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किसानों की तरह अब मछुआरों को बिना ब्याज के ऋण और बिजली बिल की छूट

- मछली पालन को खेती का दर्जा देने बनेगी कार्ययोजना: सीएम- बिना ब्याज के ऋण और बिजली बिल की छूट का भी मिल सकेगा लाभ

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रायपुर. विश्व मत्स्य दिवस पर मुख्यमंत्री के निवास कार्यालय में छत्तीसगढ़ मछुआरा समाज सम्मेलन में मुख्यमंत्री ने बड़ा एलान किया है। मुख्यमंत्री ने कहा, राज्य सरकार छत्तीसगढ़ में मछली पालन को खेती का दर्जा देने की पहल करेगी। मुख्यमंत्री ने इसके लिए अधिकारियों को कार्य योजना बनाने के निर्देश भी दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा, खेती-किसानी की तरह मछली पालन के लिए कोऑपरेटिव बैंक से ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराने और किसानों को दी जाने वाली बिजली दरों में छूट की भांति मछली पालन करने वाले निषाद, केंवट और ढीमर समाज के लोगों को भी छूट की पहल की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर 15 मछुआरों को मोटरसाइकिल सह आइस बॉक्स तथा 2 मछुआरों को ऑटो सह आइस बॉक्स का वितरण किया। उन्होंने इस मौके पर 10 मछुआ हितग्राहियों को मछुआ आवास योजना के अंतर्गत 40-40 हजार रुपए की प्रथम किस्त अनुदान राशि का चेक भी वितरित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे ने की। इस दौरान गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू, संसदीय सचिव कुंवर सिंह निषाद, शकुंतला साहू, विकास उपाध्याय, राज्य मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष एमआर निषाद, राज्य खनिज विकास निगम के अध्यक्ष गिरीश देवांगन सहित अन्य जनप्रतिनिधि व अधिकारी मौजूद थे।

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वैज्ञानिक पद्धति से करें मछली पालन
मुख्यमंत्री ने कहा कि मछुआरा समाज को विभिन्न योजनाओं में अनुदान सहायता दी जा रही है, लेकिन इससे उनकी आर्थिक स्थिति में बहुत ज्यादा परिवर्तन नहीं आ पाया है। इसके लिए जरूरी है कि निषाद, केंवट समाज वैज्ञानिक पद्धति से मछली पालन करें और विक्रय का अच्छा प्रबंधन करे।

समाज के आरक्षण के लिए भी होगी पहल
मुख्यमंत्री ने समाज द्वारा की गई आरक्षण की मांग का उल्लेख करते हुए कहा कि यह एक लम्बी प्रक्रिया है। राज्य सरकार इसके लिए भी पहल करेगी, लेकिर आज निजीकरण का दौर है। पं. नेहरु और इंदिरा गांधी द्वारा स्थापित सार्वजनिक उपक्रमों को निजी हाथों में दिया जा रहा है। जिससे देश को नुकसान होगा।

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लाभांश का हिस्सा देने बनाएगी नीति
कृषि मंत्री चौबे ने कहा, मछुआ महासंघ यह तय करे कि छत्तीसगढ़ में मछली पालन निषाद, केंवट समाज की मछुआ सहकारी समिति के माध्यम से किया जाए या प्रदेश में तेंदूपत्ता संग्रहण की नीति की भांति समिति में काम करने वाले लोगों को शासन द्वारा तय मजदूरी और मछली पालन के व्यवसाय से होने वाले लाभ का लाभांश मिले। राज्य सरकार इसके लिए नीति बनाएगी।