
CG Politics: गरियाबंद जिले में 5 साल पहले खेल के नाम पर भ्रष्टाचार हो गया। अब डेढ़ साल से अधिकारी मिलकर खेला कर रहे हैं। जांच के नाम पर बंगाल का खाटी जादू दिखाया जा रहा है। मसलन भ्रष्टाचार के आरोप में निलंबित गुरुजी तीन महीने से भी कम समय में अधिकारी बनकर बहाल हो गए। अब कलेक्टर की बनाई भ्रष्टाचार की वो कुंडली ही गायब हो गई, जिसके आधार पर आगे की जांच जारी होने की बात कही जा रही है।
दरअसल, सैकड़ों स्कूलों में खिलौनों के नाम पर स्मार्ट टीवी खरीदकर भ्रष्टाचार करने के मामले में गरियाबंद कलेक्टर ने डेढ़ साल पहले 5 सदस्यीय टीम बनाई थी। इन्होंने 327 लोगों के बयान पर तत्कालीन डीएमसी को जिम्मेदार माना। कलेक्टर ने उन्हें सस्पेंड कर आगे की कार्रवाई के लिए फाइल लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) को भेजी।
डीपीआई ने पौने 3 माह में भ्रष्टाचार के आरोपी को बहाल करते हुए गलत तरीके से सहायक सांख्यिकी अधिकारी बना दिया। साथ में विभागीय जांच के भी आदेश दिए। एक साल तक जांच फाइलों में धूल फांकती रही। महीनेभर पहले पत्रिका ने मुद्दा उठाया, तो मामले के जांच अधिकारी जॉइंट डायरेक्टर (जेडी) राकेश पांडेय ने कहा, उन्हें अब तक कलेक्टर का जांच प्रतिवेदन नहीं मिला है। बाद में जांच प्रस्तुतकर्ता अधिकारी ने खुद को केस से अलग करने की सिफारिश की।
अब डीपीआई ने केस की जांच के लिए 2 नए अधिकारी नियुक्त किए हैं। इन्होंने भी अब तक गरियाबंद कलेक्टर का प्रतिवेदन नहीं मिलने की बात कही है। मामले में शुक्रवार को डीपीआई के अफसरों से बात की तो उनका कहना था कि प्रतिवेदन जेडी के पास है। इस तरह दोनों पक्षों की ओर से मिले जवाब से तो यही लगता है कि कलेक्टर की बनाई भ्रष्टाचार की कुंडली ही गायब कर दी गई है। उधर, मामले की जांच के लिए नियुक्त अधिकारियों का कहना है कि प्रतिवेदन मिले बिना वे आगे की कार्रवाई नहीं कर सकते।
यह मामला केवल खेलगढ़िया घोटाले तक सीमित नहीं है। केंद्र सरकार की ओर से जिले में खोले गए 10 इग्नाइट स्कूलों को मनमर्जी से बंद करने, फिर इन्हीं बंद स्कूलों में 10 शिक्षकों की भर्ती और यहां के अंग्रेजी शिक्षकों से हिंदी माध्यम में पढ़ाई करवाने जैसी कई बड़ी गड़बड़ियां भी इसी कार्यकाल में हुईं। बंद स्कूलों में जिन शिक्षकों की भर्ती हुई, उनकी चयन सूची भी विभाग के पास नहीं है।
CG Politics: विभाग के बड़े अफसरों ने जिस तरह मामले को दबाने पर पूरा जोर लगा दिया है, उससे साफ है कि घोटाला भी बड़ा है। सही तरीके से जांच हो गई, तो जद में कई और आएंगे। शिक्षा विभाग और लोक शिक्षण संचालनालय के अफसर जिस तरह डेढ़ साल से मामले को दबाने की कोशिश कर रहे हैं, उससे तंग आकर शिकायतकर्ता बलवंत शिंदे ने अब सीधे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से न्याय की गुहार लगाई है। उन्होंने बताया कि शिक्षा सचिव ने पहले भी डीपीआई से कहा था कि उन्हें 10 दिन में कार्रवाई के बारे में जानकारी उपलब्ध कराएं।
इसके बाद भी डीपीआई में उन्हें 3 माह से चक्कर कटवाए जा रहे हैं। ऐसे में शुक्रवार को उन्होंने सीएम के निज सचिव और शिक्षा विभाग के सचिव से मिलकर उन्हें सीएम के नाम शिकायत सौंपी। इसमें जिले के शिक्षा विभाग में हुए सभी घपले-घोटालों की रिपोर्ट है। गड़बड़ी करने वालों के साथ इसे संरक्षण और घोटाला छिपाने वाले अफसरों पर भी सख्त कार्रवाई की मांग की गई है।
एएन बंजारा, सहायक संचालक, डीपीआई: खेलगढ़िया घोटाले में कलेक्टर का जांच प्रतिवेदन जेडी के पास ही होना चाहिए। विभागीय जांच से बड़ी कार्रवाई कुछ नहीं होती। हमने 2 नए अधिकारी नियुक्त कर जांच शुरू करवा दी है। कार्रवाई जल्द हो, ये हम सुनिश्चित करेंगे।
Updated on:
08 Mar 2025 11:44 am
Published on:
08 Mar 2025 11:44 am
बड़ी खबरें
View Allरायपुर
छत्तीसगढ़
ट्रेंडिंग
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
