
जितेंद्र दहिया@रायपुर. छत्तीसगढ़ के सरकारी विभागों में 20 हजार करोड़ रुपए का कोई हिसाब-किताब नहीं है। यह आंकड़ा बीते 10 साल का है। सूचना के अधिकार के तहत महालेखाकार (लेखा परीक्षा), छत्तीसगढ़ की रिपोर्ट में यह तथ्य सामने आया है।
आंकड़े बेहद ही चौंकाने वाले हैं। 2005-06 से 2015-16 तक की ऑडिट रिपोर्ट में मिली अनियमितता का हिसाब महालेखाकार से मांगा गया था। महालेखाकार ने शासन के विभागों को तीन सेक्टरों में विभाजित कर रिपोर्ट तैयार की है। जिसमें जनरल सेक्टर, सोशल सेक्टर, इकोनामिक सेक्टर शामिल है। तीनों सेक्टरों में कुल 20716 करोड़ 88 लाख रुपए का हिसाब प्रदेश के विभागों में नहीं मिला।
बीते 10 वर्षों में तीनों सेक्टर मिलाकर 20716.88 करोड़ रुपए की गफलत कैग ने उजागर की है। जनरल सेक्टर में सबसे ज्यादा 2503 करोड़ 39 लाख रुपए का हिसाब नहीं होने का जिक्र कैग ने किया है। अहम बात यह है सोशल सेक्टर में काम करने वाले विभागों में यह मामला सबसे अधिक है। इनमें कुल 12044 करोड़ 46 लाख रुपए का हिसाब नहीं मिला है। दूसरे स्थान पर 8622 करोड़ 79लाख रुपए का हिसाब आर्थिक क्षेत्र के विभागों में नहीं मिला।
कुल 2503.31 करोड़ 12044.46 8622.79
परिवहन विभाग, राजस्व विभाग, आबकारी विभाग, खनिज विभाग, वन विभाग, वाणिज्य कर विभाग, सेल टेक्स विभाग विद्युत विभाग, नगरीय प्रशासन विभाग।
महालेखाकार बीके मोहंती ने बताया कि आरटीआइ में मांगी गई जानकारी सेक्टर के आधार पर उपलब्ध करा दी गई है। बीते दस वर्षों में विभागों में सामने आई आर्थिक अनियमितता का ब्योरा दिया गया है।
Published on:
27 Apr 2018 10:19 am
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