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खुशखबरी : अगर आपने भी लिया हैं इन बैंकों से कोई लोन, तो उसे चुकाने में मिलेगी ये विशेष छूट

बैंक डिफॉल्टरों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। बैंकों ने इन्हें अपनी सूची में ब्लैक लिस्ट कर दिया है।

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खुशखबरी : अगर आपने भी लिया हैं इन बैंकों से कोई लोन, तो उसे चुकाने में मिलेगी ये विशेष छूट

रायपुर. छत्तीसगढ़ में बैंक डिफॉल्टरों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। रायपुर सर्कल में बीते तीन वर्षों के भीतर अलग-अलग बैंकों के डिफॉल्टरों की संख्या पर गौर करें तो इनकी संख्या 5000 से अधिक है। बैंकों ने इन्हें अपनी सूची में ब्लैक लिस्ट कर दिया है। इसमें अलग-अलग वर्ग के लोग शामिल हैं। इधर पंजाब नेशनल बैंक ने डिफॉल्टरों से लोन वसूली का नया फार्मूला अपनाया है, जिसमें 25 करोड़ रुपए तक के लोन को सेटलसमेंट किया जा रहा है। बैंक ने इस फार्मूले का नाम दिया गया है- डिफॉल्टरों के साथ समझौता।

एनपीए (डिफॉल्टर्स) उधारकर्ताओं को एक विशेष मुश्त समझौता प्रस्ताव के तहत लाभ दिया जा रहा है। एनपीए खातों का एक बार में निपटारा योजना-2018 के तहत बैंक ने दावा किया है कि बीते तीन महीनों के भीतर रायपुर सर्कल ने 80 करोड़ रुपए की वसूली कर ली है। जबकि डिफॉल्टरों की संख्या पर गौर करें तो इसकी संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।

बैंक प्रबंधन का कहना है कि डिफॉल्टरों से लोन वसूली के लिए उन्हें एक बार में एनपीए खातों का निपटारा करने का प्रस्ताव दिया गया है, जिसमें बैंक की पॉलिसी के मुताबिक लोनधारक से एक निश्चित राशि लेकर उनसे मामले का निपटारा किया जा रहा है। बैंक प्रबंधन से जब सवाल पूछा गया कि इस योजना का क्या रिस्पांस पर इस पर प्रबंधन ने कहा कि हमारी कोशिशें जारी है। कई डिपॉल्टर इस योजना से प्रभावित होकर बैंक पहुंचे हैं। जारी वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में बैंक ने 80 करोड़ रुपए की वसूली कर ली है।

10 करोड़ की प्रॉपर्टी हर महीने नीलाम

राजधानी के राष्ट्रीयकृत और निजी बैंकों के हालातों पर गौर करें तो हर महीने बड़ी संख्या में डिफॉल्टरों की संख्या बढ़ रही है। सबसे ज्यादा संख्या राष्ट्रीयकृत बैंकों की है। इस मामले को लेकर जहां बैंक प्रबंधन ने सख्ती बरती है, वहीं अधिकारियों को भी ऋण वसूली नहीं होने पर विभागीय कार्यवाही की चेतावनी दे दी है। हर महीने लगभग 10 करोड़ की प्रापर्टी सीज के लिए ई-नीलामी का नोटिस जारी किया जा रहा है।

ये लोन ज्यादातर उद्योग, व्यापार, शिक्षा और कृषि के क्षेत्रों में दिए गए है।

एसबीआई, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, यूनियन बैंक, देना बैंक, आइसीआइसीआइ, एचडीएफसी और इलाहाबाद बैंक।

पत्रिका ने अपनी पड़ताल में पाया कि राष्ट्रीयकृत बैंक के डिफॉल्टरों में बड़ी कंपनी, डीलर्स, फर्म, शो-रूम, रियल एस्टेट सेक्टर आदि शामिल हैं। जबकि ऐसे आम नागरिकों की संख्या काफी कम है, जिनका लोन 10 से 20 लाख के भीतर है। लेकिन डिफॉल्टरों की बढ़ती तादाद से अब आम नागरिकों को परेशानी हो रही है, उन्हें हाउसिंग लोन, पर्सनल लोन, एजुकेशन लोन आदि के लिए बैंकों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।

बैंक सूत्रों का कहना है कि केंद्र और राज्य सरकार की कई ऐसी योजनाएं हैं, जिसमें उद्यमी क्षेत्रों के लिए बिना गारंटर लोन बांटने की योजना शामिल हैं। ऐसी योजनाओं में बैंकों पर ऋण वितरण का दबाव रहता है। लिहाजा बैंकों ने ऐसे आवेदकों को ऋण तो दे दिया, लेकिन अब वसूली नहीं हो पा रही है। कई आवेदनों में पता भी ढूंढना मुश्किल हो रहा है। अधिकारियों से जवाब मांगा डिफॉल्टरों के मामले में बैंक प्रबंधन ने अधिकारियों से जवाब मांगा है, जिसमें बड़े लोन डिफॉल्टरों की अलग सूची तैयार की गई है।

पंजाब नेशनल बैंक के मंडल प्रमुख राजीव खेड़ा ने बताया कि एनपीए खातों का एक बार में निपटारा योजना-2018 के अंर्तगत डिफॉल्टरों को समझौते का मौका दिया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत कई एनपीए कंपनी और लोनधारकों ने संपर्क साधा है। पहली तिमाही में हमने कुल 80 करोड़ रुपए की ऋण वसूली की है।

रायपुर एसबीआई के पूर्व डीजीएम ब्रम्ह सिंह ने बताया कि डिफॉल्टरों से लोन वसूली के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। कई मामलों सख्त कानूनी कार्यवाही भी की जा रही है।