ज कर ईश्वरी साहू को गिरफ्तार किया गया।
पुलिस की केस डायरी और गवाहों ने अपने बयान में बताया कि आरोपी महिला उपचार का झांसा देकर धर्मातरण कराती थी। साथ ही ग्रामीण इलाकों में उसे अक्सर घूमते हुए देखा जाता था। किसी भी तरह की तरह की बीमारी को वह ठीक करने का दावा भी करती थी। पुलिस ने 7 अगस्त 2025 को पेश कि गए चालान में इसका उल्लेख किया था।
अदालत ने माना कि आरोपी बिना किसी चिकित्सकीय योग्यता के झाड़-फूंक और हिंसक तरीके से इलाज कर रही थी, जिससे युवती की मौत हुई. गवाहों और चिकित्सकीय साक्ष्यों के आधार पर अपराध साबित हुआ। अदालत ने आरोपी को विभिन्न धाराओं में दोषी ठहराते हुए धर्म स्वतंत्रता अधिनियम के तहत 1 वर्ष, टोनही प्रताड़ना में 1 वर्ष और एससी/एसटी एक्ट व धारा 105 के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई. यह फैसला अंधविश्वास, फर्जी इलाज और जबरन धर्मांतरण के खिलाफ कड़ा संदेश माना जा रहा है।
Updated on:
02 May 2026 09:58 am
Published on:
02 May 2026 09:56 am
