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कोयले की कालिख में कराह रहे इन गांवों के लोगों को किसी मसीहा का इंतजार

छत्तीसगढ़ में धरमजयगढ़ विधानसभा अंतर्गत काले हीरे के ऊपर बसे जामपाली और सिंहमोजा गांव के लोगों की दुर्दशा का आलम यह है कि पहले तो एसईसीएल ने इनसे पूरी जमीन ले ली।
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CG Election 2018

कोयले की कालिख में कराह रहे इन गांवों के लोगों को किसी मसीहा का इंतजार

रायपुर. छत्तीसगढ़ में धरमजयगढ़ विधानसभा अंतर्गत काले हीरे के ऊपर बसे जामपाली और सिंहमोजा गांव के लोगों की दुर्दशा का आलम यह है कि पहले तो एसईसीएल ने इनसे पूरी जमीन ले ली। पांच सालों तक विधायक ने उनकी एक नहीं सुनी और जब आचार संहिता के दौरान निवार्चन आयोग के अधिकारियों को वहां पहुंचना था तो मतदान को मात्र पांच दिन बचे होने के बाद भी वहां एक भी मतदाता जागरूकता दल नहीं पहुंचा है। इससे इन आदिवासी गांव के लोगों में शासन व प्रशासन दोनों के प्रति खासी नाराजगी है। रायगढ़ से डॉ. संदीप उपाध्याय की खास रिपोर्ट।

रायगढ़ से धरमजयगढ़ रोड पर लगभग 65 किलोमीटर आगे घरघोड़ा ब्लॉक के आगे स्थित एसईसीएल की ओपन कास्ट कोल माइंस है। इस माइंस के चलते एसईसीएल ने जामपाली, सिंहमोजा और डूमरपाली तीन गांव के लोगों को मुआवजा राशि देकर जमीन के अपने कब्जे में ले लिया है, लेकिन अभी तक मुआवजा प्रकरण में खामी के चलते गांव खाली नहीं हो पाए हैं। ग्रामीणों ने अपनी समस्या को लेकर कई बार शासन प्रशासन सहित धरमजयगढ़ विधायक से गुहार लगाई, लेकिन उनकी कोई सुनने वाला नहीं था।

हालत यह है कि विधायक ने जामपाली और ङ्क्षसहमोजा गांव के लोगों का हाल जानना तो दूर वहां पांच सालों में एक बार कदम तक नहीं रखा। लोगों का कहना है कि गरीब आदिवासी समुदाय के लोगों को ठगने का काम किया गया है। उनका कहना है डूमरपाली गांव संपन्न है तो उसे एसईसीएल ने खाली नहीं कराया, लेकिन उन्हें घर से बेघर करने के लिए इन दोनों गांव को जाने वाली रोड छीन ली गई। एसईसीएल ने यहां एक गहरा खाईंनुमा नाला खोद दिया, जिससे अब लोग यहां आना-जाना भी नहीं कर पा रहे हैं।

इन दोनों गांव में न ग्राम पंचायत से बनी रोड नाली है न शासन के किसी योजना की। हालत यह है कि लोग सुबह से ही एसईसीएल की कोल माइंस में जाकर कोयला ढुलाई का काम करते हैं और उसी से अपना पेट पालने को मजबूर हैं। यहां के ग्रामीण गुरुदास, लोभन मांझी और जामपालिके का कहना है कि उन्हें विधायक ही नहीं, अधिकारियों ने भी भुला दिया है। समाचार पत्रों में वह पढ़ते हैं कि मतदाता जागरूकता के लिए अधिकारी गांव-गांव पहुंच रहे हैं, लेकिन उनके गांव में आज तक कोई नहीं पहुंचा। यदि पहुंचते तो लोग अपनी वेदना उन्हें बता पाते।

जिला निर्वाचन अधिकारी का दावा फेल
जिला निर्वाचन अधिकारी व कलेक्टर शम्मी आबिदी का दावा है कि उनके निर्वाचन अधिकारियों की टीम हर गांव गली मोहल्लों तक पहुंच चुकी है और लोगों को स्वच्छ मतदान के लिए जागरूक कर चुकी है, लेकिन हकीकत यह है कि यह काम सिर्फ कागजों में ही हो रहा है। सारंगढ़ के गोमर्डा व धरमजयगढ़ के जामपाली व सिंहमोजा गांव इसका जीता जागता उदाहरण हैं।