13 मार्च 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

DMF Scam: डीएमएफ घोटाले में जेल भेजे गए मनोज की जमानत याचिका खारिज, विशेष न्यायाधीश ने सुनाया फैसला

DMF Scam: छत्तीसगढ़ में DMF घोटाला केस में जेल में बंद कारोबारी मनोज कुमार द्विवेदी की जमानत याचिका को EOW कोर्ट ने खारिज कर दी। इससे पहले कोर्ट में दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गई थी।

less than 1 minute read
Google source verification
DMF फंड से छत्तीसगढ़ में सबसे ज्यादा विकास कार्य, 1 लाख से अधिक प्रोजेक्ट स्वीकृत, कई प्रोजेक्ट अधूरे(photo-patrika)_

DMF फंड से छत्तीसगढ़ में सबसे ज्यादा विकास कार्य, 1 लाख से अधिक प्रोजेक्ट स्वीकृत, कई प्रोजेक्ट अधूरे(photo-patrika)_

DMF Scam: डीएमएफ घोटाले में जेल भेजे गए मनोज द्विवेदी के जमानत आवेदन को विशेष न्यायाधीश ने बुधवार को खारिज कर दिया। बचाव पक्ष ने अपने पक्षकार को निर्दोष बताते हुए जमानत दिए जाने पर जांच में सहयोग करने और ईओडब्ल्यू द्वारा झूठे प्रकरण में फंसाए जाने का आरोप लगाया।

DMF Scam: घोटाले में कमीशनखोरी कर रकम की बंदरबांट

अदालत में पेश आवेदन में स्वयं को निविदाकर्ता ठेकेदार बताते हुए पूरे मामले से किसी भी तरह का लेनादेना नहीं होने का तर्क दिया। जिला न्यायाधीश की अदालत से प्रकरण को सुनवाई के लिए विशेष न्यायालय में स्थानातंरित किया गया। अभियोजन पक्ष ने मनोज द्विवेदी के डीएमएफ घोटाले में शामिल होने का आरोप लगाया।

यह भी पढ़ें: CG News: निलंबित IAS रानू साहू सहित 9 अन्य आरोपियों की 21.47 करोड़ की संपत्ति अटैच, ED ने की कार्रवाई

जमानत आवेदन खारिज

न्यायाधीश को बताया कि रानू साहू के कोरबा में कलेक्टर के पद पर पदस्थ रहने के दौरान मनोज द्वारा कई निविदांए ली गई थी। साथ ही इस घोटाले में कमीशनखोरी कर रकम की बंदरबांट की गई। जमानत दिए जाने पर आरोपी के विदेश भागने, गवाहों-साक्ष्य और जांच को प्रभावित किए जाने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है। विशेष न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद जमानत आवेदन को खारिज कर दिया।

42 प्रतिशत तक दिया गया कमीशन

DMF Scam: इस मामले की EOW और ED दोनों जांच कर रही है। ED की जांच में पता चला कि, 2021-22 और 2022-23 में मनोज कुमार द्विवेदी ने निलंबित IAS रानू साहू और अन्य अधिकारियों से मिलीभगत की। अपने एनजीओ उदगम सेवा समिति के नाम पर कई डीएमएफ ठेके हासिल किए थे। अधिकारियों को टेंडर की राशि का 42% तक कमीशन दिया था।