
Bastar Naxal Victims: छत्तीसगढ़ के बस्तर में रहने वाले नक्सल प्रभावित पीड़ितों ने शनिवार (21 सितंबर) को राष्ट्रपति भवन का दौरा किया। नक्सल पीड़ितों के प्रतिनिधिमंडल में शामिल 70 लोगों के लिए यह दिन बेहद खास था।

Bastar Naxal Victims: प्रतिनिधिमंडल के सभी लोगों को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलने का मौका मिला। इस दौरान उनके चेहरों पर वर्षों की पीड़ा के निशान थे, लेकिन उनकी आंखों में उम्मीद की किरण भी देखी गई। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल पर इन लोगों को राष्ट्रपति भवन ले जाया गया था।

Bastar Naxal Victims: प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति को बताया कि पिछले चार दशकों से बस्तर के लोग नक्सली आतंक का दंश झेल रहे हैं। इन हमलों के कारण हजारों लोगों की जान चली गई है और सैकड़ों लोग विकलांग हो गए हैं।

Bastar Naxal Victims: राष्ट्रपति भवन पहुंची 16 वर्षीय नक्सल पीड़िता राधा सलाम ने राष्ट्रपति को अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि माओवादी हिंसा के कारण उसने अपने एक आंख की रोशनी खो दी है। उसने पूछा कि आखिर इसमें मेरा क्या कसूर है? राधा ने बताया कि जब उसके साथ घटना हुई, तब वह केवल तीन वर्ष की थी।

Bastar Naxal Victims: राष्ट्रपति से मिलने पहुंचे पीड़ितों ने कहा कि माओवादियों ने उनके जीवन को नर्क बना दिया है। उन्होंने बताया कि बस्तर में माओवादी आतंक के कारण स्थितियां ऐसी है कि आम जन-जीवन जीना भी मुश्किल हो गया है।

Bastar Naxal Victims: बारूदी सुरंगों और बम विस्फोटों ने न केवल शारीरिक नुकसान पहुंचाया है, बल्कि उन्हें मानसिक रूप से भी तोड़ दिया है। प्रतिनिधियों ने बताया कि किस तरह नक्सलियों ने उनके घर, जमीन और संस्कृति को नष्ट कर दिया है। पिछले 25 वर्षों में 8,000 से अधिक लोग नक्सली हिंसा के शिकार हुए हैं। इससे पहले अमित शाह से पीड़ित ने मुलाकात की थी।

Bastar Naxal Victims: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन के अशोक मंडप में सभी से मुलाकात की। बस्तरवासियों का दर्द सुन राष्ट्रपति ने नक्सलियों से हिंसा का रास्ता छोड़ने की अपील की। साथ ही जब उन्होंने बच्चों को देखा तो सभी के लिए चॉकलेट मंगवाकर अपने हाथों से दिया।

Bastar Naxal Victims: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल पर माओवादी हिंसा की वजह से अपाहिज हुए बस्तर के लोग बस्तर शांति समिति के बैनर तले दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किए थे।