
ब्लैकमेलिंग केस में सुप्रीम कोर्ट का फैसला (Photo Source- Patrika File Photo)
विनोद जैन/Chhattisgarh Farmer Protest: छत्तीसगढ़ के दुलना गांव में किसान पिछले करीब 15 वर्षों से बाढ़ की समस्या से जूझ रहे हैं। हर बरसात में नदी और नाले का पानी खेतों तक पहुंचने से फसलों को नुकसान उठाना पड़ता है। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान अब तक नहीं हो पाया है। कठौली नाला डायवर्सन और वियर निर्माण के लिए 40 करोड़ 75 लाख 32 हजार रुपये का प्राक्कलन तैयार कर तकनीकी स्वीकृति के लिए भेजा गया है, लेकिन निर्माण शुरू होने की स्थिति स्पष्ट नहीं है। इस मामले को लेकर पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष धनेन्द्र साहू ने प्रदेश सरकार पर सवाल उठाए हैं।
ग्राम पंचायत दुलना के मांगपत्र के अनुसार, दुलना एनीकट बनने के बाद से बारिश के मौसम में गांव और आसपास के खेतों में पानी भरने की समस्या सामने आती रही है। महानदी का जलस्तर बढ़ने और गंगरेल बांध के गेट खोले जाने पर कठौली नाला में बैकवाटर भर जाता है। इससे क्षेत्र में बाढ़ जैसी स्थिति बनती है और पानी गांव के भीतर तथा खेतों तक पहुंच जाता है।
इसका सीधा असर किसानों की फसलों पर पड़ता है। हर साल बारिश के दौरान खेतों में पानी भरने से उन्हें आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है। इस वर्ष भी प्रभावित किसानों को भारी नुकसान होने की बात सामने आई है। लंबे समय से समस्या का सामना कर रहे ग्रामीण स्थायी समाधान की मांग करते आ रहे हैं।
दुलना और आसपास के क्षेत्र में बाढ़ की समस्या दूर करने के लिए कठौली नाला डायवर्सन एवं वियर निर्माण की योजना प्रस्तावित है। जल संसाधन विभाग के 24 दिसंबर 2025 के पत्र में इस काम के लिए 40 करोड़ 75 लाख 32 हजार रुपये का प्राक्कलन तकनीकी स्वीकृति के लिए कार्यपालन अभियंता, जल प्रबंध संभाग क्रमांक-1, रायपुर को भेजे जाने का उल्लेख है।
यह राशि दुलना व्यपवर्तन योजना की शेष राशि के अंतर्गत प्रस्तावित है। हालांकि, प्राक्कलन तकनीकी स्वीकृति के लिए भेजे जाने का अर्थ यह नहीं है कि योजना को अंतिम मंजूरी मिल गई है या निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। फिलहाल योजना की वर्तमान स्थिति और निर्माण शुरू होने की समयसीमा को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
दुलना के ग्रामीण लंबे समय से डायवर्सन निर्माण की मांग कर रहे हैं। इस समस्या को लेकर प्रभावित लोग धरना-प्रदर्शन भी कर चुके हैं। किसानों की मांग है कि बाढ़ से बचाव के लिए ऐसा स्थायी इंतजाम किया जाए, जिससे हर साल उनकी फसलें पानी में डूबने से बच सकें।
ग्रामीणों के सामने सबसे बड़ी परेशानी यह है कि बरसात का मौसम आते ही खेतों में पानी भरने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में केवल प्रस्ताव तैयार होने से किसानों को तत्काल राहत नहीं मिलती। उन्हें योजना की मंजूरी, निर्माण शुरू होने और काम पूरा होने की समयसीमा को लेकर ठोस जानकारी की जरूरत है।
पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष धनेन्द्र साहू ने दुलना में बाढ़ की समस्या का स्थायी समाधान नहीं होने पर राज्य सरकार को घेरा है। उन्होंने कहा कि जल संसाधन विभाग स्वयं मुख्यमंत्री के पास है, इसके बावजूद किसानों की समस्या का निराकरण नहीं होना सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े करता है। साहू ने किसानों को हो रहे नुकसान का मुद्दा उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा है। उनका कहना है कि वर्षों से परेशानी झेल रहे किसानों को राहत देने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
दुलना में बाढ़ की समस्या करीब 15 वर्षों से बनी हुई है। विभागीय पत्र में डायवर्सन और वियर निर्माण के लिए प्राक्कलन तकनीकी स्वीकृति के लिए भेजे जाने का उल्लेख है, लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आगे की प्रक्रिया कब पूरी होगी और निर्माण कार्य कब शुरू होगा।
हर साल फसल नुकसान झेलने वाले किसानों के लिए समय पर कार्रवाई जरूरी है। यदि योजना को मंजूरी मिलने और निर्माण शुरू होने में देरी होती है, तो अगले बरसात के मौसम में भी किसानों को उसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में सरकार और जल संसाधन विभाग के सामने चुनौती है कि प्रस्तावित योजना की स्थिति स्पष्ट करें और दुलना के किसानों को बाढ़ से स्थायी राहत दिलाने के लिए समयबद्ध कदम उठाएं।
Updated on:
11 Oct 2026 06:46 pm
Published on:
11 Oct 2026 06:44 pm
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