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इन गांवों में जवान होते ही लोगों की हो जाती है मौत, डॉक्टर भी हैरान है इस रहस्य से

अब तक 110 से भी ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है..
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रायपुर

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Chandu Nirmalkar

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Updated: 3 May 2018, 9:06 PM IST

chhattisgarh news

चंदू निर्मलकर@रायपुर. छत्तीसगढ़ में एक इलाक एेसा भी है जहां लोग जवानी की दहलीज पर कदम रखते ही मौत के आगोश में समा जाते हैं। पिछले एक दशक से हो रही लगातार मौतों के बाद अब तो डॉक्टर भी इन मौतों को लेकर हैरान हैं।दरअसल राजधानी रायपुर से करीब 80 किलोमीटर दूर गरियाबंद जिले के सुपेबेड़ा और उससे लगे 5 गांवों के लोग किडनी की रहस्यमय बीमारी जूझ रहे हैं। अब तक 110 से भी ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। पिछले सप्ताह भी दो लोगों की मौत हुई है।

महिला की मौत से फैली सनसनी
गरियाबंद जिले के सुपेबेड़ा गांव में किडनी बीमारी से जूझ रही 55 वर्षीय भोजनी बाई की मौत अस्पताल में इलाज के दौरान हो गई है। इससे पहले बीते 29 अप्रैल को पदमनी बाई की अंबेडकर अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। इसे मिलाकर सप्ताह भर में प्रभावित क्षेत्र से इस बीमारी की वजह से यह दूसरी मौत है। महिला की मौत के बाद से गांव में सन्नाटा पसर गया है। इन दोनों मृतकों को मिलाकर इस गांव में पिछले 13 वर्षों में किडनी की बीमारी से 61 लोगों की जानें जा चुकी है। वहीं, ग्रामीणों के मुताबिक अब तक 110 से भी ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। लगातार हो रही मौतों से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। उनका आरोप है कि तमाम दावों के बाद भी शासन-प्रशासन इस बीमारी से निजात दिलाने में असफल दिखाई दे रहा है।

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युवा से लेकर अधेड़ तक के 187 लोग बीमारी से प्रभावित
किडनी की बीमारी से प्रभावित इस गांव में लोग एक-एक कर मौत की आगोश में समा रहे हैं। यहां युवा से लेकर अधेड़ वर्ग के लोग बीमारी की चपेट में हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार अभी भी 187 से अधिक लोग किडनी की बीमारी से जूझ रहे हैं। इस पर स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि मरीजों के निरंतर प्रतिमाह कैंप का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें लोगों जागरुक करने के साथ उनका उपचार भी किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग इस परेशानी की व्यवस्था बनाने में शुरू से ही नाकाम साबित हो रहा है।

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डॉक्टर भी नहीं बात पा रहे है आखिर कैसे बचाया जाए मरीजों को

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आइसीएमआर) की टीम यहां के मरीजों से नमूने लेकर गई है, लेकिन वह भी कोई रिपोर्ट नहीं दे पाई। सूबे का स्वास्थ्य विभाग एक स्पष्ट रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है ताकि साफ हो सके कि गांव वालों को इस रहस्यमय बीमारी से कैसे बचाया जा सके। इस बीच बीमारी का कहर जारी है।

पिछले महीने ही सुपेबेड़ा गांव में एक बीमार व्यक्ति की मौत हुई है। इधर सरकार का लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के प्रमुख अभियंता टीजी कोसरिया कह रहे हैं, वहां के पानी में फ्लोराइड और कॉर्बन की मात्रा अधिक मिली है।

(स्रोत: निजी सर्वे में जुटाई गई जानकारी)

स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्रतिमाह प्रभावित क्षेत्र में शिविरों का आयोजन कर लोगों को जागरुक करने के साथ उनका इलाज किया जा रहा है। साथ ही पीएचइ के माध्यम से की गई पानी की जांच रिपोर्ट में भी अब फ्लोराइड की मात्रा नहीं देखने को मिली है।
रानू साहू, संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं

कुछ नहीं कहा जा सकता
बीमारी के बारे में कुछ निश्चयात्मक तौर पर नहीं कहा जा सकता। आइसीएमआर की टीम भी कुछ ठोस नहीं ढूंढ पाई है।
सुब्रत साहू, प्रमुख सचिव, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण