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Jaggi murder case: फिर से खुली जग्गी हत्याकांड की फाइल, सरेआम गोली मारकर हुई थी हत्या

Jaggi murder case: रायपुर की विशेष अदालत ने सबूतों के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया था। रामअवतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने अमित जोगी को बरी करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी

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Jaggi murder case: फिर से खुली जग्गी हत्याकांड की फाइल, सरेआम गोली मारकर हुई थी हत्या

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के कोषाध्यक्ष रामअवतार जग्गी (Photo Patrika)

Jaggi murder case: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के कोषाध्यक्ष रामअवतार जग्गी हत्याकांड की फाइल लंबे अर्से बाद फिर खुली है। यह घटना 4 जून 2003 को मौदहापारा थाने के चंद कदम दूरी पर हुई। घटना के समय वह अपनी कार से घर जा रहे थे। इसी दौरान रात करीब 11 बजे गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में 31 अभियुक्त बनाए गए थे, जिनमें से बल्टू पाठक और सुरेंद्र सिंह सरकारी गवाह बन गए थे। अमित जोगी को छोड़कर बाकी 28 लोगों को सजा मिली थी।

हालांकि 31 मई 2007 को रायपुर की विशेष अदालत ने सबूतों के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया था। रामअवतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने अमित जोगी को बरी करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी, जिस पर अमित के पक्ष में स्टे लगा था। बता दें कि कारोबारी बैकग्राउंड वाले रामअवतार जग्गी देश के बड़े नेताओं में शुमार पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल के बेहद करीबी थे। कांग्रेस छोड़कर एनसीपी शुक्ल के एनसीपी में शामिल होने पर जग्गी भी उनके साथ गए।

ये पाए गए थे दोषी

जग्गी हत्याकांड में अभय गोयल, याहया ढेबर, वीके पांडे, फिरोज सिद्दीकी, राकेश चंद्र त्रिवेदी, अवनीश सिंह लल्लन, सूर्यकांत तिवारी, अमरीक सिंह गिल, चिमन सिंह, सुनील गुप्ता, राजू भदौरिया, अनिल पचौरी, रविंद्र सिंह, रवि सिंह, लल्ला भदौरिया, धर्मेंद्र, सत्येंद्र सिंह, शिवेंद्र सिंह परिहार, विनोद सिंह राठौर, संजय सिंह कुशवाहा, राकेश कुमार शर्मा, (मृत) विक्रम शर्मा, जबवंत, विश्वनाथ राजभर दोषी पाए गए थे।

हत्या को बताया था प्रायोजित

रामावतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने कहा कि उनके पिता की हत्या तत्कालीन राज्य सरकार की प्रायोजित थी। सीबीआई द्वारा जब जांच शुरू हुई, तब सरकार के प्रभाव में सारे सबूतों को मिटा दिया गया था। ऐसे केस में सबूत अहम नहीं हैं, बल्कि षड्यंत्र का पर्दाफाश जरूरी है। लिहाजा, इस केस के आरोपियों को सबूतों के अभाव में दोषमुक्त नहीं किया जा सकता।
सत्य की जीत होगी: अमित

इस मामले में अमित जोगी ने कहा कि हाईकोर्ट एक अप्रैल को मेरे बरी होने के दो दशक पुराने फैसले के खिलाफ अपील पर सुनवाई करेगी। मैं पूरे आत्मविश्वास के साथ कहता हूं कि अब तक ईश्वर मेरे साथ रहा है और आगे भी रहेगा। सत्य की जीत अवश्य होगी। जीवन से मैंने एक बात सीखी है कि जो लोग ईश्वर पर भरोसा रखते हैं वे हमेशा आगे बढ़ते हैं और सफल होते हैं। सभी से सिर्फ एक ही निवेदन है कि मुझे और मेरे परिवार को अपनी प्रार्थनाओं और आशीर्वाद में याद रखें। आपकी प्रार्थनाएं ही मेरी सबसे बड़ी ताकत है।