
सरकार को लगाया करोड़ों का चूना ( Photo - Patrika )
CG Scam Expose: ईओडब्ल्यू ने छत्तीसगढ़ राज्य विपणन निगम लिमिटेड (सीएसएमसीएल) में हुए 115 करोड़ रुपए के ओवरटाइम घोटाले में 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इसमें चार्टड एकाउटेंट से लेकर शराब दुकानों में मैनपावर की सप्लाई करने वाली कंपनियों के संचालक शामिल हैं। सभी को 11 मई तक के लिए रिमांड पर लिया गया है। गिरफ्तार किए गए सभी आरोपियों ने शराब दुकानों में ओवर टाइम काम करने वालों को भुगतान करने के नाम पर बढ़ाकर फर्जी बिल बनाया था।
इसके जरिए रकम का आहरण किया। यह खेल 2019 से 2024 के बीच किया गया। साथ ही ओवर टाइम भुगतान के नाम पर मैन पावर एजेंसियों को 115 करोड़ रुपए भुगतान कर कमीशन लिया गया। बता दें कि ईडी ने 29 नवंबर 2023 को 3 व्यक्तियों से नगद 28.80 लाख रुपए जब्त किया था। इसके आधार पर ईओडब्ल्यू ने प्राथमिकी दर्ज कर मामले को जांच में लिया था। बता दें कि शराब दुकानों में काम करने के लिए निजी कंपनियों के जरिए कर्मचारियों को हायर किया गया था।
उक्त लोगों द्वारा ओवरटाइम काम करने पर मैन पावर एजेंसियों द्वारा अपने कर्मचारियों को रकम का भुगतान किया जाना था। लेकिन, संबंधित कंपनियों के डायरेक्टर्स द्वारा ओवर टाइम के लिए फर्जी बिलों के माध्यम से राशि का आहरण किया। यह रकम सीएसएमसीएल के अधिकारियों एवं प्राइवेट व्यक्तियों को कमीशन देने में किया गया। वहीं, रकम का बड़ा हिस्सा कंपनियां स्वयं अपने पास रखती थी। इसके लिए कर्मचारियों की उपस्थिति, उनकी संख्या, बिल की रकम को कई गुना बढ़ाया गया। वहीं, पूरा फर्जीवाड़ा मिली भगत से किया गया। ओवर टाइम भुगतान की आड़ में फर्जी एवं बढ़ा हुआ बिल पेशकर शासकीय राशि का अनियमित आहरण किया गया।
ईगल इंटर साल्युशन लिमिटेड एवं अलर्ट कमाण्डोंज प्रायवेट लिमिटेड के वित्त एवं कर सलाहकार नीरज कुमार चौधरी, अलर्ट कमांडोज के डायरेक्टर अजय लोहिया, सुमीत फैसीलिटिज कंपनी डायरेक्टर अजीत दरंदले और अमित प्रभाकर सालुंके, एटू-जेड इन्फ्रासर्विसेस लिमिटेड कंपनी डायरेक्टर एवं चेयरमेन अमित मित्तल के साथ ही प्राइमवन वर्कफोर्स प्राईवेट लिमिटेड के डायरेक्टर राजीव द्विवेदी और संजीव जैन शामिल हैं।
बता दें कि शराब दुकानों में काम करने के लिए निजी कंपनियों के जरिए कर्मचारियों को हायर किया गया था। उक्त लोगों द्वारा ओवरटाइम काम करने पर मैन पावर एजेंसियों द्वारा अपने कर्मचारियों को रकम का भुगतान किया जाना था। लेकिन, संबंधित कंपनियों के डायरेक्टर्स द्वारा ओवर टाइम के लिए फर्जी बिलों के माध्यम से राशि का आहरण किया। यह रकम सीएसएमसीएल के अधिकारियों एवं प्राइवेट व्यक्तियों को कमीशन देने में किया गया। वहीं, रकम का बड़ा हिस्सा कंपनियां स्वयं अपने पास रखती थी। इसके लिए कर्मचारियों की उपस्थिति, उनकी संख्या, बिल की रकम को कई गुना बढ़ाया गया। वहीं, पूरा फर्जीवाड़ा मिली भगत से किया गया। ओवर टाइम भुगतान की आड़ में फर्जी एवं बढ़ा हुआ बिल पेशकर शासकीय राशि का अनियमित आहरण किया गया।
Updated on:
05 May 2026 02:48 pm
Published on:
05 May 2026 01:14 pm
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