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चट्टानों का सीना चिरते हुए बह रही हाफ नदी, जानिए इसका इतिहास

यह प्राकृतिक सुंदरता सचमुच लाजवाब है। इसके चलते यह पर्यटकों का नया क्षेत्र बन चुका है।

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कवर्धा. पांडातराई नगर पंचायत से करीब ८ किलोमीटर दूर पहाड़ों की तलहटी से हाफ नदी घोघरा के चट्टानों का सीना चिरते हुए बहती है। यह प्राकृतिक सुंदरता सचमुच लाजवाब है। इसके चलते यह पर्यटकों का नया क्षेत्र बन चुका है।

ग्राम घोघरा से हाफ नदी गुजरती है। यहीं पर चट्टानों का अद्भुत समावेश है। यहां एक की कतार पर चट्टाने मौजूद हैं। चट्टानों के बीच से ही हाफ नदी कलकल की आवाज करते हुए गुजरती है, जो इस स्थान की सुंदरता को बढ़ाता है। नदी पर एनीकट बना हुए हैं जिसके कारण नदी धार ढलान होने से और तेज हो जाती है। यहां का प्राकृतिक दृश्य काफी सुंदर है। इसके चलते ही यहां पर अब स्थानीय लोगों के अलावा जिले के अन्य क्षेत्र से लोग भी पहुंचते हैं। अब यह तो पर्यटन का नया क्षेत्र भी बनता जा रहा है। बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचने लगे हैं। ठंड के दिनों में यह स्थान काफी सुकुनदायक है।

लगता है मेला
घोघरा में जहां पर चट्टानों के बीच नदी बहती है वहीं ऊपर धार्मिक स्थल भी है। यहां पर तीन मंदिर है। एक मंदिर में शिवलिंग है, जिसकी वजह से यहां पर हर साल महाशिवरात्रि पर मेला लगता है। मेले में आसपास गांव के अलावा अन्य क्षेत्र से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं।