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क्या रायपुर भी बनेगा अगला दिल्ली अग्निकांड? होटलों से लेकर स्कूलों, बाजारों में सुरक्षा भगवान भरोसे, पत्रिका का बड़ा खुलासा

Delhi Fire Incident: दिल्ली में हुए भीषण अग्निकांड में 21 लोगों की जलकर मौत हो गई। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इधर रायपुर में भी लापरवाही के चलते हादसा का खतरा मंडरा रहा है।

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रायपुर

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Chandu Nirmalkar

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Ajay Raghuvanshi

Jun 04, 2026

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रायपुर में दिल्ली अग्निकांड जैसा मंडरा रहा खतरा ( Photo - Patrika)

Delhi Fire incident: दिल्ली में मालवीय नगर के फ्लरिश स्टे होटल में आग लगने से 21 लोगों की मौत हो गई। इसमें कई विदेशी नागरिक थे। हादसे में कुल 35 लोग घायल हुए हैं। बताया जा रहा है कि बिल्डिंग की फायर एनओसी नहीं थी। राजधानी रायपुर में भी कई भवन बिना फायर एनओसी के हैं। ऐसे में स्कूलों, कॉलेजों, होटलों, बाजारों और व्यावसायिक भवनों की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

Delhi Fire incident: अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नई चिंताएं

जनवरी 2026 से फायर एनओसी (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) जारी करने की जिम्मेदारी थर्ड पार्टी एजेंसियों को दी गई है। इसके बाद फायर बिग्रेड के अधिकारी किसी भी संस्थान में सीधे कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं। इस प्रक्रिया के बाद अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नई चिंताएं सामने आने लगी हैं। पत्रिका ने अपनी पड़ताल में पाया कि नई व्यवस्था के तहत फायर विभाग के अधिकारियों की भूमिका सीमित हो गई है।

अलार्म सिस्टम बंद

यदि किसी भवन या संस्थान में सुरक्षा संबंधी खामियां मिलती भी हैं तो फायर अधिकारी सीधे कार्रवाई करने के बजाय केवल अनुशंसा कर सकते हैं। इसके बाद थर्ड पार्टी ऑडिट करती है। राजधानी के कमर्शियल कॉम्पलेक्स की स्थिति यह है कि कहीं स्प्रिंकिलर सिस्टम तो लगे हैं, लेकिन उनमें पानी नहीं है, तो कहीं आग लगने की सूचना देने वाले अलार्म सिस्टम बंद पड़े हैं।

इन विभागों की भी जिम्मेदारी

अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी और अनुपालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सिर्फ फायर बिग्रेड की नहीं बल्कि नगर निगम, स्वास्थ्य विभाग, ग्राम एवं नगर निवेश, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन सहित कई विभागों पर है। इसके बावजूद व्यावसायिक भवनों में सबसे अधिक अनियमितताएं सामने आ रही हैं। आरोप है कि कई मामलों में भवन संचालन की अनुमति देते समय फायर एनओसी और सुरक्षा मानकों की गंभीरता से जांच नहीं की जाती।
आग लगी तो सिस्टम ही गायब मिला

निगम अपनी ही बिल्डिंग नहीं बचा पाया

11 मार्च 2025 को राजधानी के मालवीय रोड स्थित निगम की पुरानी बिल्डिंग में अचानक आग लग गई। इससे बाजार में अफरा-तफरी का मौहाल हो गया। बिल्डिंग के चारों ओर दुकानों को इससे खतरा बढ़ गया था। मौके पर तत्काल कोई सिस्टम नजर नहीं आया। निगम बिल्डिंग में आग कैसे लगी यह भी रहस्य बना हुआ है।

केस-2

एटीएम से काॅम्प्लेक्स में फैली आग

9 जून 2023 को राजधानी के मोतीबाग स्थित एक कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में पीएनबी के एटीएम के आग लग गई, जिससे लाखों रुपए नकदी जलने के बाद आग पर मुश्किल से काबू पाया गया। मौके पर काम्प्लेक्स में आग बुझाने के लिए जरूरी मापदंड गायब मिले। इससे 5-6 दुकानें खाक हो गई।

राजधानी के इन बाजारों में खतरा ज्यादा

स्टेशन रोड, मालवीय रोड, सदर बाजार, गोलबाजार, एमजी रोड, मौदहापारा रोड, तात्यापारा रोड, जवाहर बाजारा, रविभवन, लालगंगा शॉपिंग मॉल आदि।
स्टार होटलों को यह रखना जरूरी

  1. अग्निशामक यंत्र
  2. फस्र्ट एड होजरील प्रणाली
  3. ऑटोमेटिक स्प्रिंकिलर सिस्टम
  4. मैनुअली ऑपरेटेड इलेक्ट्रॉनिक फायर अलार्म प्रणाली एवं पब्लिक एंड्रेस सिस्टम
  5. ऑटोमेटिक स्मोक डिटक्शन सिस्टम,
  6. ढ़ाई लाख लीटर अंडरग्राउंड वॉटर टैंक, 2 इलेक्ट्रिकल पंप, जिसकी क्षमता 180 लीटर पानी प्रति मिनट प्रेशर हो।
  7. 20 हजार लीटर का टैरिस वॉटर टैंक

यह भी जरूरी

  1. सभी प्रकार के भवनों में हाइड्रेंट की संख्या 100 एवं 100 से अधिक होने पर पंप हाउस में दो नग इलेक्ट्रिकल, दो नग डीजल एवं दो नग जॉकी पंप होना आवश्यक है एवं अंडरग्राउंड पानी की क्षमता दोगुनी होगी।
  2. सभी प्रकार के भवनों में जिनकी ऊंचाई 15 मीटर से अधिक है, उनमें दो निकास द्वार जिसकी चौड़ाई 1 मीटर होना आवश्यक है।
  3. बहु मंजिला इमारतों मे जिनकी ऊंचाई 24 मीटर है, तो एक रिफ्यूज एरिया होना आवश्यक है तथा इसके बाद प्रत्येक 15 मीटर की ऊंचाई में एक रिफ्यूज एरिया होना चाहिए।
  4. बहु मंजिला इमारतों में रोड की चौड़ाई, भवन की ऊंचाई से 1/3 होना आवश्यक है।
  5. बेसमेंट क्षेत्रफल 200 वर्ग मीटर से अधिक है, तो कुल क्षेत्रफल का 2.5 प्रतिशत वेंटिलेशन के लिए उपलब्ध कराना आवश्यक है।
  6. बेसमेंट से मुख्य भवन प्रवेश के बीच 4 घंटा रेटिंग का फायर चेक डोर रखना आवश्यक है।

जिला अग्निशमन अधिकारी,पुष्पराज सिंह ने बताया कि शिकायत के आधार पर कार्यवाही की अनुशंसा की जाती है। जनवरी 2026 से थर्ड पार्टी ऑडिट किया जा रहा है। इसके लिए एजेंसियों को अधिकृत किया गया है।