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Chhattisgarh News: नीति आयोग की 11वीं बैठक, तीन साल में बस्तर के हर परिवार की आय 30 हजार रुपये प्रतिमाह तक पहुंचाने का लक्ष्य

Bastar employment: मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर अब नई पहचान की ओर बढ़ रहा है। वहां दूध उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। युवाओं को रोजगार मिलेगा तथा गांवों में डेयरी केंद्र, दूध संग्रहण, परिवहन और स्थानीय बाजार जैसी नई आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
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रायपुर

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Updated: 12 Jun 2026, 10:30 AM IST

Chhattisgarh News

नीति आयोग की बैठक में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने रखा विकसित छत्तीसगढ़ का विजन (Photo Patrika)

Bastar latest News: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की 11वीं बैठक में नक्सलवाद से मुक्त बस्तर की नई तस्वीर देश के सामने रखी। उन्होंने कहा कि दशकों तक हिंसा की मार झेलने वाला बस्तर अब आर्थिक पुनरुत्थान, रोजगार, शिक्षा, पर्यटन और कृषि आधारित विकास का मॉडल बनेगा।

Bastar Development news: बस्तर के आदिवासी परिवारों की आय दोगुनी

मुख्यमंत्री ने बैठक में बस्तर के आदिवासी परिवारों की आय दोगुनी करने, दुग्ध क्रांति लाने, 32 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करने, पर्यटन को बड़े उद्योग के रूप में विकसित करने तथा एआई और सेमीकंडक्टर जैसे आधुनिक क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने की व्यापक कार्ययोजना प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि विकसित भारत-2047 के विजन के अनुरूप छत्तीसगढ़ को विकसित राज्य बनाने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है।

गांवों में डिजिटल स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंच रही

राष्ट्रपति भवन में आयोजित इस बैठक में केंद्रीय मंत्री, विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री, केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपाल, नीति आयोग के उपाध्यक्ष, सदस्य और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर अब नई पहचान की ओर बढ़ रहा है। वहां दूध उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है, खेतों तक पानी पहुंचाने की योजनाएं बनाई जा रही हैं, गांवों में डिजिटल स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंच रही हैं और युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

बस्तर के परिवारों की मासिक आय बढ़ाकर 30 हजार

उन्होंने बताया कि अगले तीन वर्षों में बस्तर के परिवारों की मासिक आय बढ़ाकर 30 हजार रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। वर्तमान में बस्तर के लगभग 85 प्रतिशत परिवारों की मासिक आय 15 हजार रुपये से कम है। सरकार खेती, पशुपालन, वन उपज, छोटे उद्योग और विभिन्न योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने पर काम कर रही है।

बस्तर में डेयरी मॉडल लागू

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर में “डेयरी मॉडल” को तेजी से लागू किया जा रहा है। इसके तहत आदिवासी परिवारों को दुधारू गाय और भैंस उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई है। इसका उद्देश्य गांवों में स्थायी आय का स्रोत तैयार करना है। इस पहल से महिलाओं और युवाओं को रोजगार मिलेगा तथा गांवों में डेयरी केंद्र, दूध संग्रहण, परिवहन और स्थानीय बाजार जैसी नई आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।

2,000 करोड़ रुपये से अधिक लागत

उन्होंने बताया कि सिंचाई सुविधा बढ़ाने के लिए 2,000 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाले दो बड़े प्रोजेक्ट शुरू किए जा रहे हैं। इन परियोजनाओं से 32 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। इंद्रावती नदी क्षेत्र में सालभर पानी उपलब्ध होने से खेती बेहतर होगी, उत्पादन बढ़ेगा और किसान धान के साथ-साथ सब्जियां, फल तथा अन्य नकदी फसलें भी उगा सकेंगे।

36 लाख लोगों की डिजिटल हेल्थ प्रोफाइल तैयार

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर के दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए लगभग 36 लाख लोगों की डिजिटल हेल्थ प्रोफाइल तैयार की जा रही है। इससे मरीजों के इलाज, बीमारी और दवाओं का रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा तथा डॉक्टरों को समय पर सही जानकारी मिल सकेगी। इसका सबसे अधिक लाभ ग्रामीण क्षेत्रों, महिलाओं और बुजुर्गों को मिलेगा।

