
cg election 2023 : छत्तीसगढ़ की राजिम एक ऐसी हाई प्रोफाइल विधानसभा सीट मानी जाती है जिसने एक नहीं तीन-तीन बार अविभाजित मध्यप्रदेश को मुख्यमंत्री दिया है। ये सीट श्यामाचरण शुक्ल की परंपरागत सीट रही है। यहां उनके पुत्र अमितेश शुक्ल चुनाव लड़ते रहे हैं। इस बार भी कांग्रेस ने उन्हें मौका दिया है।
निर्वाचन आयोग के मुताबिक यहां कुल मतदाता 228132 हैं जिनमें से पुरुष 112066 और महिला वोटर्स की संख्या 116048 है। जबकि अन्य 18 हैं। इस लिहाज से यहां का विधायक महिला मतदाता की करती हैं। कांग्रेस के इस गढ़ में पहली बार 1977 में जनता दल से पवन दीवान चुने गए थे। यह पहला मौका था जब यहां से किसी गैर कांग्रेसी दल की सरकार बनी थी। 1985 में यहां भाजपा ने खाता खोला था। पुनीत राम साहू जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। 2003 और 2013 को भाजपा ने जीत का परचम लहराया था।
1977 में जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद कांग्रेस दो हिस्सों में बंट गई। इंदिरा और ब्रहनंद रेड्डी। श्यामाचरण ने रेड्ड़ी का साथ दिया। इस तरह श्यामचरण लगभग 12 साल तक कांग्रेस से बाहर रहे। इसलिए 1980 में हुए चुनाव में कांग्रेस से जीवनलाल साहू प्रत्याशी बनाए गए और वे जीते भी। इसके बाद 1985 में भाजपा ने अपना खाता खोला था।
तब पुनीतराम साहू भाजपा से जीते थे। 1990 में फिर नतीजा बदला और पंडित शुक्ल लगातार 1998 तक विधायक रहे। 1999 में वे लोकसभा चले गए और राजिम विधानसभा सीट खाली हो गई थी। तब उनके पुत्र अमितेश को उपचुनाव में मौका मिला और वे जीते। 2003 में चंदूलाल साहू ने अमितेश को हरा दिया। 2008 में अमितेश ने जीत से वापसी की, लेकिन 2013 में वे भाजपा के संतोष उपाध्याय से हार गए। 2018 में अमितेश ने पुन: वापसी की। इस तरह देखा जाए तो सिर्फ 1980 के चुनाव में यह सीट शुक्ल से परे रही।
तीसरे क्रम पर थे रोहित
भाजपा ने पहली सूची में ही राजिम विधानसभा से अपना प्रत्याशी रोहित साहू को घोषित कर दिया है। जबकि कांग्रेस ने सीटिंग एमएलए अमितेश शुक्ल को फिर से मौका दिया। पिछले साल ही रोहित भाजपा में शामिल हुए हैं। उन्होंने 2018 के चुनाव में जकांछ प्रत्याशी के तौर पर 23776 वोट प्राप्त किया था और तीसरे क्रम पर रहे। जीत अमितेश शुक्ल को मिली थी।
Published on:
28 Oct 2023 01:29 pm
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