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सरकार ने दी 30 फीसदी रजिस्ट्री शुल्क में छूट से फायदा दलालों को, रजिस्ट्री मुफ्त देने का कर रहे हैं वादा

आरंग नगर पालिका इलाके में करीब 22 एकड़ की कृषि भूमि में दलालों द्वारा किसानों के खेतों में अवैध प्लॉटिंग की जा रही है। कृषि भूमि को आवासीय प्लॉट बेचकर सरकार को चूना लगा रहे हैं।

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रायपुर. आरंग नगर पालिका इलाके में करीब 22 एकड़ की कृषि भूमि में दलालों द्वारा किसानों के खेतों में अवैध प्लॉटिंग की जा रही है। कृषि भूमि को आवासीय प्लॉट बेचकर सरकार को चूना लगा रहे हैं। सभी लोगों की रजिस्ट्री भी कृषि भूमि दिखाकर कर दी गई है, जिससे राजस्व विभाग को इन जमीनों की रजिस्ट्री से करोड़ों का राजस्व नुकसान होने का अनुमान है, क्योंकि कृषि भूमि की रजिस्ट्री 30 फीसदी सरकारी छूट के साथ होती है।

पत्रिका ने ग्राहक बनकर इसकी जानकारी जुटाई। पूरे क्षेत्र में 22 एकड़ से ज्यादा जमीन बेची जा चुकी है। बिना लेआउट और डायवर्सन के प्लॉट की रजिस्ट्री कराकर सरकार को भी करोड़ों को चूना लगाया जा रहा है। आम लोगों को धोखे में रखकर अब तक 950 लोगों को प्लाट बेचा जा चुका है। पत्रिक की टीम ने अवैध प्लॉटिंग से जुड़े दलालों की पड़ताल की तो पता चला कि अब तक सैकड़ों लोगों को 1000 से 1500 सौ रुपए वर्गफीट के हिसाब से जमीन बेची जा चुकी है।

किसानों की जमीन से दलालों की कमाई
पत्रिका की टीम को नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर एक किसान ने बताया कि उनके खेत के अच्छे दाम देने के एवज में दलाल ने कुछ रकम देकर एग्रीमेंट कर रखा है और खुद प्लॉटिंग कर उसकी जमीन को महंगे दामों में बेच रहे हैं। किसी भी तरीके से अपने हक के लिए आवाज उठाने पर उनकी जमीन को एग्रीमेंट के दम पर हड़प लेने की बात कहकर डराया जाता है। यहां पर किए जा रहे अवैध प्लॉटिंग पर सिर्फ और सिर्फ दलाल कमाई कर रहे हैं। किसान फंसने के बाद दलालों के मुंह ताकने के लिए विवश हो गए हैं।

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आरंग में चल रही अवैध प्लाटिंग से प्रशासन को चौतरफा नुकसान
सरकार राजधानी को झुग्गी मुक्त करने के लिए अहम प्रयास कर रही है। लेकिन अवैध प्लॉटिंग से इस प्रयास में भी बट्टा लग रहा है। अवैध प्लॉटिंग का टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग से अप्रूवल न होने के कारण शासन को ईडब्ल्यूएस की जमीन नहीं मिल रही है। जमीन की प्लॉटिंग करने पर ईडब्ल्यूएस के लिए कमजोर आय वर्ग के लिए 15 प्रतिशत जमीन रिजर्व करना अनिवार्य है। अवैध प्लॉटिंग करने वाले भू माफिया ने ईडब्ल्यूएस के लिए जमीन नहीं छोड़ी है।

1. लेआउट अप्रूवल होने पर प्लाट की बिक्री होने पर एरिया में चौड़ी सड़क, गार्डन और ड्रेनेज सिस्टम का प्रावधान नियमानुसार किया जा सकता। अभी सड़क की जमीन भी बेच रहे हैं भूमाफिया।
2. शासन को पीएम आवास के लिए ईडब्ल्यूएस वर्ग के लिए पर्याप्त जमीन मिलेगी। अभी तक ईडब्ल्यूएस वर्ग के लिए 15 प्रतिश जमीन छोड़े बगैर पूरी जमीन बेची जा रही है।
3.ले-आउट एप्रूवल होने पर बिल्डिंग परमिशन आसानी से मिलेगी। एप्रूव न होने के कारण नगरीय निकाय से परमिशन नहीं मिलती।
4. ले-आउट के बिना पहले भी रजिस्ट्री नहीं होती थी। लेकिन कुछ लोग रजिस्ट्री कार्यालय में सांठगांठ करके गलत तरीके से रजिस्ट्री करा लेते है। इसपर रोक लगाने से अवैध प्लॉटिंग रुकेगी।

एप्रूवल कराने छोड़ना होता 55 प्रतिशत तक जमीन
जमीन की प्लॉटिंग करने टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग से लेआउट अप्रूव कराना जरूरी है। अप्रूवल के लिए सड़क, नाली, गार्डन के लिए 55 फीसदी जमीन रिजर्व रखनी पड़ती है। बाकी बची 45 प्रतिश जमीन पर ही प्लॉटिंग करके बेचा जा सकता है। जबकि कालोनाइजर 15 प्रतिशत भूखंड छोड़कर प्लॉटिंग कर बेच रहे हैं।

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जानिए कारण, जिसकी वजह से नहीं हो रही कार्रवाई
कुछ किसानों ने बताया कि राजस्व विभाग के कुछ लोगों की पार्टनरशिप इस अवैध प्लाटिंग में है। इस वजह से अवैध प्लॉटिंग पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।

प्रशासन गंभीर नहीं
- अवैध प्लॉटिंग व अवैध कब्जा पर कार्रवाई के लिए नियम जरूर बनाए गए हैं, लेकिन शासन इन पर कार्रवाई करने को लेकर गंभीर नहीं है।

भूमाफिया व जनप्रतिनिधियों की सांठगांठ
- सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा व अवैध प्लॉटिंग बिना स्थानीय जनप्रतिनिधियों के सांठगांठ से संभव नहीं है। आपसी आर्थिक लाभ की वजह से ये खेल संभव होता है।

सिर्फ नोटिस में मामला खत्म
अवैध प्लॉटिंग के मामले को लेकर स्थानीय प्रशासन कोर्ट नहीं जाता। सिर्फ कार्रवाई नोटिस तक ही सीमित है। इससे भू माफिया का हौसला बढ़ रहा है।

रायपुर कलेक्टर सौरभ कुमार ने कहा, एसडीएम को टीम बनाकर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। जल्द ही कड़ी कार्रवाई की जाएगी।