28 जुलाई 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

सरकार को लगाया 1000 करोड़ का चूना.. NGO के नाम पर मची लूट, एक आरोपी गिरफ्तार, कुछ IAS अफसर भी शामिल!

CG Scam: छत्तीसगढ़ में घोटाले की लिस्ट लंबी होती जा रही है। सीजीपीएसपी, कोयला, शराब समेत अन्य घोटालों के बाद अब एनजीओ घोटाले ने खलबली मचा दी है। मामले में एक आरोपी सलाखों के पीछे पहुंचा है…
2 min read
Google source verification
cg scam news

1000 करोड़ के एनजीओ घोटाले का एक आरोपी हैल्थ साइंस विवि में डिप्टी रजिस्ट्रार ( Fiile Photo Patrika )

CG Scam: 1000 करोड़ के एनजीओ घोटाले का एक आरोपी सतीश पांडेय नवा रायपुर स्थित पं. दीनदयाल उपाध्याय हैल्थ साइंस एंड आयुष विवि में संविदा में डिप्टी रजिस्ट्रार के पद पर सेवाएं दे रहे हैं। ( CG News ) करीब 6 माह पहले उन्होंने विवि ज्वॉइन की है। दरअसल, विवि में 90 फीसदी से ज्यादा स्टाफ संविदा में है।

CG Scam: पत्रिका पड़ताल में खुलासा

पत्रिका की पड़ताल में पता चला है कि पांडेय रिटायर्ड है। वे फाइनेंस सर्विस वाले हैं। एनजीओ घोटाले के समय वे उपसचिव वित्त रहे हैं। वे राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी रहे हैं। घोटाले में बड़े-बड़े रिटायर्ड आईएएस व राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों का नाम आया है। हाईकोर्ट ने मामले की सीबीआई जांच के आदेश दिए हैं। इसके बाद विवि में भी खलबली मची हुई है।

कुछ नेहरू ​मेडिकल कॉलेज में दे रहे सेवाएं

कुलपति, रजिस्ट्रार व कुछ स्टाफ ही नियमित हैं। कुछ प्रतिनियुक्ति पर हैं तो कुछ नेहरू मेडिकल कॉलेज के साथ विवि में भी सेवाएं दे रहे हैं। ज्यादातर रिटायर्ड है, जो यहां जमे हुए हैं। एक अधिकारी की उम्र तो 70 साल से ऊपर है। नियमानुसार वे सेवाएं नहीं दे सकते। फिर उच्चाधिकारियों की पसंद होने के कारण वे सेवाएं दे रहे हैं।

CG NGO Scam: यह है मामला

रायपुर के कुशालपुर निवासी कुंदन सिंह ठाकुर ने छत्तीसगढ़ के कुछ वर्तमान और रिटायर्ड आईएएस अफसरों पर एनजीओ के नाम पर करोड़ों का घोटाला करने का आरोप लगाते हुए जनहित याचिका दायर की है। याचिका में बताया गया है कि खुद याचिकाकर्ता को एक शासकीय अस्पताल राज्य स्त्रोत नि:शक्त जन संस्थान में कार्यरत बताते हुए वेतन देने की जानकारी पहले मिली। इसके बाद उन्होंने आरटीआई के तहत जानकारी ली तो पता चला कि नया रायपुर स्थित इस कथित अस्पताल को एक एनजीओ चला रहा है। जिसमें करोड़ों की मशीनें खरीदी गईं हैं। इनके रखरखाव में भी करोड़ों का खर्च आना बताया गया।

राज्य को 1000 करोड़ का वित्तीय नुकसान

इस मामले में 2017 में एक याचिका दायर की गई। 2018 में जनहित याचिका के रूप में इसकी सुनवाई शुरू की गई। सुनवाई के दौरान पता चला कि राज्य स्रोत नि:शक्त जन संस्थान नाम की संस्था ही नहीं है। सिर्फ कागजों में संस्था का गठन किया गया था। राज्य को संस्था के माध्यम से 1000 करोड़ का वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा, जो कि 2004 से 2018 के बीच में 10 साल से ज्यादा समय तक किया गया।