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करबला के शहीदों की याद में मातम मनाते सड़कों पर उतरे

करबला के शहीदों की याद में मातम मनाते सड़कों पर उतरे

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करबला के शहीदों की याद में   मातम मनाते सड़कों पर उतरे

रायपुर@पत्रिका. इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की शहादत की याद में शनिवार को यौमे आशूरा मनाया गया। इस मौके पर मोमिनपारा से मुख्य मातमी जुलूस निकाला गया। इसमें सैकड़ों की संख्या में बंदे शामिल हुए। जुलूस जहां से गुजरा, पूरा इलाका या हुसैन के नारों से गूंज उठा। बड़ी संख्या में ताजिये भी इसमें शामिल थे। इनमें मुसलमानों के इतिहास और विरासत की झलकियां देखने को मिलीं।

करबला के शहीदों की याद में   मातम मनाते सड़कों पर उतरे

रायपुर@पत्रिका. इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की शहादत की याद में शनिवार को यौमे आशूरा मनाया गया। इस मौके पर मोमिनपारा से मुख्य मातमी जुलूस निकाला गया। इसमें सैकड़ों की संख्या में बंदे शामिल हुए। जुलूस जहां से गुजरा, पूरा इलाका या हुसैन के नारों से गूंज उठा। बड़ी संख्या में ताजिये भी इसमें शामिल थे। इनमें मुसलमानों के इतिहास और विरासत की झलकियां देखने को मिलीं।

करबला के शहीदों की याद में   मातम मनाते सड़कों पर उतरे

रायपुर@पत्रिका. इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की शहादत की याद में शनिवार को यौमे आशूरा मनाया गया। इस मौके पर मोमिनपारा से मुख्य मातमी जुलूस निकाला गया। इसमें सैकड़ों की संख्या में बंदे शामिल हुए। जुलूस जहां से गुजरा, पूरा इलाका या हुसैन के नारों से गूंज उठा। बड़ी संख्या में ताजिये भी इसमें शामिल थे। इनमें मुसलमानों के इतिहास और विरासत की झलकियां देखने को मिलीं।

करबला के शहीदों की याद में   मातम मनाते सड़कों पर उतरे

रायपुर@पत्रिका. इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की शहादत की याद में शनिवार को यौमे आशूरा मनाया गया। इस मौके पर मोमिनपारा से मुख्य मातमी जुलूस निकाला गया। इसमें सैकड़ों की संख्या में बंदे शामिल हुए। जुलूस जहां से गुजरा, पूरा इलाका या हुसैन के नारों से गूंज उठा। बड़ी संख्या में ताजिये भी इसमें शामिल थे। इनमें मुसलमानों के इतिहास और विरासत की झलकियां देखने को मिलीं।

करबला के शहीदों की याद में   मातम मनाते सड़कों पर उतरे

रायपुर@पत्रिका. इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की शहादत की याद में शनिवार को यौमे आशूरा मनाया गया। इस मौके पर मोमिनपारा से मुख्य मातमी जुलूस निकाला गया। इसमें सैकड़ों की संख्या में बंदे शामिल हुए। जुलूस जहां से गुजरा, पूरा इलाका या हुसैन के नारों से गूंज उठा। बड़ी संख्या में ताजिये भी इसमें शामिल थे। इनमें मुसलमानों के इतिहास और विरासत की झलकियां देखने को मिलीं।