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रायपुर में बचके रहे झोलाछाप डॉक्टरों से.. बड़े नेटवर्क का हुआ खुलासा, ये रिपोर्ट देख उड़ जाएंगे होश

Fraud Doctors: झोलाछाप डॉक्टरों का नेटवर्क काफी तगड़ा है। पिछले सात साल से अभियान चलाकर कोई कार्रवाई नहीं होने के कारण ऐसे लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ये झोलाछाप ही ग्रामीण इलाके के मरीजों का खुद इलाज करते हैं। स्वास्थ्य में कोई सुधार नहीं होने पर मरीजों को कथित सुपर व मल्टी स्पेशलिटी अस्पतालों में भेजते हैं।

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Raipur news झोलाछाप डॉक्टरों का नेटवर्क काफी तगड़ा है। पिछले सात साल से अभियान चलाकर कोई कार्रवाई नहीं होने के कारण ऐसे लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ये झोलाछाप ही ग्रामीण इलाके के मरीजों का खुद इलाज करते हैं। स्वास्थ्य में कोई सुधार नहीं होने पर मरीजों को कथित सुपर व मल्टी स्पेशलिटी अस्पतालों में भेजते हैं। दरअसल, ये इन अस्पतालों के एजेंट की तरह काम करते हैं। अस्पताल मरीज भेजने के एवज में उन्हें अच्छी खासी रकम भी देते हैं। इनके झांसे में मरीज आसानी से आ जाते हैं और कथित सुपर व मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल में भर्ती होकर कई बार अपनी जान भी गंवा देते हैं।

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राजधानी, आसपास व पूरे प्रदेश में झोलाछाप डॉक्टरों का बोलबाला है। हालांकि उन्हें डॉक्टर लिखना भी नहीं चाहिए, लेकिन ये अपने आपको जनरल प्रेक्टिशनर से लेकर कई बीमारियों का विशेषज्ञ बताते हैं। शिक्षा की बात करें तो कई लोग तो मिडिल स्कूल व कुछ हाईस्कूल पास होते हैं। यहां तक कि कई लोग बायोलॉजी जैसे विषय भी पढ़े नहीं होते। फिर भी इनकी दुकान अच्छी चलती है। राजधानी के आंबेडकर समेत निजी अस्पतालों में झोला छाप डॉक्टरों के इलाज के बाद कई बिगड़े हुए केस आते हैं। सालभर पहले बालोद के इलाके के एक झोलाछाप डॉक्टर ने एक व्यक्ति को लकवा मारने के बाद कैल्शियम की दवा दे रहा था। बात करने पर बताया कि वे ऐसा ही इलाज करते हैं। लकवा में कैल्शियम का क्या रोल है, पूछने पर कुछ बोल नहीं पाया। फिर मरीज को तत्काल आंबेडकर अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां मेडिसिन विभाग में इलाज होने के बाद मरीज की हालत में काफी सुधार हुआ।

गांवों में पैरामेडिकल कोर्स करने वाले या 12वीं के बाद छोटे अस्पतालों में नर्स की ड्यूटी करने वाली महिलाएं भी मरीजों का जनरल इलाज कर रहे हैं। ये अपने आपको किसी विशेषज्ञ डॉक्टरों से कम नहीं समझते। हाल में आंबेडकर अस्पताल में ऐसा ही केस आया था, जब झोलाछाप डॉक्टर के इलाज से मरीज की किडनी खराब होने लगी थी। शरीर में दर्द होने पर झोलाछाप इंजेक्शन लगाने के अलावा पेनकिलर टेबलेट खाने को देता। फिर मरीज के शरीर में सूजन आने लगी। अच्छा हुआ, परिजन मरीज को रायपुर लेकर आ गए। ऐसे में व्यक्ति की जान बच गई।

सात साल पहले स्वास्थ्य विभाग ने अभियान चलाकर रायपुर जिले में झोलाछाप के खिलाफ कार्रवाई की थी। इससे झोलाछाप एक हो गए थे। फिर ऐसा दबाव बनाया कि कार्रवाई ही ठप पड़ गई। झोलाछाप की एकता के सामने स्वास्थ्य विभाग ने भी घुटने टेक दिए। अब शिकायत के बाद भी स्वास्थ्य विभाग कोई कार्रवाई नहीं करता। इससे विभाग पर ही कई सवाल उठने लगे हैं। जबकि रायपुर के ही कई मोहल्लों में झोलाछाप के क्लीनिक चल रहे हैं। साइनबोर्ड में भी नाम व कथित डिग्री भी लिखे रहते हैं। फिर भी कार्रवाई नहीं की जाती।

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नीम हकीम, खतरे जान, ऐसे ही झोलाछाप डॉक्टर होते हैं। अस्पताल में ऐसे कई केस आते हैं, जो पेरीफेरी में इलाज करवाकर बीमारी बढ़ाकर आते हैं। किडनी, लीवर से लेकर हार्ट, यहां तक कई बीमारियों का इलाज झोलाछाप के पास होता है। लोगों को चाहिए कि मामूली सर्दी, खांसी या बुखार है तो भी गांव में स्थित सरकारी अस्पताल में इलाज कराएं। बड़ी बीमारी है तो सरकारी व निजी अस्पतालों में सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टर उपलब्ध हैं। जान का जोखिम न लेते हुए, अच्छे डॉक्टरों से इलाज कराएं। -डॉ. सुनील खेमका, डायरेक्टर श्री नारायणा अस्पताल

शिकायत पर होती है कार्रवाईशिकायतों के आधार पर झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। ऐसे मामले आते रहते हैं। लोगों को भी चाहिए कि बीमार होने पर विशेषज्ञ डॉक्टरों को दिखाएं। -डॉ. मिथलेश चौधरी, सीएमएचओ रायपुर