
गांधी छत्तीसगढ़ पहुंचे तो रायपुर के गांधी मैदान में एक समूह देखते ही देखते विशाल सभा बन गया जिसे संबोधित बापू ने किया।
देखना है ज़ोर कितना बाजू-ए-कातिल में है।।
ताबीर हुसैन/ रायपुर. देशप्रेम का जज़्बा जगाती ये लाइनें तो आपने सुनी होंगी। आज शहर की कुछ ऐसी इमारतें और स्थल से रूबरू करवा रहे हैं जहां जाकर देश के लिए मर-मिटने वालों के अदम्य साहस को महसूस कर सकते हैं। इनमें से ज्यादातर को रिनोवेट किया जा चुका है जिससे इनकी खूबसूरती में भी निखार आ गया है।
आज देश का सबसे बड़ा राष्ट्रीय पर्व है। 15 अगस्त को लेकर बच्चे से लेकर बड़े उत्साहित हैं। देशभक्ति की भावना पर विभिन्न आयोजन भी हो रहे हैं। आज शहर के कुछ ऐसी धरोहर के बारे में जानिए जो स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के तीर्थ स्थल हैं। यहां जाकर हर कोई स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी यादों को करीब से महसूस कर सकता है।
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अगर आप इनमें से किसी भी स्थान पर जाकर पर्व को सार्थक करते हैं तो इंडिपेंडेंट्स विथ सेल्फी कॉम्पीटिशन में पार्टिसिपेट भी कर सकते हैं। चुनिंदा फ़ोटो हम प्रकाशित करेंगे। फ़ोटो 9806542400 में वाट्सएप करें।
जैतु साव मठ: राष्ट्रपिता ने मिटाया था भेदभाव
जैतू साव मठ का आजादी की लड़ाई से गहरा रिश्ता है। इतिहासकारों के मुताबिक यहां देशभर के कई राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम का एकजुट हुआ करते थे। उन दिनों यहां दलितों को प्रवेश नहीं दिया जाता था। जब 1933 में बापू ने सभा ली। तब भेदभाव को खत्म किया।
टाउन हॉल: विचार-विमर्श का केंद्र
कलेक्टर परिसर में स्थित टाउन हॉल रिनोवेट किया गया है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान यहां स्वतंत्रता सेनानी विचार-विमर्श कर लोगों को आजादी के लिए एकजुट करने और देशभक्ति की भावना प्रबल किया करते थे। इतिहासकार कहते हैं कि इसे चंदा कर 1868 में बनाया था। तत्कालीन राजाओं ने चंदा दिया था।
केंद्रीय सहकारी बैंक: आजादी की यादें
1930 में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी वामनराव लाखे ने केंद्रीय सहकारी बैंक का निर्माण कराया था। इस भवन को सहकारिता के इतिहास की मिसाल माना जाता है। दो जनवरी 1913 में रायपुर को-ऑपरेटिव सेंट्रल बैंक लिमिटेड की स्थापना हुई थी। यहां भी आजादी से जुड़ी कई यादें समाहित हैं।
गांधी मैदान: बापू की सभा
इतिहासकारों के मुताबिक कंडेल नहर सत्याग्रह में शामिल होने के लिए 20 दिसंबर 1920 को जब महात्मा गांधी छत्तीसगढ़ पहुंचे तो रायपुर के गांधी मैदान में एक समूह देखते ही देखते विशाल सभा बन गया जिसे संबोधित बापू ने किया।
आजाद चौक: वीरों की सहमति पर नामकरण
आजाद चौक स्वतंत्रता संग्राम और शहीदों की याद दिलाता है। बताया जाता है कि आजादी की लड़ाई लड़ रहे सेनानी की भी आजादी के वक्त यह चाह रहे थे कि चौक का नाम आजाद चौक रखा जाए। आपसी रजामंदी के बाद आजाद चौक का नाम तय हुआ। इस चौक की खासियत है कि इससे 4 नहीं बल्कि 5 रास्ते निकलते हैं।
आनंद समाज वाचनालय: बनती थी आजादी की रणनीति
कंकाली तालाब के पास आनंद समाज वाचनालय में आजादी की रणनीतियां बनाई जाती थीं। यह बिल्डिंग बहुत पुरानी है। वाचनालय के बनने से पहले 1899 में क्रांतिकारी पत्र-पत्रिकाएं पढ़ते हुए आजादी की लड़ाई की रणनीतियां बनाया करते थे। 1908 में बैरमजी पेस्टन के सहयोग से आनंद समाज वाचनालय का निर्माण कराया गया था। यही वो ऐतिहासिक स्थल है जहां बापू ने 1920 और 1933 में सभा को संबोधित किया था। स्मार्ट सिटी ने इस इमारत को हेरिटेज लुक दिया है।
Published on:
15 Aug 2021 01:23 pm
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