
विधानसभा का मानसून सत्र: पहले दिन हुआ लांड्री के विवादित ठेके के मामले को लेकर हंगामा
रायपुर . विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन डीकेएस सुपर स्पेश्यलिटी (दाऊ कल्याण सिंह) सहित प्रदेश के 6 मेडिकल कॉलेजों की लांड्री के विवादित ठेके का मुद्दा उठा। सोमवार को सत्र के दौरान धरसींवा विधायक देवजी भाई पटेल ने इस मुद्दे को उठाते हुए टेंडर की शर्तों पर सवाल उठाया।
सत्र के दौरान मौजूद धोबी समाज के प्रतिनिधियों ने बताया कि विधायक की ओर से निविदा में 45 लाख रुपए की इएमडी के साथ 10 करोड़ के सालाना टर्नओवर पर आपत्ति जताते हुए इन शर्तों से समाज जो को उनके पैतृक कार्य से वंचित रह जाने की बात कही। जवाब देते हुए स्वास्थ्य मंत्री अजय चंद्राकर ने कहा, कि आवश्यक निविदाकारों के अभाव में निविदा निरस्त कर दी गई है। वहीं टेंडर दोबारा जारी करने के दौरान शर्तों पर विचार करने का आश्वासन जताया उनकी ओर से जताया गया। सत्र के दौरान दिन भर धोबी समाज के पदाधिकारी मौजूद रहे और सत्र के बाद उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री से भी सौजन्य भेंट की।
इस निविदा से कई परिवारों को वंचित होता देख पत्रिका ने इस मुद्दे को उठाते हुए लगातार खबरों का प्रकाशन जारी रखा। इस दौरान टेंडर के बारे में मेडिकल कॉलेजों के जिम्मेदार डीएमइ डॉ. अजय चंद्राकर ने कोई जानकारी होने से इंकार करते हुए सारा दारोमदार डीकेएस के अस्पताल अधीक्षक डॉ. पुनीत गुप्ता पर डाल दिया था। जिसमें उन्होंने पुरानी व्यवस्था में खामियों के हवाले से केंद्रीकृत व्यवस्था बनाने की मंशा जाहिर की थी। वहीं सीजीएमएससी की ओर से प्रबंधक वी रामाराव ने सिर्फ तकनीकी सहायता देने की बात कही थी।
सीजीएमएससी की ओर से 14 मई को डीकेएस अस्पताल सहित प्रदेश के 6 मेडिकल कॉलेजों के लिए लांड्री का टेंडर निकाला था। जिसमें निविदा अवधि एक वर्ष के बजाए 5 वर्ष की गई थी, साथ ही निविदाकार से 10 करोड़ का टर्नआेवर, 45 लाख रुपये इएमडी मांगा गया था। जिसके बाद धोबी समाज के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और धरसींवा विधायक से अपनी व्यथा सुनाई थी। वहीं निविदाकारों के अभाव में 25 जून को यह निविदा निरस्त कर दी गई थी।
विधानसभा में सोमवार को प्रदेश के 195 जनऔषधि केंद्र में जेनेरिक दवाओं की कमी का मामला विधायक देवजी पटेल ने उठाया। एक ध्यानाकर्षण के जरिए भाजपा विधायक ने कहा कि राज्य सरकार ने 54 लाख गरीबों को सस्ती दवा उपलब्ध कराने की योजना बनाई थी, मगर अफसरों की लापरवाही के चलते योजना बंद होने के कगार पर है। पटेल ने कहा कि जेनेरिक दवाईओं की आपूर्ति सूची से लगभग तीन सौ दवाओं को ही गायब कर दिया गया है। जन औषधि केंद्रों में क्रोसिन, मल्टी विटामिन केप्सूल, बी काम्पलेक्स सहित अन्य कई जरूरी दवाइयां उपलब्ध ही नहीं है। जवाब में स्वास्थ्य मंत्री अजय चंद्राकर ने बताया कि अब भी प्रदेश के 187 औषधि केंद्रों में आवश्यक दवाइयां मिल रही है। उन्होंने बताया कि जन औषधि केंद्रों में आपूर्तिकर्ता की नियुक्ति एवं दवाईयों की आपूर्ति ब्यूरो ऑफ फार्मा पब्लिक सेक्टर अंडरटेक्सि ऑफ इंडिया गुडग़ांव हरियाणा के द्वारा की जा रही है।
Published on:
03 Jul 2018 11:16 am
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