
प्रतीकात्मक तस्वीर: पत्रिका
Chhattisgarh News: राजधानी रायपुर सहित अन्य प्रमुख शहरों में सरकारी यानी नजूल की जमीनों को दान पत्र देकर बेचने का बड़ा खेल सामने आ रहा है। इसका खुलासा सुशासन तिहार के तहत लगाए जा रहे शिविरों में मिल रही शिकायतों से हो रहा है। पिछले दिनों राजधानी रायपुर में ही आयोजित सुशासन शिविर में करीब पांच आवेदन आए थे, जिस पर कहा गया है कि संतोषी नगर, मठपुरैना, कुशालपुर, चंगोराभाठा सहित अन्य इलाकों में शासन द्वारा आवंटित पट्टे की जमीन को दान-पत्र के जरिए लाखों रुपए में बेचा जा रहा है। यहीं नहीं, इस तरह की शिकायतें सिर्फ राजधानी रायपुर के अलावा अन्य प्रमुख शहरों बिलासपुर, दुर्ग-भिलाई, कोरबा, धमतरी, महासमुंद सहित अन्य शहरों में आयोजित सुशासन शिविर में आ रही है।
सूत्रों के अनुसार तालाब, चारागाह और सरकारी पट्टे की जमीनों को कब्जाने और बेचने के इस नेटवर्क में भू-माफिया भी सक्रिय हैं। आरोप है कि फर्जी दस्तावेज तैयार कर और राजस्व रेकॉर्ड में हेराफेरी कर सरकारी संपत्तियों को निजी भूमि की तरह दर्शाया जा रहा है। इसके बाद इन्हें भोले-भाले लोगों को बेच दिया जाता है।
फर्जी दान-पत्र तैयार करना: भू-माफिया किसी पुरानी अप्रयुक्त या सरकारी जमीन जिसका कोई स्पष्ट निजी मालिक न हो पर फर्जी तरीके से किसी स्थानीय व्यक्ति या खुद को मालिक बताकर एक दान-पत्र तैयार कर लेते हैं।
सरकारी कर्मचारियों की मदद लेकर खसरा, नक्शा में छेड़छाड़ की जाती है, ताकि उसे निजी जमीन दिखाया जा सके। तीसरे पक्ष को बेचना: एक बार दान-पत्र के जरिए नाम चढ़ जाने के बाद उस जमीन को किसी अनजान व्यक्ति को वास्तविक संपत्ति समझकर बेच दिया जाता है।
जानकारी के मुताबिक, भू-माफिया खासतौर पर आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को निशाना बना रहे हैं। एजेंटों और दलालों के माध्यम से ऐसे लोगों तक पहुंचकर मोटी रकम का लालच दिया जाता है और पट्टे की जमीन को अपने कब्जे में ले लिया जाता है।
दान पत्र के जरिए पट्टे वाली जमीन को औने-पौने दाम में लेकर रसूखदार और भू-माफिया वहां कुछ महीने में भी बड़ा काम्प्लेक्स तान देते हैं और महंगे दाम पर किराए पर एक-एक दुकानों को चढ़ा देते हैं।
बता दें कि राजधानी रायपुर में नजूल जमीन जिसे पट्टे पर दी गई है, उसे दान-पत्र के जरिए बेचने की शिकायतें कलेक्ट्रेट से लेकर राजस्व विभाग तक की जाती हैं, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं होती है। वजह यह बताई जा रही है कि इस पूरे खेल में रसूखदार लोगों की भूमिका रहती है, जिनकी अधिकारियों से सांठगांठ होती है।
नियम के अनुसार सरकारी यानी पट्टे पर दी गई जमीन बेचना पूरी तरह गैर-कानूनी है। ऐसा पाए जाने पर सरकार जमीन वापस ले सकती और संबंधित लोगों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जा सकता है।
मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि पट्टे पर दी गई जमीन को दान-पत्र के जरिए बेच नहीं सकते हैं। जहां-जहां से शिकायतें आ रही है, वहां इस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
Published on:
20 May 2026 04:53 pm
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