
लॉकडाउन में आपदा को बना रहे अवसर: नक्सली पीएलजीए में कर रहे स्कूली छात्र-छात्राओं की भर्ती
रायपुर. नक्सली (Naxali Crime) अपनी सक्रियता दिखाने और दहशत फ़ैलाने के लिए ग्रामीणों को निशाना बनाते हैं। पुलिस का मुखबिर बताकर हत्या करते हैं। इस तरह की घटनाएं मई से अक्टूबर के बीच सर्वाधिक होती है। इसे देखते हुए राज्य पुलिस (Chhattisgarh Police) ने इंटेलिजेंस की टीम को अलर्ट रहने और स्थानीय मुखबिरों के माध्यम से जानकारी जुटाने के लिए कहा है।
साथ ही उनकी गतिविधियों पर निगाह रखने के निर्देश दिए गए हैं। बता दें कि बारिश के दौरान बड़े नक्सली सुरक्षित ठिकानों में शरण लेते हैं। इस दौरान गतिविधियों को संचालित करने के लिए स्थानीय कैडर को जिम्मेदारी सौंपी जाती है। उन्हें नए लोगों की भर्ती करने और प्रशिक्षण शिविर चलाने कहा जाता है। इस दौरान वह वाहनों में आगजनी और ग्रामीणों की हत्या जैसी वारदात को अंजाम देते हैं।
इतनी हत्या
2018 में करीब 70, 2019 में 30 और जनवरी से जून के बीच 16 लोगों की हत्या की गई है। इसमें अधिकांश ग्रामीणों शामिल है। राज्य पुलिस के अधिकारिक सूत्रों ने बताया कि नक्सली अक्सर जन अदालत और बैठक लेकर हत्या करते हैं। कई बार घरों से बाहर निकालकर भी वारदात को अंजाम दिया गया है। इनमें मृतक पर मुखबिरी करने का आरोप लगाया गया है।
इसलिए करते हैं हत्या
फाॅर्स के दबाव में पिछले काफी समय से बैकफुट पर चल रहे नक्सली अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए वारदात करते हैं। इस दौरान पुलिस और फ़ोर्स से दूर रहने और जन हितैषी कार्यों का विरोध करते हैं। साथ ही इसकी शिकायत करने पर अंजाम भुगतने की चेतावनी देते हैं। इसके कारण अक्सर पुलिस थाने तक नहीं पहुंच पाती है।
Published on:
03 Jul 2020 01:25 pm
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