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Government Employees Rule: अब सरकारी नौकरी में लापरवाही पड़ेगी भारी, बिना सूचना छुट्टी लेने वालों पर गिरेगी गाज, आदेश जारी

Government Employees News लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय जांच कर सेवा से हटाने तक की कार्रवाई की जा सकती है।

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Government Employees Rule

सरकारी नौकरी में लापरवाही पड़ेगी भारी (Photo AI)

Government Employees Rule: अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित शासकीय सेवकों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी। ऐसे कर्मचारियों की विभागीय जांच में आरोप सिद्ध होने पर सेवा से भी हटाया जा सकता है। लोक शिक्षा संचालनालय ने सभी संभागीय संयुक्त संचालक और जिला शिक्षा अधिकारी को इसके आदेश भी जारी कर दिए हैं। निर्देश में कहा गया है कि सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित शासकीय सेवकों के विरुद्ध कार्यवाही संबंधी निर्देश जारी किए गए हैं।

Government Employees Rule: अधिकारियों पर होगी कार्रवाई

यह भी स्पष्ट किया गया है अनाधिकृत अनुपस्थिति के संबंध में तत्काल कार्यवाही की जानी चाहिए। साथ ही ऐसे शासकीय सेवक को विभागीय जांच के दौरान निलंबित में रखना आवश्यक नहीं है क्योंकि वे निलंबन भत्ते आदि की मांग करते हैं। निर्देशों का उल्लंघन करने वाला अधिकारी या शासकीय सेवक के कर्तव्य विमुख पाए जाने पर उनके संबंधित पर्यवेक्षक अधिकारियों के विरुद्ध भी अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी।

तीन वर्ष अनुपस्थित रहने पर सेवा से त्यागपत्र दिया हुआ समझा जाएगा

ऐसे शासकीय सेवक जो एक माह या उससे अधिक अवधि के लिए अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित रहते हैं, उनकी अनुपस्थिति की अवधि को सेवा-व्यवधान माना जाएगा। साथ ही ऐसे शासकीय सेवक को किसी प्रकार का अवकाश स्वीकृत नहीं किया जाएगा। विभागीय जांच में आरोप सिद्ध होने पर सेवा से हटाने या सेवा से पदच्युत भी माना जाएगा।

पत्र भेजकर पूछा जाएगा कारण

इससे पहले अनुपस्थित रहने वाले शासकीय सेवकों को सूचना पत्र भेजकर 15 दिवस में कारण पूछा जाएगा कि क्यों न उनकी उक्त अनाधिकृत अनुपस्थिति को सेवा में व्यवधान मानते हुए पेंशन, उपादान आदि समस्त प्रयोजनों के लिए उनकी सेवा पुस्तिका में इन्द्राज किया जाए? साथ ही कोई शासकीय सेवक, अवकाश सहित या बिना अवकाश के तीन वर्ष से अधिक निरंतर अवधि के लिये कर्तव्य से अनुपस्थित रहता है तो उसे शासकीय सेवा से त्यागपत्र दिया हुआ समझा जाएगा।

पुरानी व्यवस्था में बदलाव क्यों जरूरी था

अब तक की व्यवस्था में, प्राइमरी से लेकर हाई स्कूल तक के लापरवाह शिक्षकों को केवल 'कारण बताओ नोटिस' या निलंबन की सजा मिलती थी। निलंबन के दौरान भी उन्हें घर बैठे नियमानुसार भत्ता मिलता रहता था और विभागीय सांठगांठ के कारण कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पाती थी। हालात में सुधार न होता देख, सरकार ने अब सीधे बर्खास्तगी और पेंशन रोकने जैसा कड़ा रुख अख्तियार किया है, ताकि शासकीय स्कूलों में शिक्षा के स्तर और अनुशासन को अक्षुण्ण रखा जा सके।

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