
तोषण कुमार ने हाल ही में दो फिल्मों के लिए म्यूजिक दिया है।
ताबीर हुसैन @ रायपुर.कुछ ऐसे भी लोग हैं जिनके लिए टीचिंग ऐसा पैशन है कि अदर एक्टिविटीज के साथ उसे फॉलो कर रहे हैं। इन्हीं में से एक युवा है लोधी तोषण कुमार। आईटी के छात्रों को पढ़ा रहे हैं। सुबह से शाम कॉलेज में रहते हैं। इसके बाद जो टाइम मिलता है म्यूजिक में गुजारते हैं। अब तक वे 50 छत्तीसगढ़ी एलबम्स के लिए आवाज दे चुके हैं, इनमें से कुछ हिंदी के भी हैं। तोषण ने बताया, अपने कॉलेज के दिनों में गाया करता था लेकिन कभी सोचा नहीं था कि संगीत के क्षेत्र में भी नाम कमाऊंगा। टीचिंग के दौरान ही मेरे स्टूडेंट्स ने प्रोफेशनल्स तौर पर गाने के लिए प्रेरित किया।
म्यूजिक डायरेक्शन कहीं सीखा नहीं
टाइम मैनेजमेंट से कॉलेज और म्यूजिक दोनोंं के लिए बेहतर कर पा रहा हूं। मैंने घर पर ही स्टूडियो बना लिया है। संगीत और शिक्षा दोनों ही पैशन हैं क्योंकि दोनों में ही सरस्वती की कृपा होती है। मैंने म्यूजिक डायरेक्शन कहीं सीखा नहीं है। कीबोर्ड में उंगलियां जाते ही क्रिएशन शुरू हो जाता है।
इन फिल्मों में मिला मौका
बतौर म्यूजिक डायरेक्टर मैंने राधेश्याम और वैदेही के लिए काम किया है। दोनों फिल्मों की शूटिंग चल रही है। वैदेही के लिए चार में से दो गानोंं का काम हो गया है, जबकि राधेश्याम में आठ गाने हैं जिनमें से चार मैंने गाए भी हैं। मेरा मकसद अपनी भाषा को बढ़ावा देना है।
अंग्रेजी की टीचर, छत्तीसगढ़ी में गायन
शिवानी जंघेल सरकारी स्कूल की अंग्रेजी टीचर हैं। वे बताती हैं, स्कूल में पापा की रचना आज के दिन तिहार मा रे... की प्रस्तति दी थी। तबसे सिलसिला जारी है। कितने एल्बम किए यह तो याद नहीं। कुछ गाने मीलियंस व्यू तक गए।
शिक्षक से प्रेरणा लेकर लिखी कविताएं
सरकारी स्कूल के हायर सेकंडरी के छात्रों को अंग्रेजी पढ़ाने वाली टीचर अन्नपूर्णा पवार ने बताया, जब मैं कक्षा सातवीं में थी तब हमारे टीचर डीपी भट्ट ने कविता लिखने के लिए प्रेरित किया। तब से डायरी में रोज एक कविता लिखा करती थी। नौवीं में थी तब अविभाजित एमपी को मैंने कविता लेखन में रिप्रजेंट किया था। हालांकि स्टेज प्रेजेंटेशन में मेरा कॉन्फिडेंस नहीं था लेकिन धीरे-धीरे वह भी स्ट्रांग हो गया। आज मैं राज्य व बाहर भी कविता पाठ कर रही हूं।
Published on:
04 Sept 2022 10:00 pm
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