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नए आवास का प्रस्ताव भूलकर पुराने में ही कर दिए लाखों खर्च, नया रायपुर का कॉन्सेप्ट अभी अधूरा

नया रायपुर के लिए इस प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिली, वहीं रायपुर में मंत्री व अधिकारियों ने बंगले में बीते पांच वर्षों में नव-निर्माण के लिए लाखों रुपए खर्च कर दिए

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नए आवास का प्रस्ताव भूलकर पुराने में ही कर दिए लाखों खर्च, नया रायपुर का कॉन्सेप्ट अभी अधूरा

रायपुर. लोक निर्माण विभाग ने तीन साल पहले नया रायपुर में मंत्री-अधिकारियों के निवास का प्रस्ताव भेजा था, लेकिन इस प्रस्ताव को वित्त विभाग से प्रशासकीय स्वीकृति नहीं मिल पाई, वहीं बजट को लेकर मामला गरमाया। इधर नया रायपुर के लिए इस प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिली, वहीं रायपुर में मंत्री व अधिकारियों ने बंगले में बीते पांच वर्षों में नव-निर्माण के लिए लाखों रुपए खर्च कर दिए। स्वयं लोक निर्माण मंत्री ने बंगले में सुख-सुविधाओं के लिए निर्माण कराया, वहीं अन्य मंत्रियों व अधिकारियों के निवास पर रंग-रोगन, सजावट व सुख-सुविधाओं के लिए बजट मंजूरी में कोई दिक्कत नहीं आई। नया रायपुर के सेक्टर-17 और 18 में यह निर्माण होना था। तीन साल पहले यदि बजट को स्वीकृति मिल जाती तो अभी निर्माण पूर्णता की स्थिति में होता, लेकिन अभी नया रायपुर में मंत्रियों के निवास योजना में एक ईंट भी नहीं जोड़ी जा सकती है, जिसका नतीजा यह है कि पुराने घर को ही चमकाया जा रहा है।

मंत्री-अधिकारियों के 100 से अधिक बड़े बंगले और 250 से अधिक छोटे बंगलों के मेंटेनेंस में ही हर साल लगभग 50 लाख से 1 करोड़ रुपए की राशि खर्च हो रही है। इसमें टूट फूट से लेकर रंग-रोगन, लाइटिंग, सुरक्षा आदि शामिल हैं।

पीडब्ल्यूडी के चीफ इंजीनियर एसके शर्मा ने कहा कि पीडब्ल्यूडी ने नया रायपुर में मंत्री-अधिकारियों के निवास के लिए तीन साल पहले प्रस्ताव भेजा था। निर्माण के लिए विभागीय स्वीकृति नहीं मिलने की वजह से लेटलतीफी हुई।

जवाब- अभी नया रायपुर नया है। इसमें समय लगेगा। हम पूरा प्रयास कर रहे हैं।

नया रायपुर में रहने के बजाय यहीं पुराने घर में ही लाखों रुपए खर्च करने के मामले में आईएएस, आईपीएस, आईएफएस सहित सचिव स्तर के अधिकारी भी शामिल हैं।

मंत्री-अधिकारियों ने जहां नया रायपुर में बसने के बजाय सुख-सुविधाओं को देखते हुए वर्तमान निवास को ज्यादा तरजीह दी, वहीं मेंटेनेंस में बजट की परवाह नहीं की, वहीं उनके ही विभाग के कर्मचारियों के छप्परों के मेंटेनेंस के लिए बजट स्वीकृत नहीं हुआ। यह हालात कई कर्मचारी कॉलोनियों की है, जहां आज भी छत से पानी टपक रहा है।