
छत्तीसगढ़ शराब घोटाला (photo source- Patrika)
Chhattisgarh Liquor Scam: छत्तीसगढ़ में बहुचर्चित शराब घोटाले के मामले में जांच एजेंसियों ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। एक्साइज डिपार्टमेंट के पूर्व असिस्टेंट कमिश्नर नवीन कुमार तोमर को कथित ₹27 लाख के लेन-देन के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया और इकोनॉमिक ऑफेंस इन्वेस्टिगेशन ब्रांच (EOW) की स्पेशल कोर्ट में पेश किया गया। सुनवाई के बाद, कोर्ट ने उन्हें 28 तारीख तक EOW की कस्टडी में भेज दिया।
रिमांड पीरियड के दौरान, जांच एजेंसी तोमर से कथित नेटवर्क, फंड फ्लो और उनकी भूमिका के बारे में पूरी तरह से पूछताछ करेगी। इससे पहले, एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) ने तोमर के एक करीबी को हिरासत में लेकर शुरुआती जांच की थी, और बाद में मामला आगे की कार्रवाई के लिए EOW को सौंप दिया गया था।
मौजूदा सबूतों के आधार पर, EOW ने तोमर को गिरफ्तार किया और स्पेशल कोर्ट में पेश किया। एजेंसी अब फाइनेंशियल लेन-देन को सुलझाने और पूरे नेटवर्क को जोड़ने के लिए काम कर रही है। सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। माना जा रहा है कि इस कार्रवाई से बेहद विवादित शराब घोटाले की जांच को नई गति मिल सकती है।
प्रवर्तन निदेशालय ने एसीबी में दर्ज एफआईआर का हवाला देते हुए करीब 3200 करोड़ रुपये से अधिक के कथित घोटाले का उल्लेख किया है। एजेंसी का आरोप है कि तत्कालीन सरकार के कार्यकाल में एक कथित सिंडिकेट के जरिए पूरे तंत्र को प्रभावित कर अवैध कमाई की गई।
जांच में जिन नामों का जिक्र हुआ है, उनमें आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के तत्कालीन एमडी एपी त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर शामिल बताए गए हैं। एजेंसियों के अनुसार, कथित घोटाले को तीन हिस्सों—A, B और C—में अंजाम देने का आरोप है।
A: डिस्टलरी से कमीशन वसूली
जांच में सामने आया कि डिस्टलरी संचालकों से प्रति पेटी 75 से 100 रुपये तक कमीशन वसूला गया। कथित तौर पर नुकसान की भरपाई के लिए बाद में शराब की कीमतें बढ़ाई गईं और ओवर बिलिंग की छूट दी गई।
B: नकली होलोग्राम के जरिए बिक्री
आरोप है कि अतिरिक्त शराब तैयार कर उस पर नकली होलोग्राम लगाकर सरकारी दुकानों से बिक्री कराई गई। इस नेटवर्क में सप्लाई, बोतल व्यवस्था और वितरण की अलग-अलग जिम्मेदारियां तय की गई थीं। जांच एजेंसियों का दावा है कि 40 लाख से अधिक पेटी शराब की बिक्री के साक्ष्य मिले हैं।
C: सप्लाई जोन में कथित हेरफेर
देशी शराब दुकानों को जोन में बांटकर टेंडर प्रक्रिया में कथित हेरफेर किए जाने का आरोप है। ईओडब्ल्यू का दावा है कि तीन वित्तीय वर्षों में सप्लाई के नाम पर करीब 52 करोड़ रुपये ‘पार्ट C’ के रूप में सिंडिकेट तक पहुंचाए गए।
कुल मिलाकर, नवीन कुमार तोमर की गिरफ्तारी को इस बड़े मामले में महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है और जांच एजेंसियां अब पूरे वित्तीय नेटवर्क को खंगालने में जुटी हैं।
Published on:
19 Feb 2026 06:29 pm
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