
दूसरे फेज की तरफ बढ़ रहा कोरोना,धनतेरस से पहले प्रतिबंधित कछुओं का सजा बाजार, व्हाट्सएप में ग्राहकों से आर्डर ले रहे कारोबारी
रायपुर. प्रदेश में प्रतिबंधित हुए वन्य प्राणियों-जलीय जीव और उनके अवशेषों की बिक्री चरम पर है। राजधानी रायपुर अवैध रूप से वन्य प्राणियों-जलीय जीव और उनके अवशेषों की खरीद-फरोख्त करने वाले कारोबारियों का हब बनता जा रहा है। आरोपी सोशल मीडिया का सहारा लेकर अपने व्यापार को चमका रहे है और नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। धनतेरस और दीपावली के मद्देनजर प्रदेश में प्रतिबंधित हो चुके कछुओं की बड़ी खेप रायपुर पहुंचने की जानकारी पत्रिका को मिली है।
मुखबिरों की मानें तो यह खेप दो से तीन दिन के अंदर रायपुर पहुंचेगी। ट्रेन के रास्ते आरोपी प्रतिबंधित हो चुके कछुओं को रायपुर पहुचाएंगे। कछुओं की खपत हो सके, इसलिए अवैध रूप से कारोबार में संलिप्त इन आरोपियों ने सोशल मीडिया में अभी से प्रचार करना शुरू कर दिया है। कारोबार से जुड़े लोगों की मानें तो कुछ ग्राहकों ने धनतेरस से पूर्व कछुओं की डिलीवरी देने का आर्डर भी दिया है।
चेन्नई से पहुचेगी गाड़ी
पत्रिका को मिली जानकारी के अनुसार प्रतिबंधित कछुओं की तस्करी वर्तमान में चेन्नई से हो रही है। चेन्नई से आने वाली गाडि़यों में तस्कर सेटिंग करके अपनी खेप प्रदेश के अवैध कारोबारियों तक पहुंचा रहे है। कछुओं की तस्करी करने वाले गिरोह में रायपुर के आरोपियों के अलावा, दुर्ग और राजनांदगांव तक के लोग सक्रिय है। चेन बनाकर विगत कई वर्षों से कछुओं की तस्करी का कारोबार यह गिरोह कर रहा है।
900 से 1200 रुपए तक के कछुए
प्रतिबंधित कछुआ की कीमत आरोपियों ने 900 से 1200 के बीच तय की है। धनतेरस में कछुओं का बड़ा कारोबार होता है, इसलिए अभी से ही गिरोह के लिए काम करने वाले युवकों ने अपने ग्राहकों को फोटो भेजकर कछुओं की डिलीवरी देने का आश्वसन दिया है। आर्डर यदि 11 नवंबर तक दे दिया जाएगा, तो धनतेरस से पूर्व कछुओं की डिलीवरी हो जाएगा, ऐसा दावा अवैध कारोबारियों द्वारा दिया जा रहा है।
पूर्व में हो चुकी कार्रवाई
कछुओं की अवैध रूप से खरीद बिक्री के मामलें में पूर्व में रायपुर के पंडरी इलाके में वन विभाग के अधिकारी कार्रवाई कर चुके है। अफसरों ने आरोपी कारोबारी की निशानदेही पर राजनांदगांव इलाके में दबिश दी थी। पूर्व में गिरफ्तारी के बावजूद वन अफसर वर्तमान में सक्रिय नहीं दिख रहे है। राजधानी में पशु-पक्षी, मछली और कछुआ बेचने की कितनी दुकानें है, इसकी जानकारी भी वन अफसरों को नहीं है।
प्रतिबंधित वन्यप्राणी और जलीय जंतुओं की खरीद-फरोख्त गैर कानूनी है। वन अधिनियम के तहत आरोपियों पर कार्रवाई की जाएगी। कौन लोग प्रतिबंधित कछुआ की खरीद-फरोख्त कर रहे है, आप हमे जानकारी दे दीजिए। हम जांच कराकर कार्रवाई करेंगे।
-बीएस ठाकुर, डीएफओ, रायपुर।
Published on:
10 Nov 2020 09:09 am
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