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“हम बस्तर से आए हैं”… सुनते ही दिल्ली पुलिस ने रोक दिया! जंतर-मंतर जा रहे लोगों का बड़ा आरोप

Bastar People Stopped in Delhi Protest: जंतर-मंतर में प्रदर्शन के लिए दिल्ली पहुंचे बस्तर के लोगों ने आरोप लगाया है कि दिल्ली पुलिस ने उन्हें रास्ते में रोक दिया। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि बस्तर से होने की जानकारी मिलने के बाद उन्हें आगे नहीं जाने दिया गया।
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Jantar Mantar Protest

Jantar Mantar Protest: "हम बस्तर से हैं"(photo-patrika)

Jantar Mantar Protest: दिल्ली के जंतर-मंतर में प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र के लोगों को कथित तौर पर दिल्ली पुलिस ने आगे बढ़ने से रोक दिया। प्रदर्शन में शामिल लोगों का आरोप है कि उन्हें रास्ते में रोककर उनकी पहचान पूछी गई और बस्तर से होने की जानकारी मिलने के बाद उनके साथ आपत्तिजनक व्यवहार किया गया।

प्रदर्शनकारियों का दावा है कि पुलिसकर्मियों ने उनसे पूछा, "कहां से आए हो?" जब उन्होंने खुद को बस्तर का निवासी बताया, तो कथित तौर पर उन्हें यह कहते हुए आगे जाने से रोक दिया गया कि "तुम लोग नक्सली हो, तुम्हें अंदर नहीं जाने देंगे।"

Delhi Police: प्रदर्शनकारियों ने लगाए गंभीर आरोप

जंतर-मंतर पहुंचने की कोशिश कर रहे लोगों का कहना है कि वे अपने मुद्दों को लोकतांत्रिक तरीके से रखने के लिए राजधानी पहुंचे थे। उनका आरोप है कि उन्हें अपनी बात रखने का मौका देने के बजाय पहचान के आधार पर रोका गया। प्रदर्शन में शामिल कुछ लोगों ने कहा कि बस्तर के हर व्यक्ति को संदेह की नजर से देखना उनके आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाता है। उनका कहना है कि वे भारत के नागरिक हैं और उन्हें भी अपनी बात रखने का उतना ही अधिकार है, जितना देश के किसी अन्य नागरिक को है।

नक्सलवाद खत्म होने के दावों पर भी उठे सवाल

यह घटना ऐसे समय में सामने आई है, जब केंद्र और राज्य सरकार लगातार यह दावा करती रही हैं कि बस्तर में नक्सलवाद का प्रभाव तेजी से कम हो रहा है। सरकार की ओर से कई बार यह कहा गया है कि मार्च 2027 तक नक्सलवाद के खात्मे की दिशा में निर्णायक सफलता हासिल कर ली जाएगी। ऐसे में प्रदर्शनकारियों का सवाल है कि यदि बस्तर बदल रहा है और वहां शांति स्थापित हो रही है, तो फिर बस्तर के लोगों को अब भी संदेह की नजर से क्यों देखा जा रहा है?

प्रशासन की ओर से आधिकारिक बयान का इंतजार

फिलहाल, दिल्ली पुलिस की ओर से इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। यदि प्रदर्शनकारियों के आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला केवल एक प्रदर्शन को रोकने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह देश के लोकतांत्रिक अधिकारों और क्षेत्रीय पहचान से जुड़े बड़े सवाल भी खड़े करेगा।

जंतर-मंतर की ओर बढ़ते बस्तर के लोगों को रोके जाने की इस घटना ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि क्या देश के किसी हिस्से से आने वाले नागरिकों को अब भी पूर्वाग्रहों का सामना करना पड़ रहा है, या फिर यह केवल सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा था। इस सवाल का जवाब अब प्रशासनिक जांच और आधिकारिक प्रतिक्रिया के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।