
ये है रायपुर की थैले वाली आंटी, पॉल्यूशन फ्री शहर बनाने कपड़े का थैला बनाकर बांट रही लोगों को
रायपुर . पिछले महीने जारी विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया के 15 प्रदूषित शहरों में 14 भारत से हैं। वहीं 2016 की रिपोर्ट में रायपुर का सातवां और वर्ष 2012 में तीसरे पायदान पर था। इस साल अप्रैल तक शहर की वायु गुणवत्ता का औसत 34.65 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर रहा है। इस लिहाज से पॉलुशन राजधानी में कम तो हुआ है, इसके लिए शहर की कुछ एेसी संस्थाएं भी शामिल हैं जो हरियाली को बढ़ावा दे रही हैं।
45वें विश्व पर्यावरण दिवस को यानि 2018 को भारत होस्ट कर रहा है। इस बार की थीम ‘बीट प्लास्टिक पॉल्यूशन’ रखी गई है। अगर बात प्लास्टिक प्रदूषण की हो तो इसे दूर करने के लिए सबसे पहले नाम आता है सिटी की शुभांगी आप्टे। वे प्लास्टिक के ऑप्शन के रूप में कपड़ों के थैलों के प्रति जागरूक कर रही हैं।
आप्टे बताती हैं कि करीब 4 साल पहले की बात है। अखबारों में आए दिन न्यूज छपा करती थी कि पॉलिथीन खाने से मवेशी मारे जा रहे हैं। पॉलिथीन जलाने पर गलता नहीं, बल्कि जमीन की उर्वरा शक्ति को भी खराब करता है। इसके बारे में सोचने पर आइडिया आया कि अगर कपड़ों के थैलियां बनाई जाए तो प्लास्टिक से निजात मिल सकती है। फिर आइडिये को इम्पलीमेंट किया। लोग उन्हें थैले वाली आंटी भी कहते हैं।
आप्टे ने बताया कि सबसे पहले टेलरों से मिली और कतरन मांगे। शुरू में मदद नहीं मिली, लेकिन आप्टे ने हार नहीं मानी और हर दो-तीन दिन बाद उनके पास जाकर अपना मकसद बताती। इस तरह कतरन मिलने शुरू हो गए। शहर में वे इन्हीं थैलों को बांटती और प्लास्टिक के नुकसान बताती थीं। यह सिलसिला आज भी जारी है।
आप्टे ने बताया कि सबसे पहले टेलरों से मिली और कतरन मांगे। शुरू में मदद नहीं मिली, लेकिन आप्टे ने हार नहीं मानी और हर दो-तीन दिन बाद उनके पास जाकर अपना मकसद बताती। इस तरह कतरन मिलने शुरू हो गए। शहर में वे इन्हीं थैलों को बांटती और प्लास्टिक के नुकसान बताती थीं। यह सिलसिला आज भी जारी है।
एक सिलसिले में जब आप्टे को चाइना जाने का मौका मिला तो उनकी मुलाकात वहां के काउंसलेट जनरल से हुई। वे एंटी पॉलिथीन अभियान से प्रभावित हुए। सम्मानित करते हुए बैग्स को काकी की थैली नाम दिया।
छग सरकार ने करीब साढ़े तीन साल पहले ही प्लास्टिक पर बैन लगा दिया है। स्मार्ट सिटी रायपुर और नगर निगम की ओर से प्लास्टिक उन्मूलन के लिए लगातार प्रोग्राम चल रहे हैं। इसके लिए स्वसहायता समूहों की मदद भी ली जा रही है।
Published on:
05 Jun 2018 06:45 pm
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