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Dengue: राजधानी में डेंगू का कहर, 400 से अधिक मरीज पाए गए, एक की मौत…

Dengue Disease: राजधानी में जो डेंगू फैला है, वह डी-1 वेरिएंट का है। यह खुलासा जीनोम सीक्वेंसिंग से हुआ है। ये वेरिएंट ज्यादा खतरनाक नहीं होता। इससे बीमारी तो फैलती है, लेकिन मरीजों की मौत नहीं होती। राजधानी में जनवरी से अब तक 500 से ज्यादा मरीज मिल चुके हैं। एक मरीज की मौत भी हुई है। हालांकि सरकारी आंकड़ों में डेंगू से किसी मरीज की मौत नहीं हुई है और मरीजों की संख्या भी महज 56 है।

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Dengue Disease: राजधानी में जो डेंगू फैला है, वह डी-1 वेरिएंट का है। यह खुलासा जीनोम सीक्वेंसिंग से हुआ है। ये वेरिएंट ज्यादा खतरनाक नहीं होता। इससे बीमारी तो फैलती है, लेकिन मरीजों की मौत नहीं होती। राजधानी में जनवरी से अब तक 500 से ज्यादा मरीज मिल चुके हैं। एक मरीज की मौत भी हुई है। हालांकि सरकारी आंकड़ों में डेंगू से किसी मरीज की मौत नहीं हुई है और मरीजों की संख्या भी महज 56 है।

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आंबेडकर अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार इस बार कंस्ट्रक्शन एरिया से डेंगू के मरीज ज्यादा आए। मरीजों की केस हिस्ट्री से इसकी जानकारी मिली है। राजधानी में जुलाई से सितंबर तक 400 से ज्यादा मरीज मिले हैं। ये आंकड़े आंबेडकर व निजी अस्पतालों के हैं। हालांकि स्वास्थ्य विभाग इन आंकड़ों को नहीं मानता। उनका कहना है कि निजी अस्पतालों से किट की जांच वाले मरीजों को भी डेंगू पीड़ित बता दिया। स्वास्थ्य विभाग एलाइजा टेस्ट वाले मरीजों को पॉजीटिव मानता है। आंबेडकर अस्पताल में जो भी जांच हुई है, वह एलाइजा है। इसमें आंबेडकर की ओपीडी व वार्ड में भर्ती मरीजों की संख्या ही 300 पार है।


अगस्त व सितम्बर से सबसे ज्यादा मरीज
सबसे ज्यादा मरीज अगस्त व सितंबर में मिले, जब रूक-रूककर बारिश हो रही थी। इसके बाद सितंबर से मरीज तो आ रहे हैं, लेकिन आंकड़े कम है। विशेषज्ञों के अनुसार उमस जैसे मौसम में डेंगू के मरीज एडीस पनपते हैं। अब ठंडी शुरू हो गई है इसलिए डेंगू फैलाने वाले मच्छरों की संख्या कम हो गई है। अभी मलेरिया फैलाने वाले मादा एनाफिलिज की संख्या बढ़ गई है। हालांकि इसके केस भी उतने ज्यादा नहीं आ रहे हैं।


यह है बड़ी वजह: निगम ने नहीं की घरों में लार्वा की जांच
नगर निगम ने बारिश के सीजन में जब डेंगू का प्रकोप था, तब किसी भी घर में जाकर मच्छर के लार्वा की जांच नहीं की। भोपाल नगर निगम जिनके भी घर में डेंगू फैलाने वाले मच्छर का लार्वा मिलता है, उनके खिलाफ 500 रुपए जुर्माना लगाता है। रायपुर में ऐसी व्यवस्था नहीं है। पिछले साल जागरूकता अभियान चलाया गया। कूलरों, पुराने टायरों, नारियल खटोली या किसी पुराने डब्बों में भरे साफ पानी को खाली करवाया गया। दरअसल एडीएस मच्छर गंदे नहीं बल्कि साफ पानी में पनपता है। इसलिए कूलर व दूसरे साफ पानी को खाली कराया जाता है। डाॅक्टरों के अनुसार जब तापमान 28 डिग्री से कम हो जाता है, तब एडीएस मच्छर को पनपने में मदद नहीं मिलती।


रायगढ़ में 1300 से ज्यादा मरीज, मौत एक भी नहीं होने का दावा
प्रदेश में रायगढ़ में सबसे ज्यादा 1301 मरीज मिल चुके हैं। ये आंकड़े 8 नवंबर तक के हैं। इसके बाद के आंकड़ों को शामिल करें तो वहां 1400 के आसपास मरीज मिलने की संभावना है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार 8 नवंबर तक प्रदेश में 1965 मरीज मिल चुके हैं। डेंगू से किसी की माैत नहीं हुई है। हालांकि ये चौंकाता है। निजी अस्पतालों में कुछ मरीजों की मौत हुई है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग इसे नहीं मानता। दुर्ग में 276, बस्तर में 56, बिलासपुर में 87 मरीज मिल चुके हैं।

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अब डेंगू के मरीज कम हो गए हैं। सबसे ज्यादा मरीज रायगढ़ में मिले हैं। प्रदेश में किसी भी मरीज की मौत डेंगू से नहीं हुई है। सालभर इसके मरीज मिलते रहते हैं। इसलिए घरों की छतों पर साफ पानी भरकर न रखें।
डॉ. सुभाष मिश्रा, डायरेक्टर महामारी नियंत्रण

डेंगू से बचने का बढ़िया तरीका मच्छरदानी लगाकर सोना है। फुल बांह वाली शर्ट भी पहनें। ऐसा करने से डेंगू के केस बिल्कुल नहीं आएंगे। अगर डेंगू हो गया हो तो बुखार की दवा खाने के बजाय विशेषज्ञ को दिखाएं।
डॉ. सुनील खेमका, डायरेक्टर नारायणा अस्पताल