CBI ने जांच के बाद भूपेश बघेल समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ आपराधिक साजिश, जालसाजी, फर्जी इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड के इस्तेमाल और आपत्तिजनक सामग्री के प्रकाशन-प्रसारण जैसी धाराओं में आरोपपत्र दाखिल किया था। इस मामले में मार्च 2025 में विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट ने पर्याप्त प्रथम दृष्टया साक्ष्य नहीं मिलने का हवाला देते हुए भूपेश बघेल को डिस्चार्ज कर दिया था। हालांकि जनवरी 2026 में CBI के विशेष न्यायाधीश ने इस आदेश को पलटते हुए उनके खिलाफ आरोप तय करने का निर्देश दिया। इसी आदेश के खिलाफ बघेल ने हाईकोर्ट का रुख किया था।