
छत्तीसगढ़ में फिर सुर्खियों में शराब कारोबार (photo source- Patrika)
CG Liquor Over Rating: छत्तीसगढ़ में शराब की ओवररेटिंग (निर्धारित मूल्य से अधिक दाम पर बिक्री) और अवैध कारोबार एक गंभीर समस्या बनती जा रही है। सरकार द्वारा सख्ती के दावे किए जाने के बावजूद जमीनी स्तर पर हालात पूरी तरह नियंत्रण में नहीं दिख रहे हैं। आरोप है कि कुछ भ्रष्ट अधिकारियों और शराब माफिया की मिलीभगत से ओवररेटिंग, एक्सपायरी और मिलावटी शराब की बिक्री लगातार जारी है।
बताया जाता है कि पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान शराब कारोबार में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आई थीं। नकली होलोग्राम और ओवररेटिंग के जरिए एक कथित सिंडिकेट संचालित होने के आरोप लगे थे, जिसकी जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा द्वारा की जा रही है। इस मामले में कई बड़े नाम—जिनमें पूर्व मुख्यमंत्री के पुत्र, तत्कालीन आबकारी मंत्री, आईएएस अधिकारी और कारोबारी शामिल हैं— गिरफ्तार भी हुए और लंबे समय तक जेल में रहे।
हालांकि, वर्तमान सरकार के कार्यकाल में भी स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं दिख रहा है। आरोप है कि कुछ अधिकारी कमीशनखोरी के चलते शराब दुकानों में ओवररेट पर बिक्री करवाते हैं, वहीं माफिया एक्सपायरी शराब को नए बोतलों में भरकर सप्लाई कर रहे हैं। इससे यह आशंका जताई जा रही है कि कहीं यह पूरा खेल सरकार की छवि खराब करने की साजिश तो नहीं।
बीते वर्ष रायपुर के लालपुर स्थित शराब दुकान में ओवररेटिंग के मामले में कुछ सेल्समेन की गिरफ्तारी हुई थी। हालांकि, संबंधित कर्मचारियों ने इसे साजिश बताते हुए अपने वरिष्ठ अधिकारियों पर दबाव और वसूली के आरोप लगाए थे। विधानसभा में इस मुद्दे पर हंगामे के बाद प्रशासन ने 57 कर्मचारियों को बर्खास्त कर ब्लैकलिस्ट किया और प्लेसमेंट एजेंसी की जांच के आदेश दिए थे। शिकायतों के लिए आबकारी विभाग ने टोल-फ्री नंबर 14405, हेल्पडेस्क 07712439600 और व्हाट्सएप नंबर 9424102102 जारी किए हैं, लेकिन इसके बावजूद अवैध बिक्री और ओवररेटिंग पर पूरी तरह रोक नहीं लग पाई है।
राजधानी रायपुर के एमजी रोड स्थित कादर चौक की शराब दुकान में ओवररेट बिक्री का मामला सामने आया है। स्थानीय ग्राहकों का आरोप है कि निर्धारित दर से अधिक कीमत पर शराब बेची जा रही है। उदाहरण के तौर पर 120 रुपये की बोतल 130 रुपये में और 200 रुपये की शराब 220 रुपये में बेची जा रही है। दुकान के मैनेजर सुरेश पाटले पर मनमाने तरीके से दर बढ़ाने के आरोप लगे हैं। ग्राहकों का कहना है कि शिकायत करने पर उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिलता, जिससे नाराजगी बढ़ रही है।
इसी तरह बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के हथबंद और हिरमी स्थित सरकारी शराब दुकानों में भी ओवररेटिंग की शिकायतें सामने आई हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि तय कीमत से अधिक वसूली की जा रही है और शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही। इस संबंध में गृह मंत्री, आबकारी मंत्री और जिला प्रशासन को लिखित शिकायत भी दी गई है।
कुछ शिकायतों में यह भी सामने आया है कि आबकारी विभाग के एक सहायक अधिकारी पर कर्मचारियों से अवैध वसूली करने और ओवररेटिंग के लिए दबाव बनाने के आरोप हैं। आरोप के मुताबिक, उनका ड्राइवर—जो एक शराब दुकान में सेल्समेन भी है—कर्मचारियों को धमकाकर पैसे की मांग करता है। पैसे नहीं देने पर नौकरी से निकालने की धमकी दी जाती है। इससे कर्मचारी दबाव में आकर ओवररेटिंग करने को मजबूर होते हैं।
लगातार सामने आ रही शिकायतों के कारण आम जनता और उपभोक्ताओं में नाराजगी बढ़ती जा रही है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो उपभोक्ताओं का शोषण जारी रहेगा। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि सभी शराब दुकानों में मूल्य सूची स्पष्ट रूप से प्रदर्शित की जाए, नियमित जांच हो और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। कुल मिलाकर, छत्तीसगढ़ में शराब बिक्री व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है और इस पर प्रभावी नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत महसूस की जा रही है।
Published on:
06 Apr 2026 12:46 pm
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