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MP Laxmi Verma: राज्यसभा में गूंजा ‘जय जोहार’, लक्ष्मी वर्मा ने अनोखे अंदाज में ली शपथ, बढ़ाया छत्तीसगढ़ का मान

MP Laxmi Verma Takes Oath: छत्तीसगढ़ की सांसद लक्ष्मी वर्मा ने राज्यसभा में शपथ ली। खास साड़ी में भोरमदेव मंदिर और छत्तीसगढ़ महतारी की झलक के साथ ‘जय जोहार’ का संदेश दिया, प्रदेश का मान बढ़ाया।

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राज्यसभा में गूंजा ‘जय जोहार’ (photo source- Patrika)

राज्यसभा में गूंजा ‘जय जोहार’ (photo source- Patrika)

MP Laxmi Verma: छत्तीसगढ़ की नवनिर्वाचित राज्यसभा सांसद Laxmi Verma ने देश के उच्च सदन Rajya Sabha में शपथ लेकर अपने संसदीय कार्यकाल की औपचारिक शुरुआत की। यह अवसर उनके लिए ही नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व और भावनाओं से भरा क्षण रहा। शपथ ग्रहण के साथ ही उन्होंने प्रदेश की जनता की आवाज को राष्ट्रीय मंच पर मजबूती से उठाने का संकल्प लिया।

MP Laxmi Verma: ‘छत्तीसगढ़ महतारी’ का भव्य चित्र भी साड़ी में दर्शाया

इस खास मौके पर लक्ष्मी वर्मा का परिधान भी चर्चा का केंद्र बन गया। उन्होंने एक विशेष रूप से डिजाइन की गई साड़ी पहनी, जो पूरी तरह छत्तीसगढ़ की संस्कृति, परंपरा और गौरवशाली विरासत को दर्शा रही थी। साड़ी के मुख्य भाग में Bhoramdeo Temple की सुंदर आकृति उकेरी गई थी, जिसे छत्तीसगढ़ का ‘खजुराहो’ भी कहा जाता है। इसके साथ ही ‘छत्तीसगढ़ महतारी’ का भव्य चित्र भी साड़ी में दर्शाया गया, जो प्रदेश की आस्था और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है।

साड़ी की किनारी पर पारंपरिक अभिवादन “जय जोहार” लिखा हुआ था, जो छत्तीसगढ़ की सरलता, आत्मीयता और भाईचारे का संदेश देता है। इस अनूठे परिधान के माध्यम से उन्होंने यह संदेश दिया कि वे केवल एक जनप्रतिनिधि के रूप में नहीं, बल्कि अपनी माटी और संस्कृति की सच्ची प्रतिनिधि बनकर संसद पहुंची हैं।

MP Laxmi Verma: लक्ष्मी वर्मा ने यह भी किया स्पष्ट

शपथ लेने के बाद अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए लक्ष्मी वर्मा ने कहा कि यह उनके सार्वजनिक जीवन का सबसे महत्वपूर्ण और भावुक क्षण है। उन्होंने कहा कि उनका यह परिधान उनके लिए सिर्फ कपड़ा नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की पहचान, परंपरा और ‘छत्तीसगढ़ महतारी’ का आशीर्वाद है। उन्होंने प्रदेश की जनता, शीर्ष नेतृत्व और अपने समर्थकों के प्रति आभार व्यक्त किया।

लक्ष्मी वर्मा ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्यसभा में उनका हर कदम और हर आवाज छत्तीसगढ़ के सर्वांगीण विकास, जनहित और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए समर्पित रहेगा। उनके इस अनूठे अंदाज की प्रदेश ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना हो रही है। यह पहल न केवल एक सांस्कृतिक संदेश है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि आधुनिक राजनीति में अपनी जड़ों से जुड़े रहना कितना महत्वपूर्ण है।