
पहली बार जिसने पूरी दुनिया को दी पौधारोपण की सोच, 127 साल बाद भी उसके परिवार को ही मिल पाया पुरस्कार
रायपुर. सुने त रहेन साहब...रमन सरकार ह पुरस्कार के घोषणा करे हे, लेकिन हमर पास न कोई चिट्ठी आ हे, न कोई बताए बर...ये वो परिवार है, जिसके मुखिया मनीराम गोंड ने आज से 127 साल पूर्व गुलाम भारत सहित पूरी दुनिया को पौधरोपण और पर्यावरण संरक्षण के लिए उस दौर में एक सोच दी। जब हम गुलामी की बेडिय़ों में जकड़े हुए थे। छत्तीसगढ़ शासन ने हाल ही में इस महान व्यक्तित्व के नाम से पौधरोपण के लिए पुरस्कार देने की घोषणा की है, लेकिन विडंबना है कि जिन उपलब्धियों के लिए मध्यप्रदेश सरकार ने 1996 में 10 एकड़ भूमि दी, आज तक उनके परिवार को उसका मालिकाना हक नहीं मिला है। बदहाली की जिदंगी जी रहे परिजन 22 साल से अधिकारियों से लेकर मंत्रियों तक के चक्कर काट चुके हैं।
छत्तीसगढ़ के सपूत स्व. मनीराम गोड़ जो 1891 में अंग्रेजों के शासन में बलौदाबाजार देवपुर वनपरिक्षेत्र, गिधपुरी में फॉरेस्ट गार्ड के पद पर कार्य करते हुए वन की देखरेख कर रहे थे। तब उन्होंने नौ हेक्टेयर रकबे में सागौन का पौधरोपण कर दुनिया को उस वक्त एक नई सोच दी, जब लोग पर्यावरण संरक्षण के लिए जागरूक नहीं थे। अंग्रेजों को यह नागवार गुजरी, तो उसे नौकरी ने निकाल दिया। बावजूद इसके मनीराम ने पौधों की देखरेख में अपना सारा जीवन समर्पित कर दिया। गुमनामी के अंधेर में जा चुकी उनकी उपलब्धि को 105 वर्ष बाद उस वक्त पहचान व सम्मान मिला, जब 1996 में मध्यप्रदेश सरकार ने स्व. मनीराम के पोते प्रेमसिंह को पिथौरा के ठाकुरदियाकला में 10 एकड़ भूमि और 50 हजार रुपए देकर सम्मानित करते हुए उन्हें देश का गौरव बताया। पुरस्कार स्वरूप रुपए तो मिले, लेकिन आज 22 वर्ष बीतने के बाद भी उन्हें भूमि का मालिकाना हक नहीं मिला है।
स्व. मनीराम की नाती बहू हीराबाई (80) ने बताया कि बेटा सालिकराम की (55) दिमागी हालत ठीक नहीं है। बेटी मालती बाई व पति उनके साथ रहते हैं। घर की आर्थिक स्थिति ऐसी कि जैसे-तैसे मजदूरी कर घर का गुजर-बसर ही हो पा रहा है। भूमि के पट्टे के लिए शासन-प्रशासन से वर्षों से गुहार लगा रहे हैं। कई बार आवेदन दिया, मंत्री से मिले, लेकिन आज तक हमें अपने भूमि का मालिकाना हक नहीं मिला है। हीराबाई का कहना है कि अब इस अवस्था में अपने मानसिक विकलांग बेटे को लेकर कहां जाऊं। सरकार बस हमें अपने जमीन का मालिकाना हक दिला दे।
स्व. गोड़ द्वारा 127 वर्ष पूर्व किए गए सागौन पौधरोपण भारत ही नहीं पूरे एशिया का पहला पौधरोपण व पर्यावरण संरक्षण की दिशा में पहली पहल व सोच के रूप में देखा गया। मनीराम के इस अनुठे और सफल प्रयोग को आज पूरी दुनिया याद कर उन्हें आदर्श के रूप में देखती है।
आलोक तिवारी, डीएफओ, महासमुंद
महेश गागड़ा, वन मंत्री, छग शासन
Updated on:
01 Aug 2018 01:33 pm
Published on:
01 Aug 2018 11:25 am
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