
मोदी-शाह ने BJP जॉइन करने ऑफर दिया (photo source- Patrika)
BJP Join Offer claim: छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने दावा किया है कि उन्हें इनडायरेक्टली BJP में शामिल होने का ऑफर दिया गया था। उन्होंने यह दावा सीनियर वकील और राज्यसभा MP कपिल सिब्बल के होस्ट किए गए पॉडकास्ट में किया। बघेल के मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें कुछ बार मिलने के लिए बुलाया था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उन्हें बातचीत के लिए बुलाया था। शुरू में, उन्हें इन मीटिंग्स के मकसद के बारे में पक्का नहीं पता था, लेकिन बाद में उन्हें एहसास हुआ कि मीटिंग्स के कुछ ही दिनों में, जांच एजेंसियां उन पर रेड डालेंगी।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि मीटिंग के दौरान उनसे पूछा जाता था कि उनके खिलाफ कौन से केस पेंडिंग हैं, वे किन अधिकारियों पर भरोसा करते हैं और वे कैसे मदद कर सकते हैं। उन्होंने जवाब दिया कि वे विपक्ष में हैं और सरकार की आलोचना करना उनकी ज़िम्मेदारी है। इसके बावजूद, उन्हें मदद का ऑफ़र अजीब लगा।
बघेल का कहना है कि वे अपनी बात रखकर लौट आते थे, लेकिन लगभग आठ से दस दिन के भीतर फिर से उनके यहां छापा पड़ जाता था। उन्होंने एक बार प्रधानमंत्री को फोन कर कहा कि जब मदद की बात हुई थी तो फिर छापा क्यों पड़ा। इस पर प्रधानमंत्री ने कथित तौर पर अधिकारियों से बात करने की बात कही।
भूपेश बघेल ने कहा कि शुरू में सीधे तौर पर भाजपा में शामिल होने की बात नहीं कही गई, लेकिन बाद में उन्हें संकेत समझ में आए। उनका दावा है कि वे कोई प्रतिबद्धता देकर नहीं लौटते थे, इसलिए लगातार छापेमारी होती रही।
18 जुलाई 2025 को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कथित शराब घोटाला और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में चैतन्य बघेल को गिरफ्तार किया था। बाद में उन्हें जमानत मिल गई।
ED का आरोप है कि शराब घोटाले से जुड़ी राशि में से 16.70 करोड़ रुपये चैतन्य को मिले और इस धन का उपयोग रियल एस्टेट परियोजनाओं में किया गया।
हाईकोर्ट ने 2 जनवरी को उन्हें जमानत दी थी। इस मामले में सह-आरोपी लक्ष्मी नारायण बंसल की गिरफ्तारी न होने पर भी अदालत ने नाराजगी जताई थी।
छत्तीसगढ़ के कथित शराब घोटाले की जांच ED कर रही है। ACB में दर्ज FIR के मुताबिक, यह घोटाला 3200 करोड़ रुपये से अधिक का बताया गया है।
मामले में राजनेता, आबकारी विभाग के अधिकारी और कारोबारी शामिल बताए गए हैं।
ED की जांच में आरोप है कि तत्कालीन सरकार के कार्यकाल में एक कथित सिंडिकेट के जरिए इस घोटाले को अंजाम दिया गया, जिसमें कुछ वरिष्ठ अधिकारी और कारोबारी शामिल थे।
Updated on:
11 Feb 2026 01:30 pm
Published on:
11 Feb 2026 01:30 pm
