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रायपुर के एस्कॉर्ट को टेकओवर कर दिल का सरकारी अस्पताल बनाने का फंडा जानेगा आईआईएम अहमदाबाद

देश में एक एक जहां सरकारी संस्थाओं का निजीकरण होता चला जा रहा है। वहीं दूसरी ओर छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा 2017 में एस्कॉर्ट हॉस्पिटल (निजी अस्पताल) को टेकओवर कर अस्पताल का सरकारीकरण करने का निर्णय अब शोध का विषय बन गया है। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (आईआईएम) अहमदाबाद इस पर शोध करने की तैयारी में हैं।

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रायपुर के एस्कॉर्ट को टेकओवर कर दिल का सरकारी अस्पताल बनाने का फंडा जानेगा आईआईएम अहमदाबाद

रायपुर के एस्कॉर्ट को टेकओवर कर दिल का सरकारी अस्पताल बनाने का फंडा जानेगा आईआईएम अहमदाबाद

रायपुर. देश में एक के बाद एक सरकारी संस्थाओं का निजीकरण होता चला जा रहा है। एकमात्र सरकारी विमानन कंपनी एयर इंडिया को भी अब सरकार ने बेचने निर्णय ले लिया है। मगर निजीकरण के इस दौर में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा 2017 में एस्कॉर्ट हॉस्पिटल (निजी अस्पताल) को टेकओवर कर अस्पताल का सरकारीकरण करने का निर्णय अब शोध का विषय बन गया है। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (आईआईएम) अहमदाबाद इस पर शोध करने की तैयारी में हैं।
यही वजह है कि एसीआई में कॉर्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. स्मित श्रीवास्तव को अहमदाबाद आने का न्यौता भेजा है। जहां वे 16 फरवरी को मैनेजमेंट के छात्रों के सामने 'इंनोवेशन इन पब्लिक हेल्थकेयरÓ पर प्रजेंटेशन देंगे। बताएंगे कि 15 सालों तक अनुबंध के तहत सरकारी जमीन, सरकारी भवन व सरकारी मशीनों का एस्कॉर्ट हॉस्पिटल प्रबंधन ने इस्तेमाल किया और कैसे सबकुछ वापस ले लिया गया। अब यहां पर राज्य का पहला दिल के इलाज वाला सरकारी अस्पताल, एडवांस कॉर्डियक इंस्टीट्यूट (एसीआई) संचालित हो रहा है। रोजाना 300 की ओपीडी है। दिल की सभी बीमारियों का इलाज हो रहा है, वह भी नि:शुल्क। डॉ. श्रीवास्तव का कहना है कि यह राज्य के बड़ी उपलब्धि है।

इनके शेयर बेचने जा रही है केंद्र सरकार
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक केंद्र सरकार एयर इंडिया, भारत पेट्रोलियम, शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया व कंटेनर कॉर्पोरेशन जैसे कंपनियों को या उनके शेयर को बेचने की तैयारी में है। रेलवे में तेजस पहली प्राइवेट ट्रेन है, तो 50 रेलवे स्टेशन और 150 ट्रेनों का निजीकरण होना है।

निजीकरण से सरकारीकरण की पूरी कहानी-
क्यों दिया था सरकार ने एस्कॉर्ट को संसाधन-
- पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के कार्यकाल में आंबेडकर अस्पताल में दिल के इलाज के लिए अलग से साधन-संसाधन खरीदे गए थे। भवन भी बनवाया गया था। मगर कॉडियक सर्जन और कॉर्डियोलॉजिस्ट न होने की वजह से फोर्टिस ग्रुप से 2002 में अनुबंध किया गया। 2007 में सीधे 10 सालों के लिए अनुबंध आगे बढ़ा दिया गया। मगर 2016-17 में आंबेडकर अस्पताल को कॉर्डियोलॉजी व कॉर्डियक थोरोसिक सर्जन मिल गए। इन्होंने सरकार के समक्ष प्रजेटेंशन दिया कि वे दिल का अस्पताल चलाने के लिए सक्षम हैं। इसके बाद सरकार ने निर्णय लिया गया कि क्यों न अब अपनी संपत्ति वापस ले ली जाए? इसलिए सरकार ने 31 अक्टूबर 2017 के बाद अनुबंध आगे नहीं बढ़ाया। मगर एस्कॉर्ट का अनुबंध बढ़ जाए, इसे लेकर भी लॉबिंग हुई थी। यही वजह थी कि सरकार को हाईकोर्ट में केविएट दायर करनी पड़ गई। अंत में फोर्टिस प्रबंधन को सब छोड़कर जाना पड़ा।