राज्य सरकार की 371 योजनाओं का लाभ

उन्होंने बताया कि बस्तर में बने लगभग 200 सुरक्षा शिविरों को अब “सेवा डेरा” के रूप में विकसित किया जा रहा है। इन केंद्रों के माध्यम से ग्रामीणों को राशन, पेंशन, आयुष्मान कार्ड, बैंकिंग, स्वास्थ्य और शिक्षा सहित केंद्र एवं राज्य सरकार की 371 योजनाओं का लाभ एक ही स्थान पर उपलब्ध कराया जा रहा है।

सिरपुर में ग्लोबल मेडिटेशन सेंटर

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार चित्रकोट और बौद्ध धर्म से जुड़े तीर्थस्थल सिरपुर को विश्वस्तरीय पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित कर रही है। बस्तर में वॉटर स्पोर्ट्स, एडवेंचर स्पोर्ट्स और जंगल सफारी जैसी गतिविधियों का विस्तार किया जा रहा है, जबकि सिरपुर में ग्लोबल मेडिटेशन सेंटर, संग्रहालय और महानदी तट के विकास पर कार्य जारी है।

पर्यटन रोजगार का बड़ा माध्यम

उन्होंने कहा कि पर्यटन रोजगार का बड़ा माध्यम बन सकता है। पर्यटकों के आने से होटल, परिवहन, गाइड, हस्तशिल्प, दुकानदारों और स्थानीय उद्यमियों को रोजगार मिलता है। बस्तर को वैश्विक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने से हजारों युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

राज्य में 435 सुधार लागू

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार निवेश, सुशासन और तकनीक आधारित विकास को तेजी से आगे बढ़ा रही है। राज्य में 435 सुधार लागू किए गए हैं और सिंगल विंडो सिस्टम को मजबूत बनाकर निवेश के लिए बेहतर वातावरण तैयार किया गया है। उन्होंने बताया कि राज्य में सेमीकंडक्टर क्षेत्र की दो आधुनिक इकाइयां स्थापित की जा रही हैं।

विकास का नया मॉडल तैयार

उन्होंने कहा कि बस्तर में शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास और डिजिटल तकनीक के जरिए विकास का नया मॉडल तैयार किया जा रहा है। अबूझमाड़ और जगरगुंडा में 100 करोड़ रुपये की लागत से एजुकेशन सिटी विकसित की जा रही है। इसके साथ ही 341 पीएमश्री स्कूल, 5,857 स्मार्ट क्लासरूम और 16 स्थानीय भाषाओं में द्विभाषी पुस्तकों के माध्यम से बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है।

33 लाख से अधिक किसानों को डिजिटल सेवा

मुख्यमंत्री ने बताया कि एग्रीस्टैक योजना के तहत 33 लाख से अधिक किसानों को डिजिटल सेवाओं से जोड़ा गया है। डिजिटल द्वार प्लेटफॉर्म और अटल मॉनिटरिंग पोर्टल के माध्यम से सरकारी सेवाओं को अधिक पारदर्शी और सरल बनाया गया है। उन्होंने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए सरकार ने एआई मिशन, पर्यटन मिशन, खेल मिशन, अधोसंरचना मिशन और स्टार्टअप-निपुण मिशन शुरू किए हैं। इन मिशनों से युवाओं को रोजगार, तकनीक और उद्यमिता के नए अवसर मिलेंगे तथा छत्तीसगढ़ को नवाचार और निवेश के अग्रणी राज्यों में शामिल किया जाएगा।

उद्योग निवेश और निर्यात को नई गति

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत के तहत छत्तीसगढ़ में उद्योग, निवेश और निर्यात को नई गति मिली है। खेल सामग्री, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, बायो-एथेनॉल, गारमेंट और टेक्सटाइल जैसे क्षेत्रों में नए उद्योग स्थापित हो रहे हैं, जिससे रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं। पर्यावरण संरक्षण के लिए ग्रीन इंडस्ट्रीज को भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है।

एक जिला-एक उत्पाद

उन्होंने बताया कि ‘एक जिला-एक उत्पाद’ (ओडीओपी) योजना से राज्य के स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार मिल रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में फरवरी 2026 तक 761.76 करोड़ रुपये का निर्यात हुआ, जिसमें खुशबूदार चावल का सबसे बड़ा योगदान रहा। इससे किसानों, कारीगरों और उद्यमियों की आय में वृद्धि हो रही है।