
रायपुर . लोक कथाओं और किंवदंतियों से जुड़े छत्तीसगढ़ में ऐसे कई धरोहर हैं जो अपने आप में इतिहास को समेटे हुए हैं। उन्हीं धरोहरों में से एक है छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के सीतामढ़ी में स्थित रामगुफा, जहां भगवान राम अपने वनवास के दौरान कुछ समय के लिए ठहरे थे। यहां माता सीता के चरणों के निशान आज भी मौजूद हैं। जिनके दर्शन के लिए दूरदराज से बड़ी संख्या में भक्त यहां पहुंचते हैं।
गुफा के दीवारों पर लिखे हैं देवलिपि
रामगुफा सनातन अनुयाईयों के लिए आस्था का बड़ा केन्द्र है। इस गुफा के बाहरी दीवारों पर देवलिपि में लिखे शब्दों को आज तक नहीं पढ़ा जा सका है। गुफा के अंदर माता सीता के कदमों के निशान हैं। यहां आज भी बड़े ही भक्तिभाव से पूजा की जाती है।
रामसेतु का अनोखा पत्थर
इस स्थल की विशेषता के बारे में पुजारी बताते हैं कि यहां रामसेतु का अनोखा पत्थर भी रखा है, जिसे पानी में डाल देने के बाद भी वह नहीं डूबता है। इनके अनुसार वनवास के दौरान लक्ष्मण और माता सीता के साथ भगवान राम ने यहां कुछ समय गुजारा था।
धीरे-धीरे बढ़ रहा स्वयंभू शिवलिंग
रामगुफा की एक और विशेषता है, यहां गुफा के अंदर स्वयंभू शिवलिंग विराजित है। इस स्वयंभू शिवलिंग के बारे में अनोखी बात यह है कि इसका आकार धीरे-धीरे बढ़ रहा है। पुजारी बताते हैं कि पहले यह शिवलिंग देखने में बहुत छोटा प्रतीत होता था, लेकिन समय के साथ इसके आकार में वृद्धि होने लगी है। अब यह अपेक्षाकृत आकार में थोड़ा बड़ा दिखता है।
गुफा के अंदर विराजित हैं हनुमान
गुफा के अंदर एक प्राचीन हनुमान जी की भी मूर्ति है, जिनकी पूजा के लिए आसपास के लोग प्रतिदिन आते हैं। हालांकि मंगलवार और शनिवार को यहां श्रद्धालुओं की विशेष भीड़ एकत्रित होती है।
Updated on:
25 Mar 2018 01:00 pm
Published on:
25 Mar 2018 08:15 am
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