
कम लागत में मिर्च की खेती कर कमा रहे अच्छा मुनाफा, जानिए मॉडर्न एग्रीकल्चर पैटर्न से कैसे हो रही कमाई
Chillie Farming: रायपुर. वर्तमान समय में युवाओं का ध्यान मॉडर्न एग्रीकल्चर और स्टार्टअप्स में की ओर है। लोग नौकरी छोड़कर कृषि के क्षेत्र में अपना समय दे रहे है और उन्हें इसके परिणाम भी काफी अच्छे मिल रहे है। आधुनिक कृषि का चलन साल 2017 से शुरू हुआ है ऐसा कहा जाता है। सबसे पहले लोगों ने शिमला मिर्च, बींस, हरी मिर्च, करेला, स्ट्रॉबेरी, मशरूम, केला और पपीते जैसी फसलों की खेती में हाथ आजमाना शुरू किया था।
क्या है मॉडर्न एग्रीकल्चर
आधुनिक कृषि क्या है? कृषि ऐसी नवप्रवर्तन शैली और कृषि पद्धति है जिसमें स्वदेशी ज्ञान के साथ-साथ आधुनिक ज्ञान, आधुनिक उपकरण तथा प्रत्येक पहलु जैसे खेत की तैयारी, खेत का चुनाव, खरपतवार नियंत्रण, पौध सरंक्षण, फसलोत्तर प्रबंधन, फसल की कटाई आदि जैसी महत्वपूर्ण कृषि पद्धतियों के उपयोग को आधुनिक कृषि कहते हैं।
इसी तर्ज में छत्तीसगढ़ के शंकरगढ़ विकासखण्ड के टिकनी गोठान की निराला एवं गुलाब महिला स्व सहायता समूह के सदस्यों द्वारा गोठान के लगभग 1.50 एकड़ भूमि में मिर्च की खेती (Modern Agriculture) की गई है। खेती प्रारंभ करने के पूर्व उद्यानिकी विभाग द्वारा अच्छी पैदावार हेतु आवश्यक जानकारी प्रदान की गई तथा बाड़ी में मिर्च की जेके 46 पान की प्रजाति लगाने का सुझाव दिया गया। उद्यानिकी विभाग से सुझाव पाकर समूह की सदस्यों द्वारा स्वयं के समूह से ऋण लेकर मिर्च की खेती की गई, इसमें गुलाब महिला स्व-सहायता समूह द्वारा 12 हजार 840 रुपए एवं निराला स्व.सहायता समूह द्वारा 7530 रुपए की लागत लगाकर मिर्च की खेती की गई।
अच्छी देखभाल एवं उद्यान विभाग के अधिकारियों द्वारा दी गई सलाह पर अमल करते हुए खेती करने पर अच्छी फसल प्राप्त हुई। इसे बाजार में विक्रय करने पर गुलाब स्व-सहायता समूह को 92 हजार 980 रुपए तथा निराला स्व-सहायता समूह को 86 हजार 830 रुपए का मुनाफा प्राप्त हुआ। समूह की महिलाओं ने बताया कि अभी तक उनके द्वारा चार बार मिर्च की तोड़ाई की गई है तथा आने वाले समय में 04 से 05 बार मिर्च की तोड़ाई और की जा सकेगी। उन्होंने कहा कि मौसम अनुकूल एवं मण्डी में मिर्च की आवक कम होने पर और आमदनी प्राप्त होगी। समूह के सदस्यों ने बताया कि अम्बिकापुर के थोक विक्रेता नियमित रूप से बाड़ी में पहुंचकर उनसे मिर्च की खरीदी करते हैं जिससे उन्हें बाड़ी में ही मिर्च का उचित दाम मिल जा रहा है।
अन्य सब्जियों की भी करेंगे खेती
महिला समूह की सदस्यों ने बताया कि बदलते सूचना तकनीकी से हम अब जागरूक हो रही हैं और मण्डी के भाव की जानकारी प्राप्त हो जाती है जिससे बाड़ी से उत्पादित फसल उचित दाम में विक्रय कर पा रहीं हैं। उन्होंने बताया कि आगामी शीत ऋतु में हम उद्यान विभाग की सहायता से मटर, गोभी, आलू आदि सब्जियों की खेती करेंगे।
ऐसे में हो रही लाखों की कमाई
खेती में केमिकल फर्टिलाइजर की जगह ऑर्गेनिक खाद और बायो फर्टिलाइजर का उपयोग किया जाता है। पानी को स्टोर करने के लिए तालाब भी बनाना होता है। इसमें बारिश का पानी स्टोर किया जाता है। इसी पानी में मछलियों का भी पालन किया जा सकता है। शिमला मिर्च, बींस, हरी मिर्च, करेला, स्ट्रॉबेरी, मशरूम, केला और पपीते जैसी फसलों की खेती या ऐसे फसलों का लोग पैदावार कर रहे है जिनकी कीमत मार्केट में अधिक है या विदेश में जिसकी डिमांड अधिक है। जिससे ज्यादा से ज्यादा आमदनी हो सके।
Published on:
04 Aug 2022 05:31 pm
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