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यहां के सीए के पैन से हैदराबाद में फर्जी जीएसटी रजिस्टर्ड, आयकर नोटिस के बाद हुआ खुलासा

Raipur News: हर कहीं पैनकार्ड, आधार कार्ड जैसे पहचान संबंधी दस्तावेजों को बिना सोचे-समझे देना कितना नुकसानदायक हो सकता है।

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Fake GST registered in Hyderabad with CA's PAN Raipur

यहां के सीए के पैन से हैदराबाद में फर्जी जीएसटी रजिस्टर्ड

रायपुर। Chhattisgarh News: हर कहीं पैनकार्ड, आधार कार्ड जैसे पहचान संबंधी दस्तावेजों को बिना सोचे-समझे देना कितना नुकसानदायक हो सकता है, इसका अंदाजा विधानसभा इलाके में घटी एक घटना से लगाया जा सकता है। एक सीए के पैन कार्ड का इस्तेमाल करके ठगों ने हैदराबाद में जीएसटी रजिस्टर्ड करवा लिया। इसके बाद भुवनेश्वर से करोड़ों रुपए का ट्रांजेक्शन दिखाया गया।

असम से फर्जी ऑडिट रिपोर्ट जारी किया गया और पश्चिम बंगाल वालों ने उनके नाम से डिजीटल सिग्नेचर भी बना लिए। इस तरह उनके फर्जी जीएसटी नंबर से जुड़े फर्म में करोड़ों रुपए का टर्नओवर दिखाकर इनकम टैक्स चोरी करने का प्रयास किया गया। पीडि़त सीए को इसकी जानकारी होने पर पुलिस में शिकायत की गई। पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ अपराध दर्ज कर विवेचना में लिया है।

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पुलिस के मुताबिक सीए अंकित बांगर का ट्रांसपोर्टिंग का कारोबार है। वर्ष 2020-21 के आयकर रिटर्न के लिए उन्होंने फार्म 26 एएस निकाला, तो उन्हें पता चला कि हैदराबाद में उनके पैन नंबर का इस्तेमाल करते हुए मेसर्स प्रेम नारायण इंटरप्राइजेस के नाम से जीएसटी रजिस्टर्ड है। उसका आधार सत्यापन नहीं हुआ था। इसमें बिजली सामान का कारोबार बताया गया था। उनका इसकी शिकायत उन्होंने जीएसटी विभाग में की। इसकी जांच चल रही थी। इसके बाद उस जीएसटी रजिस्ट्रेशन को स्थगित कर दिया गया। वर्ष 2022 में सीए अंकित को भुवनेश्वर आयकर विभाग सहित अन्य जगहों से नोटिस मिलने लगा।

उसी जीएसएटी नंबर के जरिए करोड़ों रुपए का ट्रांजेक्शन दूसरी कंपनी में बताया गया था। नोटिस के बाद सीए ने मामले की शिकायत जीएसटी सहित विभागों में की। इस बीच अज्ञात आरोपियों ने अंकित का डिजीटल सिग्नेचर भी बना लिया था। इसके जरिए उनके आयकर आईडी और पासवर्ड को बदल दिया गया था। साथ ही मोबाइल नंबर और उनके ई-मेल आईडी को भी बदल दिया।

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असम से ऑडिट रिपोर्ट अपलोड

ठगों ने असम के एक सीए की ओर से अंकित के फर्जी जीएसटी नंबर वाले फर्म का फाइनेंशियल इयर 2020-21 की ऑडिट रिपोर्ट बैक डेट पर 31 मार्च 2023 को अपलोड किया। इसमें 18 करोड़ रुपए से अधिक का टर्नओवर दिखाया गया। डिजीटल सिग्नेचर में ओटीपी की जरूरत नहीं पड़ती। इसलिए ठगों ने डिजीटल सिग्नेचर भी बनवा लिया था। इसके लिए नाम और पैनकार्ड अंकित का इस्तेमाल किया गया है। वीडियो किसी दूसरे का दिया गया है। पूरा काम सिग्नेचर पश्चिम बंगाल से हुआ है। ऑडिट रिपोर्ट असम के सीए ने अपलोड किया। आरोपियों ने इसके जरिए खर्च दिखाकर टैक्स चोरी कर रहे थे। इसकी शिकायत सीए अंकित ने विधानसभा थाने में की। पुलिस ने मामले में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ अपराध दर्ज कर लिया है।

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डिजीटल सिग्नेचर से बड़ा नुकसान

ठगी करने वाले फर्जी डिजीटल सिग्नेचर के जरिए संपत्ति की खरीदी-बिक्री, मनी ट्रांसफर, शेयर बिक्री आदि कर सकते थे। फिलहाल पुलिस ने अपराध दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। बताया जाता है कि कुछ आरोपियों की पहचान हो गई है।

डॉक्टर से भी हुई थी ठगी

एक निजी अस्पताल के डॉक्टर से भी इसी तरह की ठगी हुई थी। उनके नाम से दो आईडी बनाकर करोड़ों रुपए का लेन-देन किया गया था। उस मामले में भी पुलिस ने अपराध दर्ज किया है। उसकी जांच चल रही है।

सावधानी बरतें

डीएसपी क्राइम दिनेश सिन्हा के मुताबिक पहचान संबंधी दस्तावेजों को कहीं भी बिना सोचे-समझे नहीं देना चाहिए। इसका दुरुपयोग हो सकता है। खासकर आधार कार्ड, पैन कार्ड, राशनकार्ड आदि का ज्यादा दुरुपयोग हो रहा है।

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