
माधवराव सिंधिया की जगह अचानक मोतीलाल वोरा को बना दिया गया था MP का CM, जानिए क्यों
रायपुर. देश में व्यवस्था भले ही लोकतंत्र की हो, लेकिन संयुक्त मध्यप्रदेश की राजनीति की कहानी कुछ और ही कहती है। प्रदेश में कई बार दबाव की राजनीति ने तय फैसले बदलवा दिए। प्रदेश में ऐसा चार बार हुआ, जब हालात ने अचानक किसी और माथे पर राजयोग लिख दिया। एक बार माधवराव सिंधिया की जगह मोतीलाल वोरा का राजतिलक हुआ तो कभी शिवभानु सिंह सोलंकी की जगह अर्जुन सिंह मुख्यमंत्री बन गए।
तो सिंधिया की जगह मोतीलाल वोरा का हुआ राजतिलक
राजनीतिक विश्लेषक शिवअनुराग पटैरिया के मुताबिक बात दिसंबर 1988 की है। दिल्ली ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह को हटाकर माधवराव सिंधिया को कमान सौंपना तय कर दिया था। माखनलाल फोतेदार, बूटा सिंह और गुलाम नबी आजाद को केंद्रीय पर्यवेक्षक बनाकर भोपाल भेजा गया। सीएम हाउस में विधायक दल की बैठक हुई, जिसमें केंद्रीय पर्यवेक्षक मौजूद थे।
कांग्रेस के अर्जुन सिंह समर्थक विधायक हरवंश सिंह के बंगले पर इकट्ठे हुए थे। विधायक दल की बैठक से बाहर निकले केंद्रीय पर्यवेक्षकों से जब सवाल पूछा गया कि कौन बना मुख्यमंत्री तो उन्होंने कहा दुर्ग में मोती। खबर बाहर निकली तो पता चला कि हाईकमान को विधायकों के दबाव में अपना फैसला बदलना पड़ा। विधायकों में विद्रोह की स्थिति थी। इस तरह मोतीलाल वोरा जनवरी 1989 में मुख्यमंत्री बने।
शिवभानु के लिए कुर्सी, बैठ गए अर्जुन
पटैरिया के मुताबिक 1980 में अर्जुन सिंह, शिवभानु सिंह सोलंकी और कमलनाथ सीएम पद के उम्मीदवार थे। वोटिंग हुई तो सबसे ज्यादा वोट सोलंकी को मिले। उनके बाद अर्जुन सिंह और तीसरे नंबर कमलनाथ रहे। तब ये चर्चा थी कि अर्जुन ने पहले ही मेनका गांधी की मां अमिता आनंद को मैनेज कर लिया था। हाईकमान के फैसले के मुताबिक कमलनाथ ने अपना समर्थन उनको दे दिया, जिससे शिवभानु सिंह पिछड़ गए और अर्जुन सिंह मुख्यमंत्री बन गए। यहां पर हाईकमान के दबाव में विधायकों का फैसला बदल दिया गया।
Published on:
7 Sep 2018, 1:06 PM IST
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