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राम तेरी महानदी मैली हो गई… लापरवाहियां धोते-धोते

CG News: वनवासकाल में श्रीराम ने जिस महानदी में महादेव की आराधना की थी, प्रशासनिक लापरवाहियां धोते-धोते आज वो मैली हो गई है। राजिम कुंभ आने वालों के लिए प्रशासन ने सीमित इलाके में साफ पानी का इंतजाम किया है।

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Rajim Mahanadi: वनवासकाल में श्रीराम ने जिस महानदी में महादेव की आराधना की थी, प्रशासनिक लापरवाहियां धोते-धोते आज वो मैली हो गई है। राजिम कुंभ आने वालों के लिए प्रशासन ने सीमित इलाके में साफ पानी का इंतजाम किया है। बाकी पूरी नदी बदहाल है। यहां श्रद्धालु जलकुंभी से अटे बदबूदार पानी में स्नान करने को मजबूर हैं। मेले में आए कई श्रद्धालु तो प्रशासन के इंतजामों को कोसते हुए पुण्य की डुबकी करते नजर आए।

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पत्रिका ने उन वजहों को तलाशने की कोशिश की, जो महानदी को प्रदूषित करने के लिए जिम्मेदार हैं। पता चला कि इसकी सबसे बड़ी वजह 3 किलोमीटर के दायरे में बनाए गए तीन एनीकट हैं। इन एनीकट को मेले के लिए पानी रोकने बनाया गया है। साल के ज्यादातर समय यहां पानी भरा रहता है। ठहरे हुए पानी में जलकुंभी उगना स्वभाविक है, जो धीरे-धीरे पूरी नदी में फैलने लगती है। अभी भी यही हुआ है।

मेला स्थल को छोड़ दें तो आसपास की पूरी नदी जलकुंभी से अटी है। ठहरे हुए इस पानी से बदबू भी आती है। 20 साल पहले तक बारिश में आने वाली पानी की तेज धार के साथ नदी की पूरी गंदगी बह जाती थी। इसके बाद हुआ ये कि प्रशासन ने मेले का रास्ता बनाने नदी में मुरुम बिछाना शुरू कर दिया। रेत की बोरियां बिछाई जाने लगीं। नदी के प्रदूषित होने की ये दूसरी बड़ी वजह है।

दरअसल, मेला खत्म होने के बाद प्रशासन नदी की ओर पलटकर भी नहीं देखता। नतीजतन मुरुम और बोरियां वहीं रह जाती हैं। इससे नदी की गहराई घटती जा रही है। पहले की तरह अब बारिश के दिनों में नदी की पूरी गंदगी नहीं बह पाती। तीसरी बड़ी वजह है सीवरेज। शहर का पूरा गंदा पानी महानदी के पवित्र जल को खराब कर रहा है।

महानदी प्रदेश में बहने वाली नदियों में सबसे ज्यादा प्रदूषित: रिपोर्ट

एनजीटी में 2022 की एक रिपोर्ट के हवाले से महानदी को प्रदेश की सबसे प्रदूषित नदी बताया गया है। इस रिपोर्ट के आने के बाद भी शासन ने महानदी की सेहत सुधारने के लिए कोई ठोस इंतजाम नहीं किए। गौर करने वाली बात ये है जिस महानदी पर मेला सजाने के लिए करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं, उसी महानदी की शासन को परवाह नहीं है। जलकुंभी से अटी महानदी देश-विदेश से आने वालों के सामने प्रदेश की कैसी छवि बना रही है, इस बार में सोचना चाहिए।

ऐसी ही लारवाही... पार्किंग के लिए एक एकड़ में मुरुम पाटा

महानदी के अस्तित्व को बचाए रखना है तो नदी क्षेत्र में मुरुम नहीं बिछाई जाएगी, ये फैसला सालो पहले लिया जा चुका है। इसकी जगह रेत की बोरियों का इस्तेमाल की जानी हैं। लेकिन, लापरवाही की हद देखिए। प्रशासन ने वीआईपी लोगों को नदी के बीच पार्किंग मुहैया कराने के लिए तकरीबन कैचमेंट एरिया के अंदर करीब एक एकड़ एरिया में मुरुम बिछवा दिया है। मेला खत्म होने के बाद इसे यूं ही छोड़ देंगे। ऐसी ही लापरवाहियां महानदी को खतरे में डाल रहीं हैं।

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वो तीन बड़ी वजहें... जिनसे नदी हो रही प्रदूषित
1. एनीकट का ठहरा हुआ पानी और इसमें उगी जलकुंभियां
2. मेले में रास्ते के लिए नदी में बिछाई मुरुम, रेत की बोरियां
3. सीवरेज के जरिए शहर का सारा गंदा पानी नदी में जा रहा