
दुर्ग में बांग्लादेशी महिला पकड़ाई ( AI Photo )
Bangladeshi woman Arrested in Bhilai: दुर्ग पुलिस ने अवैध घुसपैठियों के खिलाफ अभियान तेज करते हुए एक बांग्लादेशी युवती को हिरासत में लिया है। पुलिस के अनुसार युवती पिछले 21 वर्षों से छत्तीसगढ़ में रह रही थी। वह हाल ही में बांग्लादेश से लौटकर रायपुर पहुंची थी और सप्ताहभर पहले भिलाई नगर के सेक्टर-5 स्थित अपने परिचित के यहां आई थी। इसकी सूचना मिलते ही एटीएस टीम ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की और आगे की कार्रवाई के लिए रायपुर भेज दिया।
पुलिस के मुताबिक रीना अख्तर 14 वर्ष की उम्र में बांग्लादेश से मुंबई पहुंची थी। वहां से वह ट्रेन के जरिए भिलाई आई और सेक्टर-5 में करीब 16 वर्ष तक रही। वर्ष 2021 में उसने रायपुर के टिकरापारा थाना क्षेत्र स्थित भाठागांव में मकान बनवाया और वहीं रहने लगी।
पूछताछ के दौरान रीना ने बताया कि बांग्लादेश में उसकी पहचान बिपुल राय नामक एक ऑटो चालक से हुई थी। उसी की मदद से वह मुंबई पहुंची। कुछ समय वहां रहने के बाद बिना टिकट ट्रेन से भिलाई आई और सेक्टर-5 में रहकर जीवन-यापन करती रही।
पुलिस ने बताया कि रीना ने भारत में रहने के दौरान अपने पहचान संबंधी दस्तावेज भी बनवा लिए थे। हालांकि एजेंसियों के पास पहले से उपलब्ध सूचना के आधार पर उसकी जांच की गई, जिसमें उसके पास से बांग्लादेश से संबंधित पहचान पत्र बरामद हुए। पुलिस ने दस्तावेज जब्त कर उसे आगे की कार्रवाई के लिए रायपुर भेज दिया।
पुलिस के अनुसार केंद्रीय एजेंसियों से मिली सूचना के आधार पर जिले में अवैध घुसपैठियों की पहचान का अभियान चलाया जा रहा है। संदिग्ध लोगों का सत्यापन कर उनकी पूरी जानकारी जुटाई जा रही है और अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की तलाश जारी है।
भारत सरकार और गृह मंत्रालय (एमएचए) के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, अवैध रूप से पकड़े गए बांग्लादेशी नागरिकों के लिए ‘पहचानो, हटाओ और देश से निकालो’ (detect, delete and deport) की सख्त नीति अपनाई जा रही है। इसके तहत 30 दिन के भीतर राष्ट्रीयता का सत्यापन, हर जिले में अस्थायी होल्डिंग सेंटर का निर्माण और पकड़े गए लोगों को सीधे सीमा सुरक्षा बल (BSF) को सौंपा जाना शामिल है।
अब तक एक महिला समेत सात बांग्लादेशी घुसपैठिए गिरफ्तार किए जा चुके हैं। ये सुपेला, मोहन नगर और छावनी थाना क्षेत्रों में अवैध रूप से रह रहे थे।
दलालों और असामाजिक तत्वों की मदद से वोटर आईडी, आधार कार्ड और निवास प्रमाण-पत्र जैसे दस्तावेज बनवाने का मामला सामने आया।
सुपेला के कंट्रेक्टर कॉलोनी में रहने वाली एक महिला को निगरानीशुदा बदमाश ने किराये का मकान दिलाया था। जांच में अनैतिक गतिविधियों का भी खुलासा हुआ था।
छावनी और मोहन नगर थाना क्षेत्रों से भी दो-दो घुसपैठियों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है।
30 दिन की समयसीमा: संदिग्ध प्रवासियों की राष्ट्रीयता की पहचान और सत्यापन की प्रक्रिया 30 दिनों के भीतर पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।
अस्थायी होल्डिंग सेंटर: पकड़े गए लोगों को तुरंत जेल भेजने के बजाय हर जिले में बनाए गए विशेष अस्थायी हिरासत केंद्रों (होल्डिंग सेंटर्स) में रखा जाता है।
सीधे क्चस्स्न को सुपुर्दगी: अदालती लंबी प्रक्रियाओं के बजाय राज्यों की पुलिस और एजेंसियां पकड़े गए अवैध घुसपैठियों को सीधे सीमा सुरक्षा बल (क्चस्स्न) के हवाले कर रही हैं।
बायोमीट्रिक कैप्चर: सीमा या देश के भीतर पकड़े गए व्यक्तियों के फिंगरप्रिंट और चेहरे की तस्वीरें ‘फॉरेनर्स आइडेंटिफिकेशन पोर्टल’ पर दर्ज की जाती हैं।
सीएए का प्रावधान: नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के तहत 31 दिसंबर 2024 से पहले आए पात्र समुदायों को छोडक़र शेष सभी अवैध प्रवासियों पर यह कार्रवाई लागू होती है।
जानकारी नोडल अधिकारी सत्य प्रकाश तिवारी के अनुसार
एएसपी, मणिशंकर चंद्रा ने कहा कि घुसपैठियों की धरपकड़ के लिए एक विशेष टीम गठित की गई है। नोडल अधिकारी अपनी टीम के साथ विभिन्न थाना क्षेत्रों में चिन्हित लोगों के खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं। एक बांग्लादेशी युवती को हिरासत में लेकर आगे की कार्रवाई के लिए रायपुर भेजा गया है।
Updated on:
30 Jul 2026, 11:31 AM IST
Published on:
30 Jul 2026, 11:30 AM IST
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