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CG News: शासन के आदेशों की धज्जियां! तहसील में बाहरी व्यक्ति चला रहा शासकीय कामकाज?

CG News: गोबरा नवापारा तहसील कार्यालय में एक निजी व्यक्ति द्वारा कथित रूप से शासकीय कामकाज संचालित करने और वसूली के आरोप लगे हैं।

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रायपुर

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Laxmi Vishwakarma

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विनोद जैन

Feb 20, 2026

शासन के आदेशों की धज्जियां (photo source- Patrika)

शासन के आदेशों की धज्जियां (photo source- Patrika)

CG News: गोबरा नवापारा। @विनोद जैन/गोबरा नवापारा तहसील कार्यालय में भ्रष्टाचार के संगठित खेल की चर्चाएं तेज हो गई हैं। आरोप है कि तहसीलदार और रीडर के संरक्षण में “विक्की” नामक एक निजी व्यक्ति खुलेआम शासकीय कामकाज संचालित कर रहा है। बताया जा रहा है कि उक्त व्यक्ति ई-कोर्ट आईडी तक चला रहा है और किसानों व पक्षकारों से प्रकरण निपटाने के नाम पर खुलेआम वसूली की जा रही है। पैसा दो तो काम होगा, अन्यथा केस कोर्ट में डालने की धमकी—यही कथित तौर पर तहसील कार्यालय का नया “नियम” बन गया है।

CG News: प्रशासनिक भ्रष्टाचार का मामला गंभीर

सूत्रों के अनुसार, अविवादित नामांतरण जैसे सरल मामलों को भी जानबूझकर ऑनलाइन निराकरण के बजाय कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया जाता है, ताकि आवेदक परेशान होकर “सेटिंग” के लिए मजबूर हों। यह न केवल प्रशासनिक भ्रष्टाचार का गंभीर मामला है, बल्कि शासन और उच्च न्यायालय के स्पष्ट आदेशों की भी खुली अवहेलना है, जिनमें निजी व्यक्तियों से शासकीय कार्य कराना पूर्णतः प्रतिबंधित है।

चौंकाने वाली जानकारी यह भी सामने आई है कि उक्त व्यक्ति पहले अभनपुर तहसील में सक्रिय था और अब गोबरा नवापारा में डेरा जमाए हुए है। वहीं उसका भाई उप तहसील खोरपा में कथित रूप से निजी कर्मचारी बनकर शासकीय कार्यों में दखल दे रहा है। दो अलग-अलग तहसीलों में दो भाइयों की सक्रियता ने पूरे राजस्व तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या यह महज संयोग है या संरक्षण में चल रहा कोई संगठित नेटवर्क?

CG News: दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग

मामले में अभनपुर एसडीएम रवि सिंह ने गंभीरता दिखाते हुए तहसीलदार से जवाब तलब करने की बात कही है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है। स्थानीय नागरिकों ने निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है, ताकि राजस्व कार्यालयों में पारदर्शिता और आम जनता का विश्वास कायम रह सके। अब सवाल सीधा है— क्या प्रशासन इस ‘सेटिंग सिस्टम’ पर लगाम लगाएगा, या फिर तहसील में चलता रहेगा निजी राज?